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Rajasthan: सलाखों के बीच पनपा प्यार, अब बनेंगे जीवनसाथी, ओपन जेल में 22 जुलाई को होगी दो उम्रकैदियों की शादी

Thu, 16 Jul 2026 11:51 AM IST
प्रिया वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: प्रिया वर्मा Updated Thu, 16 Jul 2026 11:51 AM IST
सार

उम्रकैद की सजा काट रहे दो बंदी 22 जुलाई को मंडोर ओपन जेल परिसर में सात फेरे लेंगे। राजस्थान हाईकोर्ट की अनुमति के बाद होने वाला यह विवाह राज्य की न्यायिक और जेल प्रशासन व्यवस्था में अपनी तरह का पहला मामला माना जा रहा है।

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Rajasthan News: Love Blossomed Behind Bars, Life Convicts to Marry in Open Jail for the First Time
ओपन जेल में 22 जुलाई को होगी उम्रकैद के दो बंदियों की शादी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राजस्थान के न्यायिक और जेल प्रशासन के इतिहास में पहली बार किसी ओपन जेल परिसर के भीतर दो उम्रकैद की सजा काट रहे बंदियों का विवाह होने जा रहा है। राजस्थान हाईकोर्ट ने जोधपुर के मंडोर ओपन जेल में रह रहे मूलाराम भाटी और सीमा को 22 जुलाई को विवाह करने की अनुमति दे दी है। यह शादी जेल प्रशासन की निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के बीच ओपन जेल परिसर में ही संपन्न होगी।

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न्यायमूर्ति डॉ. पुष्पेन्द्र सिंह भाटी और न्यायमूर्ति प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने यह ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए कहा कि जेल व्यवस्था का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि उनके सुधार और पुनर्वास के अवसर उपलब्ध कराना भी है।
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मूलाराम (33) नागौर जिले के अडसिंगा गांव का निवासी है, जबकि सीमा (31) मूल रूप से मुंबई की रहने वाली है। दोनों उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। मूलाराम को करीब दो वर्ष पहले अजमेर जेल से मंडोर ओपन जेल भेजा गया था, जबकि सीमा करीब डेढ़ वर्ष पहले महिला जेल से यहां स्थानांतरित हुई थी। ओपन जेल के नियमों के तहत दोनों खेती का कार्य करते थे। इसी दौरान दोनों के बीच परिचय हुआ, जो समय के साथ दोस्ती और फिर प्रेम संबंध में बदल गया। हाल ही में सीमा को 40 दिन की पैरोल मिलने के बाद दोनों ने विवाह करने का निर्णय लिया और हाईकोर्ट से अनुमति मांगी।
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इस शादी का एक भावनात्मक पहलू भी सामने आया है। सीमा के परिवार की ओर से कोई सदस्य शादी में मौजूद नहीं होगा, इसलिए उसकी सहेली के पिता सीमा का कन्यादान करेंगे। विवाह के निमंत्रण पत्र में भी पिता के स्थान पर उनका ही नाम दर्ज किया गया है। सुनवाई के दौरान मूलाराम की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कालूराम भाटी और अधिवक्ता स्वप्न चौहान ने पक्ष रखा, जबकि राज्य सरकार की ओर से लोक अभियोजक सी.एस. ओझा और श्रवण सिंह राठौड़ उपस्थित रहे। राज्य सरकार ने विवाह पर कोई आपत्ति नहीं जताई है।


अपने आदेश में हाईकोर्ट ने वर्ष 2022 के 'नंदलाल बनाम राज्य' मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक जेल प्रणाली का उद्देश्य कैदियों को समाज से अलग-थलग करना नहीं, बल्कि उनके पुनर्वास और सम्मानजनक जीवन की ओर लौटने का अवसर देना है। अदालत ने माना कि किसी भी व्यक्ति के संवैधानिक अधिकार और मानवीय गरिमा जेल के भीतर समाप्त नहीं हो जाते। मूलाराम वर्ष 2017 से न्यायिक अभिरक्षा में है। अदालत के इस फैसले को राजस्थान की जेल व्यवस्था में सुधारात्मक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। साथ ही यह निर्णय भविष्य में कैदियों के वैवाहिक और अन्य संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मामलों में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मिसाल बन सकता है।

गौरतलब है कि मूलाराम को पड़ोसी की हत्या और सीमा को अपने पति की हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई थी। बावजूद इसके हाईकोर्ट ने माना कि सजा का अर्थ व्यक्ति के सभी संवैधानिक अधिकारों का अंत नहीं है और उसमें सुधार की संभावना न्याय व्यवस्था का अहम हिस्सा है।

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