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Nagaur News: पीटीआई पर फर्जी शपथ-पत्र देने का आरोप, नौकरी के लिए छिपाई तीसरी संतान; जांच में जुटा शिक्षा विभाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Mon, 03 Nov 2025 07:15 PM IST
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सार
Nagaur News: नागौर में एक पीटीआई पर नौकरी पाने के लिए तीसरी संतान छिपाने का आरोप लगा है। शिकायत मिलने के बाद शिक्षा विभाग ने जांच शुरू कर दी है। दोषी पाए जाने पर शिक्षक की बर्खास्तगी और आपराधिक कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर से सम्मानित होते आरोपी पीटीआई रमेश चन्द्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
नागौर जिले के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, श्रीबालाजी में कार्यरत पीटीआई (फिजिकल ट्रेनिंग इंस्ट्रक्टर) रमेश चन्द्र पुत्र दीपाराम पर नौकरी पाने के लिए फर्जी शपथ-पत्र दाखिल करने का गंभीर आरोप लगा है।
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रमेश चन्द्र ने नियुक्ति के समय दिए गए दस्तावेज में केवल दो संतानों कुलदीप और उमेश का उल्लेख किया, जबकि शिकायत के अनुसार उनकी तीसरी संतान पूनम का जन्म नौकरी लगने से पहले ही हो चुका था। इस मामले में जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत दी गई है, जिसमें शिक्षक की बर्खास्तगी और कानूनी कार्रवाई की मांग की गई है।
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तीसरी संतान छिपाकर नियमों के उल्लंघन का आरोप
शिकायतकर्ता के मुताबिक, रमेश चन्द्र के तीनों बच्चे कुलदीप, उमेश और पूनम उनकी नियुक्ति से पहले जन्मे थे। शिकायत में दावा किया गया है कि पूनम का जन्म राजकीय अस्पताल में हुआ था और सरकार की ओर से दी जाने वाली पुत्री जन्म प्रोत्साहन राशि भी रमेश चन्द्र के बैंक खाते में जमा हो चुकी है। यह सरकारी रिकॉर्ड कथित रूप से उनके शपथ-पत्र के विपरीत तथ्यों को साबित करता है। शिकायत में कहा गया है कि सरकारी सेवाओं में भर्ती प्रक्रिया के दौरान दो से अधिक संतान होने पर अभ्यर्थी अयोग्य माना जा सकता है, इसलिए उन्होंने जानबूझकर गलत जानकारी देकर नियमों का उल्लंघन किया।
शिकायत में बर्खास्तगी और आपराधिक कार्रवाई की मांग
शिकायतकर्ता ने जिला शिक्षा अधिकारी से अनुरोध किया है कि रमेश चन्द्र के खिलाफ धोखाधड़ी, फर्जीवाड़ा और दस्तावेजों में हेराफेरी के तहत मामला दर्ज किया जाए। उन पर सेवा नियमों का उल्लंघन करने का आरोप है और कहा गया है कि यदि ऐसे लोगों को सजा नहीं दी गई, तो यह भर्ती प्रक्रिया की साख को नुकसान पहुंचाएगा।
जांच शुरू, दस्तावेजों की सत्यापन प्रक्रिया जारी
जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने शिकायत की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच शुरू की जा चुकी है। जांच के तहत शपथ-पत्र की मूल प्रति, बच्चों के जन्म प्रमाण-पत्र, अस्पताल रिकॉर्ड और बैंक डिटेल्स की पड़ताल की जाएगी। अधिकारी के अनुसार, यदि यह साबित होता है कि तीसरी संतान नौकरी से पहले जन्मी थी, तो रमेश चन्द्र पर राजस्थान सेवा नियमावली के तहत बर्खास्तगी और आपराधिक मुकदमा दर्ज किया जा सकता है।
स्थानीय स्तर पर बढ़ी नाराजगी, शिक्षक संघों ने भी जताई चिंता
इस घटना ने नागौर के शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है। स्थानीय अभिभावकों और शिक्षक संघों ने कहा है कि यदि फर्जी दस्तावेजों से नियुक्ति हुई है, तो यह योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों का हनन है और विभाग की साख पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। एक अभिभावक ने कहा कि स्कूल में बच्चों को अनुशासन सिखाने वाला शिक्षक ही अगर नियम तोड़ेगा, तो शिक्षा की नैतिकता पर क्या असर पड़ेगा?
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राजस्थान में बढ़ते फर्जीवाड़े के मामलों पर चिंता
यह प्रकरण राज्य में सरकारी नौकरियों में दस्तावेजी हेराफेरी के बढ़ते मामलों की याद दिलाता है। हाल के वर्षों में कई शिक्षक और कर्मचारी जाति प्रमाण-पत्र, आय प्रमाण-पत्र और शैक्षणिक योग्यता में गड़बड़ी के कारण पकड़े जा चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए डिजिटल वेरिफिकेशन और बायोमेट्रिक जांच प्रणाली को मजबूत करना आवश्यक है।
अस्थायी रूप से निलंबन संभव, जांच रिपोर्ट का इंतजार
सूत्रों के अनुसार, रमेश चन्द्र फिलहाल ड्यूटी पर हैं, लेकिन जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित किए जाने की संभावना है। विभागीय अधिकारी इस प्रकरण की रिपोर्ट उच्चाधिकारियों को भेजने की तैयारी कर रहे हैं। यदि आरोप साबित होते हैं, तो यह मामला नागौर जिले में एक बड़ा अनुशासनात्मक उदाहरण बन सकता है।
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