ग्रामीण अंचलों में घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने लोगों की दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित कर दी है। सुबह से लेकर देर रात तक छाया रहने वाला कोहरा न केवल आवागमन में बाधा बन रहा है, बल्कि दैनिक कार्यों पर भी इसका सीधा असर देखा जा रहा है। सबसे अधिक परेशानी किसानों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें रात्रि के समय खेतों में फसलों की सिंचाई के लिए भीषण ठंड का सामना करना पड़ रहा है। ठंड के चलते हाथ-पैर सुन्न हो जाने के बावजूद किसान अपनी फसलों की देखभाल में जुटे हुए हैं।
कृषि पर्यवेक्षक कुलदीप ने बताया कि वर्तमान मौसम हाल ही में उगी सरसों, गेहूं और चने जैसी रबी फसलों के लिए किसी जीवनदान से कम नहीं है। उन्होंने कहा कि कोहरा और ठंड के कारण खेतों में प्राकृतिक नमी बनी रहती है, जिससे सिंचाई की आवश्यकता कुछ हद तक कम हो जाती है। आंकड़ों के अनुसार, इस मौसम में मिट्टी की नमी 20 से 25 प्रतिशत तक अधिक बनी रहती है, जो फसलों की शुरुआती बढ़वार के लिए अत्यंत लाभकारी मानी जाती है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि न्यूनतम तापमान 5 से 7 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने से गेहूं की टिलरिंग प्रक्रिया बेहतर होती है, जिससे उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना रहती है। वहीं सरसों की फसल में इस मौसम के कारण फूल आने की अवस्था मजबूत होती है, जिससे दाने भराव बेहतर होता है। चने की फसल के लिए भी यह तापमान अनुकूल बताया जा रहा है, जिससे कीट प्रकोप की आशंका कम हो जाती है।
हालांकि, ठंड और कोहरे के कारण ग्रामीणों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। बुजुर्गों और बच्चों में सर्दी-जुकाम की शिकायतें बढ़ी हैं। इसके बावजूद किसान वर्ग इस मौसम को फसलों के लिए वरदान मानते हुए मेहनत में कोई कमी नहीं छोड़ रहा है। यदि आने वाले दिनों में मौसम इसी तरह अनुकूल बना रहा, तो इस वर्ष रबी फसलों की पैदावार बेहतर रहने की पूरी उम्मीद जताई जा रही है।