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बजरी आंदोलन के बाद बवाल: सांसद बेनीवाल और पुलिस के बीच सोशल मीडिया पर 'वार', तड़के छापेमारी से भड़का गुस्सा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर Published by: नागौर ब्यूरो Updated Sun, 14 Jun 2026 09:21 PM IST
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सार

नागौर के रियां बड़ी में अवैध बजरी खनन के खिलाफ आंदोलन के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है। आंदोलन स्थगित होने के बाद पुलिस की तड़के छापेमारी और हिरासत की कार्रवाई को लेकर सांसद हनुमान बेनीवाल और पुलिस के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है।

Nagaur Gravel Mining Row Massive Uproar After Midnight Police Raid RLP MP Hanuman Beniwal Slams Administration
बजरी आंदोलन को लेकर छिड़ा घमासान - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार

नागौर जिले के रियां बड़ी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन के खिलाफ चल रहे आंदोलन के बाद अब राजनीतिक और प्रशासनिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल और नागौर पुलिस के बीच सोशल मीडिया पर शुरू हुई तीखी बयानबाजी ने पूरे मामले को प्रदेश स्तर की चर्चा का विषय बना दिया है।


जानकारी के अनुसार, रियां बड़ी क्षेत्र में लंबे समय से अवैध बजरी खनन और परिवहन को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी थी। इसी के विरोध में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जनसहयोग से बड़ा आंदोलन शुरू किया और जयपुर कूच का ऐलान कर दिया। आंदोलन के दौरान हजारों कार्यकर्ता और ग्रामीण नागौर से अजमेर के बीच स्थित बाड़ी घाटी तक पहुंच गए, जिसके बाद सरकार और प्रशासन को हस्तक्षेप करना पड़ा।
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प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बनी सहमति
मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, खनन विभाग तथा अन्य अधिकारियों ने आंदोलनकारियों से वार्ता की। बातचीत के दौरान बजरी माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई, विवादित खनन लीजों की जांच तथा आंदोलनकारियों पर दर्ज मामलों में राहत सहित कई बिंदुओं पर सहमति बनी। प्रशासनिक आश्वासनों के बाद आंदोलन को स्थगित कर दिया गया और स्थिति सामान्य होती दिखाई देने लगी।
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तड़के पुलिस कार्रवाई के बाद बढ़ा विवाद
हालांकि, रविवार तड़के करीब तीन से चार बजे के बीच पुलिस ने रियां क्षेत्र के कई गांवों में एक साथ छापेमारी अभियान चलाया। पुलिस टीमों ने दर्जनों घरों पर दबिश दी और दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया। इसी कार्रवाई के बाद मामला एक बार फिर गरमा गया। पुलिस कार्रवाई की सूचना मिलते ही आंदोलन से जुड़े लोगों और राजनीतिक दलों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए। देखते ही देखते मामला सोशल मीडिया पर पहुंच गया और राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई।

बेनीवाल ने सरकार पर साधा निशाना
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया के माध्यम से मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए प्रशासन पर वादाखिलाफी का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान जिन बातों पर सहमति बनी थी, पुलिस कार्रवाई उससे विपरीत नजर आ रही है। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि देर रात महिलाओं और बच्चों को परेशान किया गया तथा जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करते हुए उन्हें हिरासत में लिया गया। उन्होंने इसे जनआंदोलन को दबाने का प्रयास बताया।

क्या है हनुमान बेनीवाल का पोस्ट पढ़िए...
नागौर जिले के रियां बड़ी में बजरी माफियाओं के खिलाफ राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जन-सहयोग से बड़ा आंदोलन किया,प्रशासन ने माफियाओं के दबाव में कोई समझौता करना उचित नहीं समझा तो उसके बाद जयपुर कूच का ऐलान हुआ और हजारों लोग नागौर से अजमेर के मध्य स्थित बाडी घाटी पहुंचे तब सरकार हरकत में आई, मुख्यमंत्री के ACS से दूरभाष पर वार्ता हुई और सीएमओ के निर्देशों पर जिला कलक्टर,जिला पुलिस अधीक्षक,खनन विभाग सहित अन्य विभागों के आला अधिकारी समझौता करने मौके पर पहुंचे। विस्तार से बातचीत के बाद बजरी माफियाओं के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने, माफियाओं के खिलाफ आंदोलित लोगों पर दर्ज मुकदमों में कोई कार्रवाई नहीं करने, गलत रूप से आवंटित लीजों को निरस्त करने सहित कई मुद्दों पर सहमति बनी। मगर आपकी पुलिस ने आज अलसुबह 3-4 बजे रियां क्षेत्र में दर्जनों घरों में महिलाओं और बच्चों को नींद में परेशान किया और जिस तरह हार्डकोर अपराधियों को पकड़ने के लिए छापे मारे जाते हैं, उसी तर्ज पर छापेमारी कर बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन करने वाले दो दर्जन से अधिक लोगों और जन-प्रतिनिधियों को गिरफ्तार किया गया। मैं पुलिस की इस कार्रवाई की कड़ी निंदा करता हूं।
मैं राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से पूछना चाहता हूं कि क्या आपकी सरकार में आंदोलन के समय जनता से किए गए वादे और हुए समझौते केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं ? सरकार के निर्देशों के बाद अधिकारियों द्वारा किए गए वादों से मुकरना जनता के विश्वास के साथ छल है। मुख्यमंत्री जी को याद रखना चाहिए कि आंदोलनकारियों ने भरोसा करके समझौता स्वीकार किया था, बहाने सुनने के लिए नहीं।
चूंकि गृह और खनन विभाग का जिम्मा मुख्यमंत्री के पास है, ऐसे में यदि पुलिस, खनन विभाग और सत्ता में बैठे कई नेता मिलकर अवैध बजरी के कारोबार को बढ़ाने में व्यस्त हैं, तो मुख्यमंत्री ऐसे लोगों के फोन सर्विलांस पर कब लेंगे ? 
क्या सरकार का लक्ष्य सिर्फ आंदोलन करने वाले लोगों के इरादों को कुचलने का है ? मैं मुख्यमंत्री जी को स्मरण दिलाना चाहता हूं कि वादा निभाना नेतृत्व की पहचान होती है और वादा तोड़ना राजनीतिक मजबूरी नहीं, बल्कि राजनीतिक चरित्र का परिचय होता है। आंदोलन के दौरान जिन मांगों पर सहमति दी गई, आज उन्हीं से मुंह मोड़ा जा रहा है।
अगर समझौते लागू करने का इरादा नहीं था, तो जनता को झूठे आश्वासन क्यों दिए गए? जनता की याददाश्त कमजोर नहीं है और वादाखिलाफी का जवाब लोकतंत्र में जनता ही देती है।
आज नागौर पुलिस ने बजरी माफियाओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे जिन निर्दोष लोगों को हिरासत में लिया है, उन्हें तत्काल रिहा करें। अन्यथा हम ऐसी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। हम पूरी मजबूती से सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ बड़ा आंदोलन करेंगे।

 

नागौर पुलिस ने दिया जवाब
वहीं, पुलिस ने सांसद के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए स्पष्ट किया कि नागौर पुलिस ने कभी भी, किसी को भी मुकदमे में कार्रवाई नहीं करने का आश्वासन नहीं दिया था। क़ानूनी तौर पर ऐसा आश्वासन कोई भी पुलिस अधिकारी नहीं दे सकता।

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क्या है पूरा मामला?
  • रियां बड़ी क्षेत्र में अवैध बजरी खनन के खिलाफ आंदोलन शुरू हुआ
  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) ने जयपुर कूच का ऐलान किया
  • आंदोलन के बाद प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच वार्ता हुई
  • बजरी माफियाओं पर कार्रवाई और अन्य मांगों पर सहमति बनी
  • समझौते के बाद रविवार तड़के पुलिस ने कई गांवों में छापेमारी की
  • दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया
  • इसके बाद सांसद हनुमान बेनीवाल और नागौर पुलिस के बीच सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई

अब आगे क्या?
पूरा मामला अब राजनीतिक रंग पकड़ चुका है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी इसे जनता और आंदोलनकारियों के साथ विश्वासघात बता रही है, जबकि पुलिस कानून सम्मत कार्रवाई का दावा कर रही है। अब सभी की निगाहें राज्य सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि हिरासत में लिए गए लोगों को राहत मिलती है या आंदोलन एक बार फिर सड़कों पर लौटता है।

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राजस्थान में अवैध बजरी खनन लंबे समय से प्रशासन, खनन माफियाओं और स्थानीय लोगों के बीच विवाद का विषय रहा है। नागौर का यह प्रकरण अब केवल अवैध खनन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह राजनीतिक आश्वासनों, प्रशासनिक कार्रवाई और जनआंदोलन के टकराव का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।
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