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Rajasthan News: नागौर और डीडवाना में प्रसूताओं की मौत से उठे गंभीर सवाल, परिजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Wed, 24 Jun 2026 08:33 PM IST
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सार
नागौर और डीडवाना में प्रसव के दौरान दो महिलाओं की मौत के बाद परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन और सरकार जांच रिपोर्ट आने तक किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रहे हैं।
नागौर-डीडवाना में प्रसूताओं की मौत पर उठे सवाल
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
राजस्थान में प्रसूताओं की मौत के बढ़ते मामलों के बीच नागौर और डीडवाना से सामने आई दो घटनाओं ने स्वास्थ्य व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दोनों मामलों में परिजनों ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि अस्पताल प्रशासन ने आरोपों से इंकार करते हुए जांच रिपोर्ट का इंतजार करने की बात कही है।
नागौर के राजकीय अस्पताल स्थित मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य केंद्र में खींवसर क्षेत्र के कांटिया गांव निवासी रुकमा देवी मेघवाल को प्रसव के लिए भर्ती कराया गया था। परिजनों के अनुसार सामान्य प्रसव के बाद उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया लेकिन इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों का आरोप है कि सीने में दर्द और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों के बावजूद समय पर समुचित उपचार नहीं मिला, जिसके चलते उनकी मौत हो गई। मृतका के परिजनों का आरोप है कि मौत के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले को दबाने के लिए उन्हें उच्च केंद्र रैफर करने का प्रयास किया, हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। घटना के बाद परिजन अस्पताल परिसर में धरने पर बैठ गए और चिकित्सकों के खिलाफ एफआईआर, उचित मुआवजा तथा निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
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मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने प्रारंभिक जानकारी के आधार पर मौत का कारण हार्ट फेल होना बताया। परिजनों ने सवाल उठाया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने से पहले मौत का कारण कैसे तय किया जा सकता है। वहीं दूसरी घटना डीडवाना के राजकीय बांगड़ जिला अस्पताल की है, जहां खुनखुना निवासी मोनिका (22) पत्नी भरत सिंह की प्रसव के दौरान मौत हो गई। दुखद यह रहा कि गर्भ में पल रहे शिशु की भी जान नहीं बच सकी।
परिजनों का आरोप है कि महिला की हालत बिगड़ने के बावजूद चिकित्सकों ने समय पर प्रभावी उपचार नहीं किया। उनका कहना है कि यदि समय रहते उचित इलाज मिलता तो मां और बच्चे दोनों की जान बचाई जा सकती थी। मोनिका की यह पहली डिलीवरी थी और परिवार बच्चे के जन्म का इंतजार कर रहा था। हालांकि अस्पताल प्रशासन ने लापरवाही के आरोपों को खारिज किया है। कार्यवाहक पीएमओ डॉ. सुरेश नेतड़ के अनुसार प्रसूता को पहले से दौरे (सीजर) आने की गंभीर समस्या थी। प्रसव प्रक्रिया के दौरान अचानक दौरा पड़ने से उसकी स्थिति गंभीर हो गई और चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा सका।
दोनों मामलों में पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। नागौर में मेडिकल बोर्ड गठित कर जांच कराई जा रही है, जबकि डीडवाना में भी मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया गया है। प्रशासन का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और प्रसूता देखभाल व्यवस्था को लेकर बहस तेज कर दी है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि इन मौतों के पीछे चिकित्सकीय जटिलता थी या फिर कहीं न कहीं लापरवाही की भूमिका रही।