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बहन के लिए भाई का प्यार: राजस्थान में किसान के बेटों ने तीन करोड़ का मायरा भरा, सोने-चांदी की बौछार लगा दी
Fri, 07 Feb 2025 06:23 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: अरविंद कुमार
Updated Fri, 07 Feb 2025 06:23 PM IST
सार
राजस्थान के नागौर में किसान बाप के तीन बेटों ने मिलकर अपनी बहन के लिए करीब तीन करोड़ का मायरा भरा। इसमें एक करोड़ 51 लाख नकद सहित सोना-चांदी और प्लाट शामिल है।
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बेटों ने तीन करोड़ का मायरा भरा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नागौर जिले में मुगलों के समय से ही मायरा काफी प्रसिद्ध रहा है। आज फिर नागौर का मायरा इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में लिखा गया। तीन भाइयों ने एक बार फिर मायरे को चर्चा का विषय बना दिया। किसान बेटों ने अपनी सबसे छोटी बहन के लिए एक करोड़ 51 लाख रुपये नकद और सोने-चांदी सहित तकरीबन तीन करोड़ रुपये का मायरा भरा। जैसे ही गाड़ियों का काफिला आया, इसे देखकर हर कोई अचंभित रह गया।
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बता दें कि साडोकण हाल नागौर शहर के हनुमान बाग निवासी रामबक्स खोजा के तीनों बेटे हरनीवास खोजा (अध्यापक), दयाल खोजा (अध्यापक) और हरचंद खोजा ने अपनी बहन बिराजया देवी के घर दिल खोलकर मायरा भरा। रामबक्स खोजा के तीन बेटे और एक बेटी है। दो बेटे सरकारी शिक्षक और एक प्राइवेट कंपनी में काम कर रहा है। रामबक्स खोजा अपने तीनों बेटों के साथ नागौर के हनुमान बाग में रहते हैं। इनके एक ही बेटी है, बेटी का ससुराल जायल विधानसभा के फरडौद निवासी मदनलाल (अध्यापक) के साथ शादी हुई। रामबक्स खोजा खेती-बाड़ी का काम करते हैं।
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रामबक्स के दोहिते और दोहिती की आज शादी थी। इनका आज मायरा था। मायरे की रीत-रिवाज नागौर में जायल के खिंयाला का रियासत काल से ही प्रसिद्ध था। रामबक्स अपने परिवार, रिश्तेदारों और मिलने वालों के साथ बेटी के घर दो हजार लोगों के साथ पहुंचे। तीनों भाइयों ने मिलकर अपनी बहन बिराजया को चुनरी ओढ़ाई और मायरे की शुरुआत की। मायरे में एक करोड़ 51 लाख रुपये नकद, 30 तोला सोना, पांच किलो चांदी और दो प्लॉट नागौर शहर में बहन के नाम किए। इस दौरान महेंद्र चौधरी (पूर्व राजस्थान सरकार के उप मुख्य सचेतक) सुनीता चौधरी (पूर्व जिला प्रमुख) और रिद्धकरण लामरोड़ (पूर्व प्रधान जायल) सहित हजारों लोग मौजूद रहे।
नागौर का मायरा सदियों से प्रसिद्ध
नागौर में जायल के जाटों का मायरा सदियों से प्रसिद्ध है। मारवाड़ में इस मायरे को कॉफी सम्मान की नजर से देखा जाता है। गूगल साम्राज्य के दौरान जायल के खियाला और जायल के जाटों ने मिलकर लिछमा गुजरी को अपनी धर्म की बहन मानकर भर गए थे। मायरा आज भी जब शादी होती है और उस समय मायरा आता है तो महिलाएं लोकगीत में भी गाती हैं। कहा जाता है कि खियाला के जाट धर्माराम और गोपालराम दोनों मुगल साम्राज्य में बादशाह के लिए टैक्स कलेक्शन का काम करते थे और टैक्स कलेक्शन कर टैक्स को जमा करवाने के लिए वह दिल्ली दरबार जा रहे थे। जब दोनों भाई दिल्ली टैक्स कलेक्शन दिल्ली दरबार में जमा करवाने जा रहे थे।
इसी दौरान बीच रास्ते में शादी के दिन लिछमा गुजरी नामक एक महिला बिलखती हुई रोती हुई नजर आई। जब उन्होंने कारण पूछा तो लिछमा गुजरी ने बताया कि उसके घर पर शादी है, बेटों की और उसके कोई भाई नहीं हैं, जिसके कारण उसके बच्चों की शादी में अब मायरा कौन लेकर आएगा। तब उन्होंने धर्माराम और गोपाल रामजाट ने ढांढस बांधते हुए कहा कि वह तुम्हारे भाई हैं और तुम चलो घर हम करेंगे मायरा। उस दौरान दोनों जाटों ने अपनी बहन लिछमा गुजरी के लिए टैक्स कलेक्शन के सारे रुपये से मायरा भर दिया। दूसरी तरफ बादशाह नाराज हो गए, वह समय पर नहीं पहुंचे थे। जब वह पहुंचे तब सारी बात बादशाह के सामने रखी तो उन्होंने सजा देने के बजाय उनको माफ कर दिया।
कब हुई मायरे की शुरुआत
मायरे की शुरुआत 600 साल पूर्व नरसी भगत ने शुरू की थी। नरसी भगत का जन्म गुजरात के जूनागढ़ में 600 साल पहले हुआ था, उस समय हुमायूं का शासन काल था। नरसी भगत जो कि जन्म से ही गूंगे और बहरे थे। वह अपनी दादी के पास ही रहते थे, उनके एक भाई भाभी भी थे। भाभी का स्वभाव कड़क था, लेकिन नरसी भगत जो कि एक संत प्रवृत्ति के व्यक्ति थे। इसी प्रवृत्ति के चलते उनको आवाज और उनका वीरप्पन ठीक हो गया। नरसी जी के मां बाप एक महामारी के शिकार हो गए, नरसी भगत की शादी हुई थी और पत्नी भी भगवान के प्यारी हो गई। नरसी जी की दूसरी शादी भी करवाई, कुछ दिन बीतने पर नरसी जी के घर पर एक लड़की का जन्म हुआ और उसका नाम नानीबाई रखा नरसी बाई नरसी भगत ने अपनी बेटी की शादी अंजार नगर में करवा दी। दूसरी तरफ नरसी जी की भाभी ने उनको घर से निकाल दिया, नरसी भगवान श्री कृष्ण के अटूट भगत हैं।
वह उन्हीं की भक्ति में लीन हो गए, भगवान शंकर की कृपा से उन्होंने ठाकुर जी के भी दर्शन कर लिए। उसके बाद तो नरसी जी ने सांसारिक मोहेबी त्याग दिया और संत बन गए उधर नरसी भाई ने पुत्री को जन्म दिया और पुत्री विवाह लाइक हो गई। किंतु नरसी को कोई खबर नहीं थी, लड़की के विवाह पर ननिहाल की तरफ से भात भरने की रसम के चलते नरसी जी को नरसी के पास देने के कुछ नहीं थे, नरसी जी के पास खुद की टूटी-फूटी बैलगाड़ी और बूढ़े 220 हैं। नरसी जी ने अपने कुटुम के भाई लोगों से मदद मांगी, लेकिन उन्होंने भी इंकार कर दिया। अपनी टूटी-फूटी और बूढ़े लोगों को लेकर नरसी भगत अपनी बेटी के घर अंजार पहुंच गए, भक्ति के कारण भगवान श्री कृष्ण ने 56 करोड़ का मायरा भरा था।