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Kota: डायलिसिस कराने से महिला मरीजों ने किया मना, सरकार से मांगी इच्छामृत्यु और किडनी ट्रांसप्लांट; जानें

Wed, 15 Jul 2026 07:20 PM IST
कोटा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटा Published by: कोटा ब्यूरो Updated Wed, 15 Jul 2026 07:20 PM IST
सार

कोटा मेडिकल कॉलेज में सीजेरियन के बाद किडनी संबंधी समस्या से जूझ रहीं चार महिलाओं ने डायलिसिस कराने से इनकार कर इच्छामृत्यु और किडनी ट्रांसप्लांट की मांग की। मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मरीजों की हालत में सुधार है और जरूरत के अनुसार डायलिसिस जारी रहेगा।

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Female patients refuse dialysis, request euthanasia and kidney transplant from the government
महिला मरीजों ने अस्पताल से बाहर आकर बताई अपनी पीड़ा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के कोटा मेडिकल कॉलेज के सुपर स्पेशियलिटी विंग में भर्ती सीजेरियन पीड़ित महिलाओं के मामले में नया मोड़ आ गया है। सीजेरियन के करीब 70 दिन बाद किडनी संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझ रहीं चार महिला मरीज मीडिया के सामने आईं और अपनी पीड़ा साझा की। नेफ्रोलॉजी वार्ड में भर्ती इन महिलाओं ने अब डायलिसिस कराने से इनकार कर दिया है। उनका कहना है कि लंबे समय से इलाज के बावजूद स्वास्थ्य में अपेक्षित सुधार नहीं हो रहा है, इसलिए उन्होंने इच्छामृत्यु की मांग भी उठाई है।

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दो दिन पहले इन महिलाओं के परिजनों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर किडनी ट्रांसप्लांट कराने की मांग की थी। परिजनों ने प्रशासन को 48 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया था, जिसकी अवधि बुधवार को पूरी हो गई। इसके बाद महिलाएं खुद मीडिया के सामने आईं और डायलिसिस नहीं कराने की बात कही। उनका कहना है कि उनकी किडनियां ठीक से काम नहीं कर रही हैं और हर दूसरे दिन होने वाले डायलिसिस से शरीर पूरी तरह टूट चुका है।

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पीड़ित महिलाओं रागिनी, पिंकी और धन्नी बाई ने बताया कि वे मई महीने में अस्पताल में भर्ती हुई थीं, जहां उनका सीजेरियन ऑपरेशन हुआ। ऑपरेशन के बाद 70 दिन से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन वे अब भी अस्पताल में भर्ती हैं। उनका कहना है कि डायलिसिस के दौरान उन्हें तेज बुखार आता है, हालत बिगड़ जाती है और असहनीय दर्द होता है। इसलिए अब वे केवल किडनी ट्रांसप्लांट कराना चाहती हैं और डायलिसिस नहीं कराएंगी।

वहीं, कोटा मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि जिन पांच महिलाओं की सीजेरियन के बाद तबीयत गंभीर हुई थी, उनकी स्थिति पहले की तुलना में काफी बेहतर है और लगातार सुधार हो रहा है। उन्होंने बताया कि जरूरत के अनुसार ही मरीजों का डायलिसिस किया जा रहा है। फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि उन्हें कब तक डायलिसिस की आवश्यकता पड़ेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक किडनियां सामान्य रूप से काम करना शुरू नहीं करतीं, तब तक डायलिसिस जरूरी है। डॉ. जैन ने यह भी कहा कि यदि मरीज घर जाना चाहें तो उन्हें डिस्चार्ज किया जा सकता है और वे तय समय पर डायलिसिस के लिए अस्पताल आ सकती हैं।

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