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Rajasthan: चेतन डूडी के बयान से गरमाई डीडवाना की सियासत, बोले- कांग्रेस नहीं तो भाजपा को वोट देना बेहतर
Fri, 07 Aug 2026 05:36 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 05:36 PM IST
सार
Rajasthan News: डीडवाना-कुचामन में पंचायत चुनाव की तैयारियों के बीच पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता चेतन डूडी का एक बयान चर्चा में है। वायरल वीडियो में वे कार्यकर्ताओं से हनुमान बेनीवाल और असदुद्दीन ओवैसी के नाम का जिक्र करते हुए कांग्रेस को वोट देने की अपील करते हैं। जानिए डूडी ने क्या कहा...
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कांग्रेस नेता चेतन डूडी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पंचायत चुनाव को लेकर पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता चेतन डूडी के घर पर आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में दिए गए एक बयान ने डीडवाना-कुचामन और नागौर की राजनीति में चर्चा तेज कर दी है। वायरल हो रहे वीडियो में चेतन डूडी कहते नजर आ रहे हैं, “आने वाले पंचायत, विधानसभा या लोकसभा चुनाव में हमें किसी हनुमान बेनीवाल या ओवैसी के चक्कर में नहीं पड़ना है। या तो सीधा कांग्रेस को वोट दो, नहीं तो इनको देने से बेहतर है भारतीय जनता पार्टी को वोट दे दो।”
बयान में बेनीवाल और ओवैसी का जिक्र, सियासी मायने पर चर्चा
चेतन डूडी के बयान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिया गया है। बयान को लेकर क्षेत्र में इसके राजनीतिक मायनों पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, डूडी ने अपने बयान में किसी व्यक्ति या खेमे को लेकर अलग से कोई विस्तृत राजनीतिक व्याख्या नहीं की है।
तीन विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं चेतन डूडी
चेतन डूडी अब तक तीन विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें उन्हें एक चुनाव में जीत मिली, जबकि दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उनके जीत वाले चुनाव में हनुमान बेनीवाल की पार्टी का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था। ऐसे में मौजूदा बयान के बाद क्षेत्र की राजनीति में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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डूडी परिवार और बेनीवाल की पुरानी राजनीतिक नजदीकी भी चर्चा में
चेतन डूडी के पिता स्वर्गीय रूपाराम डूडी और हनुमान बेनीवाल के बीच कभी राजनीतिक नजदीकी रही थी। दोनों ने ज्योति मिर्धा का विरोध किया था। वर्ष 2014 में रूपाराम डूडी ने हनुमान बेनीवाल के निर्दलीय चुनाव लड़ने का समर्थन किया था। उस चुनाव में बेनीवाल को करीब 50 हजार वोट मिले थे। हालांकि, ज्योति मिर्धा चुनाव हार गई थीं।
पुराने सियासी समीकरणों के बीच नया बयान बना चर्चा का विषय
बताया जाता है कि उस चुनाव के अंतिम दौर में रूपाराम डूडी की ओर से कार्यकर्ताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान का संकेत दिया गया था। इसके बाद डूडी परिवार और ज्योति मिर्धा के बीच राजनीतिक टकराव की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में चेतन डूडी का मौजूदा बयान पुराने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
यह भी पढ़ें: देवराज पलाड़ा मामले पर समाज और सरकार में बनी सहमति, पीड़ित परिवार को मिली त्वरित सहायता
पंचायत चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी बयानबाजी
चेतन डूडी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पंचायत चुनाव में आरएलपी के कार्यकर्ताओं के सक्रिय होने की संभावना है। वहीं, यूनुस खान के समर्थकों के भी चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। अब सभी की नजरें हनुमान बेनीवाल की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।
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बयान में बेनीवाल और ओवैसी का जिक्र, सियासी मायने पर चर्चा
चेतन डूडी के बयान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रमुख हनुमान बेनीवाल और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी का नाम लिया गया है। बयान को लेकर क्षेत्र में इसके राजनीतिक मायनों पर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, डूडी ने अपने बयान में किसी व्यक्ति या खेमे को लेकर अलग से कोई विस्तृत राजनीतिक व्याख्या नहीं की है।
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तीन विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं चेतन डूडी
चेतन डूडी अब तक तीन विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं। इनमें उन्हें एक चुनाव में जीत मिली, जबकि दो चुनावों में हार का सामना करना पड़ा। उनके जीत वाले चुनाव में हनुमान बेनीवाल की पार्टी का कोई उम्मीदवार मैदान में नहीं था। ऐसे में मौजूदा बयान के बाद क्षेत्र की राजनीति में इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
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डूडी परिवार और बेनीवाल की पुरानी राजनीतिक नजदीकी भी चर्चा में
चेतन डूडी के पिता स्वर्गीय रूपाराम डूडी और हनुमान बेनीवाल के बीच कभी राजनीतिक नजदीकी रही थी। दोनों ने ज्योति मिर्धा का विरोध किया था। वर्ष 2014 में रूपाराम डूडी ने हनुमान बेनीवाल के निर्दलीय चुनाव लड़ने का समर्थन किया था। उस चुनाव में बेनीवाल को करीब 50 हजार वोट मिले थे। हालांकि, ज्योति मिर्धा चुनाव हार गई थीं।
पुराने सियासी समीकरणों के बीच नया बयान बना चर्चा का विषय
बताया जाता है कि उस चुनाव के अंतिम दौर में रूपाराम डूडी की ओर से कार्यकर्ताओं को भाजपा के पक्ष में मतदान का संकेत दिया गया था। इसके बाद डूडी परिवार और ज्योति मिर्धा के बीच राजनीतिक टकराव की चर्चाएं होती रही हैं। ऐसे में चेतन डूडी का मौजूदा बयान पुराने राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
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पंचायत चुनाव से पहले बढ़ सकती है सियासी बयानबाजी
चेतन डूडी के बयान के बाद सोशल मीडिया पर अलग-अलग राजनीतिक खेमों की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। पंचायत चुनाव में आरएलपी के कार्यकर्ताओं के सक्रिय होने की संभावना है। वहीं, यूनुस खान के समर्थकों के भी चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा है। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस, भाजपा और अन्य राजनीतिक दलों के बीच सियासी बयानबाजी तेज होने के आसार हैं। अब सभी की नजरें हनुमान बेनीवाल की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं।