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न कोई शर्त, न कोई मुआवजा: मुस्लिम परिवार ने मंदिर के लिए दान कर दी जमीन; ग्रामीणों ने साफा पहनाकर किया सम्मान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Sat, 16 May 2026 10:01 PM IST
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सार
नागौर के बड़ीखाटू में मुस्लिम परिवार ने मंदिर तक रास्ता बनाने के लिए 12 फीट जमीन दान कर भाईचारे की मिसाल पेश की। सेवानिवृत्त शिक्षक जमीर अहमद गैसावत के इस कदम की पूरे इलाके में सराहना हो रही है। लोग इसे गंगा-जमुनी तहजीब और इंसानियत का सुंदर उदाहरण बता रहे हैं।
मुस्लिम परिवार ने मंदिर के रास्ते के लिए दी जमीन
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
राजस्थान के नागौर जिले के बड़ीखाटू कस्बे से सामाजिक सद्भाव और भाईचारे की एक ऐसी मिसाल सामने आई है, जिसने हर किसी का दिल जीत लिया। जहां आज के दौर में धर्म और समुदाय के नाम पर विवाद की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं बड़ीखाटू में एक मुस्लिम परिवार ने मंदिर तक जाने के लिए अपनी निजी जमीन दान कर इंसानियत और एकता की नई कहानी लिख दी।
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक जमीर अहमद गैसावत ने चामुंडा माता और हुडा वाली माता मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अपनी निजी भूमि से 12 फीट चौड़ा स्थायी रास्ता देने का फैसला किया। खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी शर्त और मुआवजे के यह जमीन दान कर दी।
नवरात्र से पहले श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत
बड़ीखाटू की पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता और हुडा वाली माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। नवरात्र सहित अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि मंदिर तक जाने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। चामुंडा माता सेवा समिति लंबे समय से स्थायी मार्ग की मांग कर रही थी, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा था। इसी बीच जमीर अहमद गैसावत आगे आए और उन्होंने हाईवे से मंदिर तक अपनी निजी जमीन का हिस्सा रास्ते के लिए देने का निर्णय लिया।
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बिना शर्त जमीन दान कर पेश की मिसाल
शिक्षा जगत से जुड़े रहे जमीर अहमद गैसावत ने अपने पूरे जीवन में बच्चों को शिक्षा दी और अब रिटायरमेंट के बाद सामाजिक सौहार्द का संदेश दे रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ जमीन नहीं दी, बल्कि समाज को एकजुट रहने का संदेश दिया है। उनके इस फैसले के बाद पूरे कस्बे में खुशी का माहौल है। लोग इसे बड़ीखाटू की गंगा-जमुनी तहजीब का सबसे सुंदर उदाहरण बता रहे हैं।
'यही है असली भारत' कहकर गूंजा पूरा कस्बा
कार्यक्रम के दौरान चामुंडा माता सेवा समिति और समाजसेवी छोटूराम रिणवा ने जमीर अहमद गैसावत का साफा पहनाकर सम्मान किया। इस मौके पर इफ्तिकार गैसावत, राधेश्याम सोनी, मुनीर अहमद, मेघराज, रूपनारायण, ओमप्रकाश और रणजीत सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया और कहा- 'यही है असली भारत, जहां इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।'
ये भी पढ़ें- बाइक पर ‘नशे की फैक्टरी’ लेकर घूम रहे थे तस्कर: बीच रास्ते में मिल गई पुलिस; फिर पहुंच गये सलाखों के पीछे
बड़ीखाटू बना सामाजिक सौहार्द की मिसाल
स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ीखाटू में हिंदू और मुस्लिम समुदाय वर्षों से आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं। यहां त्योहारों पर एक-दूसरे के घर मिठाई बांटी जाती है और हर सुख-दुख में लोग साथ खड़े रहते हैं।
जमीर अहमद गैसावत के इस कदम ने उस परंपरा को और मजबूत कर दिया है। लोग मानते हैं कि आने वाली पीढ़ियां इस घटना को भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल के रूप में याद रखेंगी।
दिलों को जोड़ने वाली राह
यह सिर्फ मंदिर तक जाने वाले रास्ते की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिलों को जोड़ने वाली राह है। ऐसे समय में जब छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरी बढ़ती नजर आती है, वहां बड़ीखाटू से आई यह खबर उम्मीद और इंसानियत का संदेश देती है। जमीर अहमद गैसावत का यह कदम साबित करता है कि असली शिक्षा वही है, जो समाज को जोड़ने और इंसानियत को मजबूत करने का काम करे।
सेवानिवृत्त प्रधानाध्यापक जमीर अहमद गैसावत ने चामुंडा माता और हुडा वाली माता मंदिर तक श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए अपनी निजी भूमि से 12 फीट चौड़ा स्थायी रास्ता देने का फैसला किया। खास बात यह रही कि उन्होंने बिना किसी शर्त और मुआवजे के यह जमीन दान कर दी।
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नवरात्र से पहले श्रद्धालुओं को मिली बड़ी राहत
बड़ीखाटू की पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता और हुडा वाली माता मंदिर क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। नवरात्र सहित अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। हालांकि मंदिर तक जाने के लिए पर्याप्त रास्ता नहीं होने से बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती थी। चामुंडा माता सेवा समिति लंबे समय से स्थायी मार्ग की मांग कर रही थी, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा था। इसी बीच जमीर अहमद गैसावत आगे आए और उन्होंने हाईवे से मंदिर तक अपनी निजी जमीन का हिस्सा रास्ते के लिए देने का निर्णय लिया।
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'यही है असली भारत' कहकर गूंजा पूरा कस्बा
कार्यक्रम के दौरान चामुंडा माता सेवा समिति और समाजसेवी छोटूराम रिणवा ने जमीर अहमद गैसावत का साफा पहनाकर सम्मान किया। इस मौके पर इफ्तिकार गैसावत, राधेश्याम सोनी, मुनीर अहमद, मेघराज, रूपनारायण, ओमप्रकाश और रणजीत सिंह समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। ग्रामीणों ने तालियां बजाकर उनका स्वागत किया और कहा- 'यही है असली भारत, जहां इंसानियत सबसे बड़ा धर्म है।'
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स्थानीय लोगों के अनुसार बड़ीखाटू में हिंदू और मुस्लिम समुदाय वर्षों से आपसी भाईचारे के साथ रहते आए हैं। यहां त्योहारों पर एक-दूसरे के घर मिठाई बांटी जाती है और हर सुख-दुख में लोग साथ खड़े रहते हैं।
जमीर अहमद गैसावत के इस कदम ने उस परंपरा को और मजबूत कर दिया है। लोग मानते हैं कि आने वाली पीढ़ियां इस घटना को भाईचारे और सामाजिक एकता की मिसाल के रूप में याद रखेंगी।
दिलों को जोड़ने वाली राह
यह सिर्फ मंदिर तक जाने वाले रास्ते की कहानी नहीं है, बल्कि यह दिलों को जोड़ने वाली राह है। ऐसे समय में जब छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरी बढ़ती नजर आती है, वहां बड़ीखाटू से आई यह खबर उम्मीद और इंसानियत का संदेश देती है। जमीर अहमद गैसावत का यह कदम साबित करता है कि असली शिक्षा वही है, जो समाज को जोड़ने और इंसानियत को मजबूत करने का काम करे।