Ghaziabad: जेल से रिहा होकर गायब हुआ गिरधर, परिजनों ने कर दिया था अंतिम संस्कार, जिंदा घर लौटने पर उड़े होश
17 मई को मारपीट के मामले में कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर सिंह बिष्ट को जेल भेजा था। 21 मई को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से रिहाई का परवाना भेजा गया और गिरधर जेल से रिहा हो गए लेकिन घर नहीं लौटे
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गाजियाबाद के मसूरी की नाहल झाल में 12 जून को मृत मिले वैशाली सेक्टर-पांच निवासी गिरधर बिष्ट 25 जून को जिंदा घर वापस लौट आए। उन्हें देखते ही सब हैरान रह गए। गिरधर से जब परिवार वालों ने 13 दिन गायब रहने के बारे में पूछा तब उन्होंने बस यह कहा कि जेल से निकलने के बाद मैं चला गया था और अब वापस आ गया हूं। इसके बाद से पूरे इलाके में हलचल मची हुई है। वहीं दूसरी तरफ इस मामले में तमाम सवाल भी खड़े हो गए हैं।
17 मई को मारपीट के मामले में कौशांबी पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर गिरधर सिंह बिष्ट को जेल भेजा था। 21 मई को एसीपी शालीमार गार्डन की कोर्ट से रिहाई का परवाना भेजा गया और गिरधर जेल से रिहा हो गए लेकिन घर नहीं लौटे। परिवार वालों ने मसूरी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई थी। 12 जून को मसूरी की नाहल झाल में एक अज्ञात शव पुलिस को मिला। शिनाख्त के लिए गिरधर की मां देवकी देवी और बहन आशा को बुलाया गया। दोनों ने शरीर की चोट और एक जैसे दिखने वाले कपड़ों से पहचान की।
इसके बाद शव उन्हें सौंप दिया गया। परिवार वालों ने हत्या का आरोप लगाते हुए सात लोगों पर प्राथमिकी दर्ज कराई और डॉक्टर के पैनल से दोबारा पोस्टमार्टम भी कराया। थाने पर हंगामा भी काटा और कड़ी कार्रवाई की मांग रखी। इसके बाद परिवार वालों ने शव का दाहसंस्कार भी करा दिया। अब जब गिरधर वापस लौटे हैं तो सवालों की एक लंबी फेहरिस्त सामने है।
यह उठ रहे सवाल
1- जिस शव को गिरधर का बताया वह असल में किसका था
2- परिजनों ने किस आधार पर शव की शिनाख्त की थी
3- हत्या के दर्ज मामले में पुलिस अब आगे क्या करेगी
4- भविष्य में अगर मृत व्यक्ति के परिजन आते हैं तो पुलिस क्या करेगी
5- क्या दोबारा से पुलिस अज्ञात शव की शिनाख्त के प्रयास शुरू करेगी
गिरधर के वापस लौटने की सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। युवक बिल्कुल ठीक और स्वस्थ्य है। अभी अधिक बातचीत नहीं की गई है। फिलहाल युवक ने जेल से निकलने के बाद अपने मन से जाने की बात कही है। कुछ समय बाद काउंसलिंग के जरिए युवक से बातचीत की जाएगी। अभिषेक श्रीवास्तव, एसीपी इंदिरापुरम
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