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मकराना में तबाही: मूसलाधार बारिश में धंसीं 6 खदानें, देखते-देखते गड्ढे में समाई सड़क, 10 गांवों का संपर्क कटा
Fri, 24 Jul 2026 01:56 PM IST
नागौर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नागौर
Published by: नागौर ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 01:56 PM IST
सार
कालानाडा खनन क्षेत्र में मूसलाधार बारिश के बीच करीब छह खदानें धंस गईं। हादसे में मुख्य सड़क भी खदान में समा गई, जिससे करीब 10 गांवों का संपर्क टूट गया। ग्रामीणों ने घटना के लिए यहां हो रहे अवैध खनन को जिम्मेदार ठहराया है।
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मकराना में 6 खदानें धंसीं
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
जिले के मकराना स्थित अरावली पॉलीगॉन क्षेत्र का कालानाडा खनन इलाका गुरुवार तड़के दहल उठा। मूसलाधार बारिश और लंबे समय से जारी अनियंत्रित अवैध खनन ने यहां विनाश का ऐसा दृश्य रचा कि एक के बाद एक करीब 6 खदानें ताश के पत्तों की तरह ढह गईं। हादसा इतना भयानक था कि जाखली जाने वाला मुख्य कालानाडा-कटाणी मार्ग पूरी तरह ध्वस्त होकर सैकड़ों फीट गहरे खदान के गड्ढों में समा गया।
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गनीमत यह रही कि उस समय खदानों में काम बंद था और सड़क पर कोई आवाजाही नहीं थी, जिससे एक बड़ा दर्दनाक हादसा टल गया। हालांकि इसका खामियाजा अब ग्रामीण आबादी को भुगतना पड़ रहा है, क्योंकि मकराना से करीब 10 गांवों का सीधा संपर्क पूरी तरह कट चुका है।
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शिकायतों पर सोता रहा प्रशासन
हादसे के बाद स्थानीय निवासियों का आक्रोश चरम पर है। ग्रामीणों का कहना है कि पॉलीगॉन की खदानों (संख्या 4 से 10 तक) में पिछले डेढ़ साल से खनन माफिया धड़ल्ले से कानून की धज्जियां उड़ा रहे थे। माफियाओं ने अधिक लाभ कमाने के चक्कर में सड़क और कृषि भूमि तक को नीचे से खोखला कर दिया था। पूर्व में उपखंड अधिकारी ने खनिज अभियंता को नोटिस जारी कर कड़े सुरक्षा प्रबंध करने के निर्देश दिए थे लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और अनदेखी का नतीजा आज पूरे रास्ते का वजूद के खत्म होने के रूप में सामने आया है।
जिम्मेदारी पर लीपापोती शुरू
हादसे के बाद वृत्ताधिकारी विक्की नागपाल और थाना प्रभारी पंकज विश्नोई ने पुलिस जाब्ते के साथ मौके पर पहुंचकर क्षेत्र को सील कर दिया है। वहीं दूसरी ओर अब प्रशासन तंत्र में जिम्मेदारी लेने के बजाय आरोप-प्रत्यारोप का खेल शुरू हो चुका है। खनिज विभाग के अभियंता ललित मंगल का कहना है कि नगर परिषद की सीवरेज पाइप लाइन में लीकेज और बारिश से हुए कटाव के कारण जमीन धंसी है।
इधर पंचायत समिति प्रधान सुमिता खींचड़ ने सीधा आरोप लगाते हुए कहा कि खनिज विभाग की मिलीभगत से अवैध खनन फल-फूल रहा था। मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन अब जांच की बात कह रहा है, लेकिन सवाल वही है कि आम जनता आखिर कब तक माफिया की भूख का नुकसान भुगतेगी?