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Hindi News ›   Rajasthan ›   Nagaur News: Rajasthan Family Breaks Tradition, 10-Year-Old Daughter Honoured as Family's Successor

Nagaur News: पाग दस्तूर में बदली सदियों पुरानी परंपरा, इकलौती बेटी बनी परिवार की उत्तराधिकारी

Mon, 27 Jul 2026 03:01 PM IST
नागौर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: नागौर ब्यूरो Updated Mon, 27 Jul 2026 03:01 PM IST
सार

पिता के निधन के बाद जहां परंपरा के अनुसार किसी पुरुष उत्तराधिकारी को पगड़ी पहनाई जाती थी, वहीं राजस्थान के सुरियास गांव में परिवार ने इस परंपरा को बदलते हुए 10 वर्षीय बेटी को 'पाग दस्तूर' की रस्म निभाकर उत्तराधिकारी घोषित किया।

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Nagaur News: Rajasthan Family Breaks Tradition, 10-Year-Old Daughter Honoured as Family's Successor
बेटी को पगड़ी पहनाकर पूरा किया पाग दस्तूर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान की सदियों पुरानी सामाजिक परंपराओं में पिता के वैकुंठवास के बाद ज्येष्ठ पुत्र को उत्तराधिकारी मानते हुए 'पाग दस्तूर' (पगड़ी पहनाने) की रस्म निभाई जाती रही है। पुत्र नहीं होने की स्थिति में अक्सर किसी रिश्तेदार को गोद लेकर यह परंपरा पूरी की जाती थी लेकिन रियां बड़ी पंचायत समिति के ग्राम सुरियास में रविवार को इस परंपरा को नई सोच के साथ निभाते हुए समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश किया गया। यहां मृतक की 10 वर्षीय बेटी भाविका कंवर को पगड़ी पहनाकर परिवार की आधिकारिक विरासत सौंपी गई।

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सुरियास निवासी कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को बीमारी के कारण अल्पायु में निधन हो गया था। उनके परिवार में एकमात्र संतान 10 वर्षीय पुत्री भाविका कंवर (बिट्टू) है। रविवार को बारहवें की रस्म के दौरान परिवार के पुरुष सदस्य परंपरा के अनुसार किसी निकट संबंधी को गोद लेने पर विचार कर रहे थे। इसी दौरान दिवंगत कानसिंह के मामा शंकरसिंह राजावत और भाविका के मामा महावीरसिंह सिंगोद ने परिवार की महिलाओं से चर्चा की।
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इस संवेदनशील अवसर पर कानसिंह की माता और पत्नी ने दृढ़ता से कहा- बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए पाग दस्तूर हमारी बेटी का ही होगा। परिवार के इस साहसिक निर्णय का पीहर और ससुराल पक्ष ने सर्वसम्मति से समर्थन किया और भाविका को उत्तराधिकारी बनाने पर सहमति जताई। परंपरा के अनुसार सबसे पहले दादी के पीहर पक्ष से शंकरसिंह राजावत और इसके बाद ननिहाल पक्ष से महावीरसिंह सिंगोद ने भाविका को पगड़ी पहनाकर 'पाग दस्तूर' की रस्म पूरी कराई।

परिवार के अनुसार- पिछली चार पीढ़ियों से प्रत्येक पीढ़ी में केवल एक ही पुरुष सदस्य रहा है। अब कानसिंह के निधन के बाद परिवार की विरासत का केंद्र उनकी इकलौती बेटी भाविका बनी है। ग्रामीणों और समाज के प्रबुद्ध लोगों ने बेटी को परिवार की विरासत का अधिकार देने की इस पहल की सराहना करते हुए इसे बदलते सामाजिक सोच और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम बताया।

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