राजस्थान के नागौर जिले के जायल क्षेत्र के दुगोली गांव से बच्चों का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में गांव के मासूम बच्चे सड़क पर फैले कीचड़ की समस्या को लेकर राजस्थान सरकार की पीडब्ल्यूडी मंत्री मंजू बाघमार से भावुक अपील करते नजर आ रहे हैं। बच्चों की स्थानीय बोली में कही गई बातें लोगों का ध्यान आकर्षित कर रही हैं और ग्रामीण इलाकों की बुनियादी समस्याओं को उजागर कर रही हैं।
‘मंत्री जी राम-राम, ओ कादो हटवा द्यो’
वायरल वीडियो में बच्चे हाथ जोड़कर कहते दिखाई दे रहे हैं, ""मंत्री जी राम-राम... म्हैं थारे हाथ जोड़ूं... थे यो कादो हटवा द्यो... म्हैं तो ई कादा सूं परेशान हो ग्यो हूं।" बच्चों का कहना है कि गांव के मंदिर, स्कूल और अस्पताल जाने वाले रास्ते पर चारों तरफ कीचड़ फैला हुआ है, जिससे रोजाना आने-जाने में भारी परेशानी हो रही है।
कीचड़ में गिरने और बीमारियों का खतरा
बच्चों ने बताया कि वे कई बार रास्ते में कीचड़ में गिर चुके हैं। सड़क पर फैली गंदगी और बदबू के कारण बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि इस समस्या से गांव के सभी लोग परेशान हैं।
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विकास के दावों के बीच सामने आई हकीकत
गौरतलब है कि हाल ही में क्षेत्र में ग्रामीण सेवा शिविर का आयोजन किया गया था, जहां विकास कार्यों और जनसमस्याओं के समाधान के बड़े दावे किए गए थे। लेकिन शिविर के बाद भी सड़क और कीचड़ की समस्या जस की तस बनी हुई है। इसी वजह से बच्चों ने अनोखे अंदाज में अपनी नाराजगी और परेशानी को सार्वजनिक किया।
‘समस्या नहीं सुलझी तो वोट नहीं मिलेंगे’
वीडियो में बच्चे यह भी कहते सुनाई दे रहे हैं कि यदि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो गांव में वोट नहीं मिलेंगे। बच्चों की यह बात सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
ग्रामीणों ने भी बताई परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में लंबे समय से सड़क पर जलभराव और कीचड़ की समस्या बनी हुई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं किया गया है। ग्रामीणों के अनुसार बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, मरीजों और आम लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
सोशल मीडिया पर वीडियो बना चर्चा का विषय
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस वीडियो को लोग ग्रामीण समस्याओं की सच्ची तस्वीर बता रहे हैं। बच्चों की मासूम अपील ने विकास के दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि बच्चों की इस गुहार पर प्रशासन और जनप्रतिनिधि कितनी जल्दी कार्रवाई करते हैं और गांव की इस समस्या का समाधान कब तक होता है।