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Ghaziabad News: कॉन्ट्रैक्टर्स के तकनीकी स्टाफ और उपकरणों की होगी जांच
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गाजियाबाद। आखिरकार जिम्मेदारों की नींद टूटी है। बिजली कनेक्शन के लिए घर बैठे वायरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स टेस्ट रिपोर्ट लगाने वाले कॉन्ट्रैक्टर्स पर अब विद्युत सुरक्षा विभाग शिकंजा कसने की तैयारी में है। विभाग कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां कार्यरत तकनीकी स्टाफ और उनके उपकरणों की जांच करेगा। इसमें यह देखा जाएगा कि कॉन्ट्रैक्टर्स ने जिन कर्मचारियों को अपने यहां कार्यरत दिखाया है, वे वास्तव में तैनात हैं या नहीं और आवश्यक उपकरण उपलब्ध हैं या नहीं।
पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के किसी भी श्रेणी के बिजली कनेक्शन के लिए उपभोक्ता को वायरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स टेस्ट रिपोर्ट लगवानी होती है। इसके लिए ए-क्लास कॉन्ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है। विद्युत सुरक्षा विभाग ने जिले में ऐसे करीब 250 लाइसेंस जारी किए हैं।
नियमों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर के यहां कार्यरत तीन कर्मचारियों में से किसी एक तकनीकी कर्मचारी को भवन की आंतरिक वायरिंग, विद्युत उपकरण और उनकी क्षमता का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। हालांकि, धरातल पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना मौके पर निरीक्षण किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं।
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पड़ताल करने पर यह भी पता चला कि कई कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां तकनीकी स्टाफ ही नहीं है। इतना ही नहीं, कई के पास विद्युत सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद संवाद न्यूज एजेंसी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला में संवाद न्यूज एजेंसी की घर बैठे वायरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स टेस्ट रिपोर्ट लगाए जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद विभाग सक्रिय हुआ है।
विद्युत सुरक्षा विभाग के उपनिदेशक सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि लाइसेंस जारी करते समय उपकरण और स्टाफ की जांच की जाती है। अब कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां स्टाफ और उपकरण नहीं होने की जानकारी सामने आई है। अगर बिना तकनीकी निरीक्षण के रिपोर्ट लगाई जा रही है तो इसकी जांच की जाएगी। किसी स्तर पर खामी पाई जाती है तो इसकी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए शासन को भेजी जाएगी।
पांच किलोवाट से अधिक क्षमता के किसी भी श्रेणी के बिजली कनेक्शन के लिए उपभोक्ता को वायरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स टेस्ट रिपोर्ट लगवानी होती है। इसके लिए ए-क्लास कॉन्ट्रैक्टर की जरूरत पड़ती है। विद्युत सुरक्षा विभाग ने जिले में ऐसे करीब 250 लाइसेंस जारी किए हैं।
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नियमों के अनुसार, कॉन्ट्रैक्टर के यहां कार्यरत तीन कर्मचारियों में से किसी एक तकनीकी कर्मचारी को भवन की आंतरिक वायरिंग, विद्युत उपकरण और उनकी क्षमता का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार करनी होती है। हालांकि, धरातल पर इन नियमों का पालन नहीं हो रहा है। बिना मौके पर निरीक्षण किए ही रिपोर्ट जारी की जा रही हैं।
पड़ताल करने पर यह भी पता चला कि कई कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां तकनीकी स्टाफ ही नहीं है। इतना ही नहीं, कई के पास विद्युत सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपकरण तक उपलब्ध नहीं हैं। लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद संवाद न्यूज एजेंसी ने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। अमर उजाला में संवाद न्यूज एजेंसी की घर बैठे वायरिंग कॉन्ट्रैक्टर्स टेस्ट रिपोर्ट लगाए जाने की खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद विभाग सक्रिय हुआ है।
विद्युत सुरक्षा विभाग के उपनिदेशक सौरभ कुमार सिंह ने बताया कि लाइसेंस जारी करते समय उपकरण और स्टाफ की जांच की जाती है। अब कुछ कॉन्ट्रैक्टर्स के यहां स्टाफ और उपकरण नहीं होने की जानकारी सामने आई है। अगर बिना तकनीकी निरीक्षण के रिपोर्ट लगाई जा रही है तो इसकी जांच की जाएगी। किसी स्तर पर खामी पाई जाती है तो इसकी रिपोर्ट बनाकर कार्रवाई के लिए शासन को भेजी जाएगी।