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रात के सन्नाटे में गूंजता विरोध: कायमपुराबास की पहाड़ी पर खनन के खिलाफ जनसंघर्ष, NGT से लेकर डीएम तक शिकायत

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली-बहरोड़ Published by: कोटपुतली ब्यूरो Updated Thu, 22 Jan 2026 09:07 AM IST
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सार

MP: कोटपूतली-बहरोड़ के कायमपुराबास में खनन के खिलाफ ग्रामीण 480 दिन से धरने पर हैं। ब्लास्टिंग में मजदूर की मौत हो गई और मकानों में दरारें पड़ीं हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन और एनजीटी से शिकायतों के बावजूद खनन जारी है।

Public struggle against mining on Kayampurabas hill complaints filed with the NGT and the District Magistrate
धरना-प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कोटपूतली जिले के कायमपुराबास गांव की पहाड़ी पर चल रहा खनन अब सिर्फ पर्यावरण या नियमों का मामला नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीणों के लिए जिंदगी और मौत की जंग बन चुका है। ग्लैक्सी इंफ्रा लिमिटेड द्वारा किए जा रहे खनन के विरोध में ग्रामीण पिछले 480 दिनों से लगातार धरने पर बैठे हैं, लेकिन न तो प्रशासन ने उनकी सुनी और न ही खनन पर कोई रोक लगी।

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खनन क्षेत्र से महज 400 मीटर दूर बसे एससी और ओबीसी समुदाय के दर्जनभर परिवार हर ब्लास्टिंग के साथ मौत के साए में जीने को मजबूर हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि ब्लास्टिंग के दौरान उड़ते पत्थर सीधे आबादी की ओर गिरते हैं। कई मकानों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और हर धमाके के साथ भय और असुरक्षा का माहौल और गहरा होता जा रहा है।

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ब्लास्टिंग बनी मौत का कारण
शनिवार को खनन के दौरान हुई ब्लास्टिंग ने हालात की भयावह सच्चाई उजागर कर दी। उड़ते पत्थरों की चपेट में आकर बिहार निवासी मजदूर छोटेलाल की मौके पर ही मौत हो गई। हैरानी की बात यह है कि इस हादसे के बाद भी न तो खनन रुका और न ही किसी जिम्मेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई। इस घटना से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं, जब मजदूर ही सुरक्षित नहीं हैं, तो गांव की सुरक्षा की क्या गारंटी है?


प्रशासनिक निरीक्षण, लेकिन नतीजा शून्य
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, खनन विभाग और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) तक कई बार शिकायतें दर्ज कराईं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिले। बुधवार को खनन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे, जिससे ग्रामीणों को कुछ उम्मीद जगी, लेकिन निरीक्षण के बाद अधिकारी बिना किसी ठोस फैसले के लौट गए।

रातभर इंतजार, अधिकारी नहीं पहुंचे
बुधवार रात ग्रामीणों को सूचना दी गई कि एनजीटी की टीम मौके पर पहुंचने वाली है। इस उम्मीद में ग्रामीण भूखे-प्यासे पूरी रात धरना स्थल पर बैठे रहे, लेकिन देर रात तक कोई अधिकारी नहीं पहुंचा। मौके पर केवल मीडिया कर्मी मौजूद रहे। दिल्ली से आए पत्रकारों ने हालात का जायजा लिया और ग्रामीणों की पीड़ा सुनी।

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संघर्ष जारी रहने का एलान
धरना स्थल पर अनिल यादव, मनोज यादव, योगेंद्र कुमार, शांति देवी, रेवती देवी, कृष्ण, जयप्रकाश, लालचंद टेलर, बाबूलाल, भूपेंद्र, सुनीता, अनिता, बीना, उर्मिला, महेंद्र, ओमप्रकाश सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने दो टूक ऐलान किया है कि जब तक खनन पर पूरी तरह रोक नहीं लगती और सुरक्षित जीवन की गारंटी नहीं मिलती, तब तक उनका संघर्ष जारी रहेगा।

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