Kotputli-Behror News: सरिस्का से भटका शावक गांव पहुंचा, ग्रामीण पर किया हमला, 10 घंटे बाद ट्रैंकुलाइज कर पकड़ा
जंगल से भटककर ग्रामीण इलाके में पहुंचे शावक ने एक ग्रामीण पर हमला कर दिया, जिसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर पथराव कर दिया। सात घंटे की मशक्कत के बाद शावक को ट्रैंकुलाइज कर पकड़ लिया गया।
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सरिस्का टाइगर रिजर्व से भटककर नारायणपुर उपखंड क्षेत्र के तुलसीवाला गांव पहुंचा एक टाइगर शावक बुधवार को पूरे दिन ग्रामीणों और वन विभाग के लिए चुनौती बना रहा। सुबह करीब नौ बजे गांव के पुराने रास्ते की झाड़ियों में दिखाई दिए शावक ने भीड़ के बीच एक ग्रामीण पर हमला कर उसे घायल कर दिया। घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया और वन विभाग के वाहनों पर पथराव करते हुए कई गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए। करीब दस घंटे तक चले हाई-वोल्टेज रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शाम साढ़े सात बजे शावक को ट्रैंकुलाइज कर सुरक्षित कब्जे में लिया गया।
वन विभाग के अनुसार शावक पिछले आठ-दस दिनों से जंगल से बाहर विभिन्न क्षेत्रों में विचरण कर रहा था और नई टेरिटरी की तलाश में लगातार आगे बढ़ रहा था। बुधवार सुबह वह तुलसीवाला गांव के पास पुराने रास्ते की घनी झाड़ियों में जाकर बैठ गया। टाइगर की सूचना फैलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। भीड़ बढ़ने से स्थिति लगातार संवेदनशील होती गई।
वन विभाग की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर क्षेत्र की घेराबंदी की और लोगों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने तथा भीड़ नहीं लगाने की अपील की। अधिकारियों ने बताया कि शावक को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित जंगल में वापस भेजने की योजना बनाई गई थी लेकिन लगातार बारिश और ग्रामीणों की भारी भीड़ के कारण रेस्क्यू अभियान प्रभावित होता रहा।
भीड़ के बीच ग्रामीण पर किया हमला
इसी दौरान दोपहर बाद कुछ ग्रामीण झाड़ियों के काफी नजदीक पहुंच गए कि अचानक शावक ने ग्रामीण पर झपट्टा मार दिया, जिससे ग्रामीण खुशीराम घायल हो गए। वन विभाग के अधिकारियों ने तत्काल उन्हें अस्पताल पहुंचाकर उपचार शुरू कराया। उनकी हालत खतरे से बाहर बताई गई है।
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आक्रोशित ग्रामीणों ने किया पथराव
घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने सड़क जाम कर वन विभाग की कार्यशैली पर नाराजगी जताई। देखते ही देखते कुछ लोगों ने वन विभाग के वाहनों पर पथराव कर दिया। पथराव में एसीएफ, डीएफओ और ट्रैंकुलाइजेशन टीम सहित चार सरकारी वाहनों के शीशे टूट गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल बुलाना पड़ा।
घटना की गंभीरता को देखते हुए कोटपूतली-बहरोड़ के पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे। उनके साथ नारायणपुर उपखंड अधिकारी दिनेश शर्मा, तहसीलदार कैलाश मेहरा, मुख्य वन संरक्षक (सीसीएफ) संग्राम सिंह कटियार, डीएफओ अभिमन्यु साहरण, एसीएफ हितेश, अंकुश जिंदल, ट्रैंकुलाइजेशन विशेषज्ञ डॉ. दीनदयाल मीणा तथा बानसूर, बासदयाल और नारायणपुर थानों के पुलिस अधिकारी भारी पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर मौजूद रहे।
सात घंटे बाद मिली सफलता
वन विभाग की टीम ने पूरे दिन शावक की गतिविधियों पर नजर बनाए रखी। लगातार बारिश और भीड़ के कारण ट्रैंकुलाइज करने का उपयुक्त अवसर नहीं मिल पा रहा था। आखिरकार शाम साढ़े सात बजे विशेषज्ञ टीम ने सफलतापूर्वक ट्रैंकुलाइज कर शावक को बेहोश किया और सुरक्षित वाहन में रखकर जंगल की ओर रवाना किया।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शावक का अभी तक आधिकारिक नामकरण नहीं हुआ है। प्रारंभिक अनुमान के अनुसार यह सरिस्का की बाघिन एसटी-12 का द्वितीय शावक हो सकता है जो करीब एक महीने से अपने क्षेत्र से गायब बताया जा रहा था। वहीं कुछ अधिकारियों का मानना है कि यह एसटी-17 का शावक भी हो सकता है। इसकी अंतिम पुष्टि वन विभाग की जांच के बाद ही की जाएगी।
वन विभाग ने बताया कि हाल के दिनों में इसी शावक द्वारा दो भैंसों का शिकार किए जाने की भी जानकारी मिली थी। अधिकारियों ने ग्रामीणों से अपील की है कि भविष्य में वन्यजीव दिखाई देने पर स्वयं उसके पास न जाएं, भीड़ न लगाएं और तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।