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रणथंभौर में सफारी कैंटर पेड़ से टकराया: दिल्ली के एक परिवार के 21 लोग घायल; सुरक्षा पर उठे सवाल
Sun, 16 Aug 2026 07:21 PM IST
प्रतीक पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
Published by: प्रतीक पांडेय
Updated Sun, 16 Aug 2026 07:21 PM IST
सार
Rajasthan News: रणथंभौर टाइगर रिजर्व के जोन नंबर 9 में शनिवार सुबह पर्यटकों से भरा कैंटर अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। हादसे में दिल्ली से आए एक ही परिवार के 21 लोग घायल हो गए।
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छतिग्रस्त जीप
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में शनिवार सुबह जंगल सफारी के दौरान बड़ा हादसा हो गया। जोन नंबर 9 में पर्यटकों से भरा कैंटर अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गया। हादसे में दिल्ली से आए एक ही परिवार के 21 लोग घायल हो गए। घायलों में महिलाएं और पांच साल से कम उम्र के तीन बच्चे भी शामिल बताए गए हैं। हादसे के बाद करीब एक घंटे तक घायल जंगल में मदद का इंतजार करते रहे। घटना को लेकर पीड़ित परिवार ने वन विभाग की सुरक्षा और रेस्क्यू व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
तेज टक्कर से मचा हड़कंप, जंगल में फंसे घायल पर्यटक
पीड़ितों के अनुसार, एडवोकेट सचिन जैन और पंकज जैन के परिवार के सदस्य सुबह की सफारी के लिए कैंटर नंबर RJ 25 PA 4517 से रणथंभौर के जोन नंबर 9 में गए थे। सफारी के दौरान कैंटर अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन में बैठे कई लोगों को चोटें आईं। हादसे के बाद महिलाएं और छोटे बच्चे भी घायल हालत में जंगल के बीच फंस गए।
करीब एक घंटे तक मदद का किया इंतजार
पीड़ित परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद कैंटर के बाईं तरफ के दोनों पहिए मिट्टी में धंस गए थे। वाहन को निकालने के लिए मौके पर पर्याप्त संसाधन नहीं थे। घायलों के लिए कैंटर में फर्स्ट एड किट या जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। चालक और नेचर गाइड के पास वन अधिकारियों से तत्काल संपर्क करने के लिए कोई स्पष्ट इमरजेंसी नंबर भी नहीं था।
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परिवार के मुताबिक, चालक ने 2-3 लोगों को फोन किया, लेकिन तत्काल मदद नहीं पहुंची। करीब एक घंटे बाद एक अन्य कैंटर मौके पर पहुंचा, लेकिन उसमें भी प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं मिली।
दूसरी जिप्सी पहुंची, लेकिन फर्स्ट एड किट नहीं होने की बात कही
पीड़ितों के अनुसार, इस दौरान RJ 25 UA 1927 नंबर की एक जिप्सी भी वहां पहुंची। घायल पर्यटकों ने जिप्सी सवारों से मदद मांगी, लेकिन उन्हें बताया गया कि जिप्सी में फर्स्ट एड किट नहीं है। इसके बाद जिप्सी वहां से चली गई। परिवार ने इस व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। बाद में घायलों को वेटिंग कैंटर RJ 25 PA 2197 और जिप्सी की मदद से नाका राजबाग लाया गया।
चालक-गाइड के दस्तावेजों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि सफारी के लिए प्रवेश के समय पर्यटकों के पहचान पत्र तो जांचे गए, लेकिन कैंटर चालक दिलखुश गुर्जर (टोकन नंबर 489) और नेचर गाइड भरत कंडेरा (टोकन नंबर B-56) के दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। परिवार का दावा है कि हादसे के बाद जांच करने पर चालक और नेचर गाइड के लाइसेंस या दस्तावेज एक्सपायर पाए गए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गेट नंबर 9 पर तैनात वनकर्मी की भूमिका पर भी सवाल
परिवार ने गेट नंबर 9 पर तैनात वनकर्मी निरंजन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि प्रवेश के दौरान उन्होंने पर्यटकों के दस्तावेज देखे, लेकिन चालक और गाइड के दस्तावेजों की जांच नहीं की।
वाहन मालिक पर भी लगाए गंभीर आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, नाका राजबाग पर वनकर्मी निरंजन सिंह, धारासिंह (RHS-490) और अशोक की मौजूदगी में कैंटर मालिक रामजीलाल गुर्जर वहां पहुंचा। परिवार का आरोप है कि घायलों की स्थिति देखने के बाद वाहन मालिक मौके से चला गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि मौजूद अधिकारियों की ओर से उसके खिलाफ तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और रणथंभौर में पर्यटकों की सुरक्षा एवं आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।
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तेज टक्कर से मचा हड़कंप, जंगल में फंसे घायल पर्यटक
पीड़ितों के अनुसार, एडवोकेट सचिन जैन और पंकज जैन के परिवार के सदस्य सुबह की सफारी के लिए कैंटर नंबर RJ 25 PA 4517 से रणथंभौर के जोन नंबर 9 में गए थे। सफारी के दौरान कैंटर अनियंत्रित होकर पेड़ से जा टकराया। टक्कर इतनी तेज थी कि वाहन में बैठे कई लोगों को चोटें आईं। हादसे के बाद महिलाएं और छोटे बच्चे भी घायल हालत में जंगल के बीच फंस गए।
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करीब एक घंटे तक मदद का किया इंतजार
पीड़ित परिवार का आरोप है कि हादसे के बाद कैंटर के बाईं तरफ के दोनों पहिए मिट्टी में धंस गए थे। वाहन को निकालने के लिए मौके पर पर्याप्त संसाधन नहीं थे। घायलों के लिए कैंटर में फर्स्ट एड किट या जरूरी दवाएं तक उपलब्ध नहीं थीं। चालक और नेचर गाइड के पास वन अधिकारियों से तत्काल संपर्क करने के लिए कोई स्पष्ट इमरजेंसी नंबर भी नहीं था।
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परिवार के मुताबिक, चालक ने 2-3 लोगों को फोन किया, लेकिन तत्काल मदद नहीं पहुंची। करीब एक घंटे बाद एक अन्य कैंटर मौके पर पहुंचा, लेकिन उसमें भी प्राथमिक उपचार की व्यवस्था नहीं मिली।
दूसरी जिप्सी पहुंची, लेकिन फर्स्ट एड किट नहीं होने की बात कही
पीड़ितों के अनुसार, इस दौरान RJ 25 UA 1927 नंबर की एक जिप्सी भी वहां पहुंची। घायल पर्यटकों ने जिप्सी सवारों से मदद मांगी, लेकिन उन्हें बताया गया कि जिप्सी में फर्स्ट एड किट नहीं है। इसके बाद जिप्सी वहां से चली गई। परिवार ने इस व्यवहार को लेकर भी नाराजगी जताई है। बाद में घायलों को वेटिंग कैंटर RJ 25 PA 2197 और जिप्सी की मदद से नाका राजबाग लाया गया।
चालक-गाइड के दस्तावेजों पर गंभीर आरोप, जांच की मांग
पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया है कि सफारी के लिए प्रवेश के समय पर्यटकों के पहचान पत्र तो जांचे गए, लेकिन कैंटर चालक दिलखुश गुर्जर (टोकन नंबर 489) और नेचर गाइड भरत कंडेरा (टोकन नंबर B-56) के दस्तावेजों की पर्याप्त जांच नहीं की गई। परिवार का दावा है कि हादसे के बाद जांच करने पर चालक और नेचर गाइड के लाइसेंस या दस्तावेज एक्सपायर पाए गए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
गेट नंबर 9 पर तैनात वनकर्मी की भूमिका पर भी सवाल
परिवार ने गेट नंबर 9 पर तैनात वनकर्मी निरंजन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि प्रवेश के दौरान उन्होंने पर्यटकों के दस्तावेज देखे, लेकिन चालक और गाइड के दस्तावेजों की जांच नहीं की।
वाहन मालिक पर भी लगाए गंभीर आरोप
पीड़ितों के मुताबिक, नाका राजबाग पर वनकर्मी निरंजन सिंह, धारासिंह (RHS-490) और अशोक की मौजूदगी में कैंटर मालिक रामजीलाल गुर्जर वहां पहुंचा। परिवार का आरोप है कि घायलों की स्थिति देखने के बाद वाहन मालिक मौके से चला गया। पीड़ितों ने आरोप लगाया कि मौजूद अधिकारियों की ओर से उसके खिलाफ तत्काल कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले की जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने और रणथंभौर में पर्यटकों की सुरक्षा एवं आपातकालीन रेस्क्यू व्यवस्था को मजबूत करने की मांग की है।