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Rajasthan: नदियों को प्रदूषण से बचाने के लिए सरकार का बड़ा फैसला, गंदा पानी छोड़ने को लेकर बनेगी कार्ययोजना

Tue, 28 Jul 2026 12:53 PM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जयपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Tue, 28 Jul 2026 12:53 PM IST
सार

जोजरी नदी समेत अन्य जल स्रोतों में औद्योगिक प्रदूषण रोकने के लिए राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव ने उद्योगों, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों को प्रभावी समाधान तैयार कर प्रदूषित अपशिष्ट जल के निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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Rajasthan News: Government Cracks Down on River Pollution, Action Plan for Industrial Wastewater Soon
राजस्थान सचिवालय - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नदियों में जाने से रोकने के लिए राजस्थान सरकार ने ठोस कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने सोमवार को सचिवालय में आयोजित बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों, औद्योगिक संगठनों और जोधपुर, पाली, बालोतरा व जसोल के जिला प्रशासन से व्यावहारिक और प्रभावी प्रस्ताव प्रस्तुत करने को कहा।
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मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि राज्य सरकार उद्योगों के सुचारु संचालन के पक्ष में है लेकिन पर्यावरण संरक्षण और जनहित से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना ट्रीटमेंट किए गए या प्रदूषित औद्योगिक अपशिष्ट जल को किसी भी स्थिति में नदियों में नहीं छोड़ा जाए।
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उन्होंने उद्योगों, जिला प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित कर स्थायी समाधान विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) का बेहतर उपयोग और नियमित रखरखाव सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि प्रदूषित पानी का रिसाव न हो।

बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव (खान) एवं राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की अध्यक्ष अपर्णा अरोड़ा ने कहा कि जोजरी नदी सहित अन्य नदियों में प्रदूषित पानी छोड़े जाने के मामले को सुप्रीम कोर्ट गंभीरता से देख रहा है। उन्होंने कहा कि रासायनिक अपशिष्टों को ट्रीटमेंट प्लांट के बजाय सीधे नदियों में छोड़े जाने से प्रदूषण बढ़ रहा है और भविष्य में उद्योगों के बंद होने जैसी स्थिति भी पैदा हो सकती है। उन्होंने उद्योगों से वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से अपशिष्ट जल का उपचार करने और प्रभावी समाधान विकसित करने के लिए आईआईटी जैसे तकनीकी संस्थानों की विशेषज्ञता लेने का सुझाव दिया। बैठक के दौरान राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव कपिल चंद्रावल ने क्षेत्र में प्रदूषण की मौजूदा स्थिति और उसे नियंत्रित करने के लिए किए जाने वाले आवश्यक उपायों पर प्रेजेंटेशन भी दिया।
 
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