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Kotputli: गरीब बच्चों की पढ़ाई में मिसाल बनी अध्यापिका अशोक यादव, जानिए कैसे बदल रही जिंदगी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोटपूतली
Published by: कोटपुतली ब्यूरो
Updated Sun, 18 Jan 2026 06:44 PM IST
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सार
Kotputli: कोटपूतली की सरकारी अध्यापिका अशोक यादव ने गरीब और असहाय बच्चों की शिक्षा में मिसाल पेश की है। वे निजी आय से किताबें, कॉपियां और पेन-पेंसिल उपलब्ध कराती हैं और समय निकालकर स्वयं बच्चों को पढ़ाती हैं।
बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित करती हुई अध्यापिका।
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विस्तार
कोटपूतली विधानसभा क्षेत्र की सरकारी अध्यापिका अशोक यादव ने शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मिसाल पेश की है। वे न सिर्फ विद्यालय में अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन कर रही हैं, बल्कि अपनी निजी आय से गरीब और असहाय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई में भी मदद कर रही हैं।
खुद के पैसे से उपलब्ध करवा रही पाठ्य सामग्री
अशोक यादव जरूरतमंद बच्चों को कॉपियां, किताबें, पेन-पेंसिल जैसी आवश्यक पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवा रही हैं। इसके अलावा वे समय निकालकर स्वयं बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी करती हैं, ताकि संसाधनों की कमी के कारण किसी बच्चे की शिक्षा अधूरी न रह जाए। उनकी यह पहल क्षेत्र में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बना रही है।
सड़क दुर्घटना में हो गया था पति का निधन
अध्यापिका अशोक यादव ने बताया कि नौकरी लगने से पहले एक सड़क दुर्घटना में उनके पति का निधन हो गया था। इस कठिन दौर ने उन्हें मजबूत बनाया और समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील भी। इसी अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने का संकल्प दिलाया।
ये भी पढ़ें: उदयपुर पुलिस में बड़ा फेरबदल: 96 कॉन्स्टेबलों के तबादले, 53 को मिला प्रमोशन
शिक्षा ही वह बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकती है: अशोक
हाल ही में उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले गरीब बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकती है। अशोक यादव का मानना है कि आर्थिक तंगी कई परिवारों के लिए बड़ी बाधा बन जाती है, लेकिन ऐसे बच्चों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनकी इस मानवीय पहल से न सिर्फ क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि अन्य लोगों को भी समाजसेवा के लिए प्रेरणा मिल रही है।
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खुद के पैसे से उपलब्ध करवा रही पाठ्य सामग्री
अशोक यादव जरूरतमंद बच्चों को कॉपियां, किताबें, पेन-पेंसिल जैसी आवश्यक पाठ्य सामग्री उपलब्ध करवा रही हैं। इसके अलावा वे समय निकालकर स्वयं बच्चों को पढ़ाने का कार्य भी करती हैं, ताकि संसाधनों की कमी के कारण किसी बच्चे की शिक्षा अधूरी न रह जाए। उनकी यह पहल क्षेत्र में शिक्षा के प्रति सकारात्मक माहौल बना रही है।
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सड़क दुर्घटना में हो गया था पति का निधन
अध्यापिका अशोक यादव ने बताया कि नौकरी लगने से पहले एक सड़क दुर्घटना में उनके पति का निधन हो गया था। इस कठिन दौर ने उन्हें मजबूत बनाया और समाज के कमजोर वर्ग के प्रति संवेदनशील भी। इसी अनुभव ने उन्हें जरूरतमंद बच्चों की शिक्षा में सहयोग करने का संकल्प दिलाया।
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शिक्षा ही वह बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकती है: अशोक
हाल ही में उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले गरीब बच्चों को पाठ्य सामग्री वितरित की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो बच्चों को आत्मनिर्भर बना सकती है। अशोक यादव का मानना है कि आर्थिक तंगी कई परिवारों के लिए बड़ी बाधा बन जाती है, लेकिन ऐसे बच्चों को भी आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए। उनकी इस मानवीय पहल से न सिर्फ क्षेत्र में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ रही है, बल्कि अन्य लोगों को भी समाजसेवा के लिए प्रेरणा मिल रही है।