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LPG Crisis: गैस की किल्लत का असर, होटलों और ढाबों में बंद हुई तवा चपाती, तंदूर में बन रही हैं रोटियां

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: Priya Verma Updated Thu, 12 Mar 2026 11:57 AM IST
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सार

जयपुर के सिंधी कैंप बस अड्डे के आसपास के ढाबों पर कमर्शियल गैस सिलिंडरों की कमी के चलते कई ढाबों ने तवा चपाती बनाना बंद कर दिया है और अब कोयला-लकड़ी के तंदूर पर खाना बनाकर ग्राहकों को तंदूरी रोटी परोस रहे हैं।

LPG Shortage Hits Jaipur Eateries Dhabas Stop Switch to Tandoor Rotis Amid Gas Crisis
अब ढाबों पर मिलेगी केवल तंदूरी रोटी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

कमर्शियल गैस सिलिंडरों की लगातार कमी और बढ़ती कीमतों के चलते राजधानी जयपुर के सिंधी कैंप बस अड्डे के बाहर स्थित कई ढाबों पर अब तवा चपाती मिलना लगभग बंद हो गया है। ढाबा संचालकों ने अपने किचन की व्यवस्था अब कोयला, लकड़ी और भट्टी से चलने वाले चूल्हों पर शिफ्ट कर दी है। इसका सीधा असर ग्राहकों को मिलने वाले खाने पर पड़ रहा है, क्योंकि अब उन्हें तवा चपाती की जगह तंदूरी रोटी से ही संतोष करना पड़ रहा है।

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सिंधी कैंप क्षेत्र में ढाबा संचालित करने वाले खंडेलवाल ढाबा के संचालक ने बताया कि गैस सिलिंडर की उपलब्धता इतनी मुश्किल हो गई है कि अब तवा चपाती बनाना संभव नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि कई दिनों तक सिलिंडर की व्यवस्था करने के लिए काफी कोशिश करनी पड़ी लेकिन अब स्थिति इतनी खराब हो गई है कि उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था अपनानी पड़ रही है।
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ढाबा संचालक के अनुसार- हमने बहुत प्रयास किया कि गैस सिलिंडर का जुगाड़ हो जाए लेकिन बार-बार मना सुनना पड़ा। कई लोगों से अनुरोध करना पड़ा, जिससे काफी असहज स्थिति पैदा हो गई। आखिरकार हमने तय किया कि अब कोयला, लकड़ी और तंदूर के जरिए ही खाना बनाया जाएगा।

ये भी पढ़ें: LPG Crisis: अवैध गैस रिफिलिंग पर प्रशासन की सख्ती, रसद विभाग ने सवीना में छापेमारी कर 6 सिलेंडर जब्त किए

उन्होंने बताया कि अब ढाबे पर कोयले और लकड़ी से चलने वाले तंदूर और चूल्हों का इस्तेमाल शुरू कर दिया गया है। हालांकि इस बदलाव के साथ कई नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। कोयला और लकड़ी की कीमतों में भी तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, जिससे ढाबा संचालकों की चिंता बढ़ गई है।

कोयला व्यापारियों का कहना है कि मौजूदा कीमतों की कोई गारंटी नहीं है कि वे आगे भी इसी स्तर पर बनी रहेंगी। साथ ही यह भी निश्चित नहीं है कि आने वाले दिनों में कोयले की पर्याप्त उपलब्धता रहेगी या नहीं। ढाबा संचालक ने बताया कि भट्टी के लिए इस्तेमाल होने वाले कबाड़ के ड्रम, जो पहले करीब 100 रुपये में मिल जाते थे, अब उनकी कीमत बढ़कर लगभग 900 रुपये तक पहुंच गई है।

उन्होंने कहा कि कोयला और लकड़ी पर खाना बनाना गैस की तुलना में अधिक समय लेता है, जिससे भोजन तैयार करने की क्षमता भी प्रभावित हो रही है। अनुमान है कि इस व्यवस्था के कारण ढाबों पर बनने वाले खाने की मात्रा में करीब 25 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।

जयपुर आने-जाने वाले यात्रियों के लिए सिंधी कैंप बस अड्डे के आसपास के ढाबे हमेशा से सस्ते और जल्दी मिलने वाले खाने के लिए मशहूर रहे हैं लेकिन गैस संकट के कारण अब यहां की व्यवस्था भी बदल रही है, जिसका असर सीधे तौर पर ढाबा संचालकों और ग्राहकों दोनों पर पड़ रहा है। मालपुरा (टोंक) से आए एक यात्री ने बताया कि उनके क्षेत्र में तो गैस संकट के कारण कई ढाबे बंद होने लगे हैं।
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