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Rajasthan News: राजस्थान के जर्जर स्कूलों पर हाईकोर्ट सख्त, 87,000 कमरों के सुधार का रोडमैप पेश
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
Published by: Tarunendra Kumar Chaturvedi
Updated Thu, 19 Mar 2026 09:45 PM IST
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सार
राजस्थान हाईकोर्ट में जर्जर स्कूलों को लेकर सुनवाई के दौरान सरकार ने 87,000 कमरों के सुधार और पुनर्निर्माण का रोडमैप पेश किया। कोर्ट ने जिम्मेदारी तय करने, ब्लॉक स्तर पर मॉनिटरिंग कमेटी बनाने और हादसों पर कानूनी कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
राजस्थान हाईकोर्ट। फाइल फोटो-
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
स्कूलों की जर्जर व्यवस्था को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट में गुरुवार को फिर सुनवाई के दौरान सरकार के द्वारा मुख्य सचिव ने 700 पन्नों का एफिडेविट प्रस्तुत किया, जिसमें राजस्थान के जर्जर 87000 कमरों को ठीक करना, मरम्मत करना एवं पुनर्निर्माण का रोडमैप रखा गया। इस कार्य में 12 हजार 500 करोड़ रुपये की जरूरत होगी। बीस हजार करोड़ रुपये में से बची हुई राशि के लिए हम दिल्ली केंद्र की सरकार के साथ जल्द ही मीटिंग करने वाले हैं। वो पैसा हम केंद्र से मांगेंगे।
कोर्ट ने सात सौ पन्नों का एपिडेबिट पढ़ने के लिए समय लेते हुए अगली तारीख 28 मार्च 2026 की तय की है। साथ साथ कोर्ट ने हर ब्लॉक लेवल तक एक कमेटी बनाने की बात भी कही है, जो कमेटी निरंतर रूप से मॉनिटरिंग करेगी कि स्कूलों की स्थिति क्या है और किस तरीके से चल रहे हैं?
कोर्ट ने ये पूछा?
इस मामले में कोर्ट ने अधिवक्ताओं को अपने सजेशन देने के लिए कहा है। कोर्ट ने ये कहा है कि अधिवक्ता बताएं कमेटी में कौन-कौन होना चाहिए? क्योंकि अगर सरकारी अधिकारियों को इस कमेटी में रखा गया तो सिर्फ खानापूर्ति ही होगी।
ये भी पढ़ें- जल बंटवारे पर तकरार: पंजाब की जल-रॉयल्टी मांग पर राजस्थान सरकार सख्त, जानें क्यों ठुकराई करोड़ों की डिमांड?
जिम्मेदार सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके नहीं बच सकता- कोर्ट
कोर्ट ने ये भी माना की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने बाड़मेर में सरकारी स्कूल में पंखा गिरने से घायल हुए बच्चे के विषय में भी चर्चा करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय करने का समय आ गया। जिम्मेदार सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके नहीं बच सकता है, अब वह समय आ गया।
जब हमें जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्रिमिनल मामला बनाना होगा। कोर्ट ने आज तक जितने भी स्कूलों के भवन जर्जर हैं और उनमें हादसों के दौरान जो बच्चों की जान गई है, उस पर भी संज्ञान लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि सरकार बताए जिम्मेदारों के खिलाफ क्या-क्या कानूनी कार्रवाई की जा रही है?
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कोर्ट ने सात सौ पन्नों का एपिडेबिट पढ़ने के लिए समय लेते हुए अगली तारीख 28 मार्च 2026 की तय की है। साथ साथ कोर्ट ने हर ब्लॉक लेवल तक एक कमेटी बनाने की बात भी कही है, जो कमेटी निरंतर रूप से मॉनिटरिंग करेगी कि स्कूलों की स्थिति क्या है और किस तरीके से चल रहे हैं?
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कोर्ट ने ये पूछा?
इस मामले में कोर्ट ने अधिवक्ताओं को अपने सजेशन देने के लिए कहा है। कोर्ट ने ये कहा है कि अधिवक्ता बताएं कमेटी में कौन-कौन होना चाहिए? क्योंकि अगर सरकारी अधिकारियों को इस कमेटी में रखा गया तो सिर्फ खानापूर्ति ही होगी।
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जिम्मेदार सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके नहीं बच सकता- कोर्ट
कोर्ट ने ये भी माना की जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है। कोर्ट ने बाड़मेर में सरकारी स्कूल में पंखा गिरने से घायल हुए बच्चे के विषय में भी चर्चा करते हुए कहा कि जिम्मेदारी तय करने का समय आ गया। जिम्मेदार सिर्फ कागजी खानापूर्ति करके नहीं बच सकता है, अब वह समय आ गया।
जब हमें जिम्मेदारी तय करनी होगी। क्रिमिनल मामला बनाना होगा। कोर्ट ने आज तक जितने भी स्कूलों के भवन जर्जर हैं और उनमें हादसों के दौरान जो बच्चों की जान गई है, उस पर भी संज्ञान लिया है। कोर्ट ने पूछा है कि सरकार बताए जिम्मेदारों के खिलाफ क्या-क्या कानूनी कार्रवाई की जा रही है?