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Sawai Madhopur News: 'इलाके की जंग' के बाद दो बाघिनें लापता, सर्च अभियान तेज, तलाश में जुटा वन विभाग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर
Published by: सवाई ब्यूरो
Updated Tue, 19 May 2026 05:32 PM IST
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सार
टेरिटरी को लेकर बढ़ रहे संघर्ष के बीच रणथंभौर टाइगर रिजर्व में दो युवा बाघिनों के लापता होने से हड़कंप मच गया है, वन विभाग उनकी तलाश में लगातार सर्च अभियान चला रहा है।
आरबीटी-2504 और आरबीटी-2510 लापता
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
रणथंभौर टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या अब वन विभाग के लिए चिंता का विषय बन गई है। टेरिटरी को लेकर बाघों और बाघिनों के बीच लगातार संघर्ष बढ़ रहा है। ताकतवर बाघों के दबाव में कमजोर बाघ-बाघिनों को अपना इलाका छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसी बीच रणथंभौर से दो बाघिनों के लापता होने का मामला सामने आया है, जिसके बाद वन विभाग ने सर्च अभियान तेज कर दिया है।
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वन विभाग के अनुसार बाघिन टी-124 रिद्धि की बेटी आरबीटी-2504 माही और बाघिन आरबीटी-2510 पिछले कई दिनों से नजर नहीं आ रही हैं। दोनों की तलाश के लिए वन विभाग की टीमें लगातार जंगल में सर्च अभियान चला रही हैं।
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बताया जा रहा है कि युवा बाघिन आरबीटी-2504 माही अपनी मां रिद्धि की टेरिटरी में कब्जा जमाने की कोशिश कर रही थी। इसी को लेकर दोनों के बीच कई बार संघर्ष भी हो चुका है। आरबीटी-2504 का मूवमेंट रणथंभौर के जोन 2, 3 और 4 के लेक एरिया में रहता था लेकिन पिछले करीब एक महीने से वह दिखाई नहीं दी है।
वहीं बाघिन टी-107 सुल्ताना की बेटी आरबीटी-2510 का मूवमेंट झूमर बावड़ी, फतेह कैफे, आमा घाटी और फलोदी क्षेत्र में बना रहता था। यह बाघिन अक्सर बाघ 2407 के साथ नजर आती थी लेकिन अब कई दिनों से उसका भी कोई पता नहीं चल पाया है।
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रणथंभौर के डीएफओ मानस सिंह के निर्देशन में वन विभाग की टीमें दोनों बाघिनों की तलाश में जुटी हुई हैं। विभाग द्वारा जंगल में फोटो ट्रैप कैमरों की संख्या बढ़ाई गई है और लगातार ऑन-फुट पेट्रोलिंग कराई जा रही है। वन विभाग ने पांच विशेष टीमों का गठन कर सर्च ऑपरेशन शुरू किया है।
डीएफओ मानस सिंह ने बताया कि बाघिन आरबीटी-2504 को आखिरी बार 1 और 2 मई को देखा गया था। 3 मई को उसकी अपनी मां टी-124 रिद्धि से टेरिटोरियल फाइट हुई थी, जिसके बाद से वह नजर नहीं आई। उन्होंने कहा कि इससे पहले भी दोनों के बीच कई बार संघर्ष हो चुका है, जिसमें बाघिन घायल भी हुई थी।
वन विभाग का मानना है कि रणथंभौर में बाघों की बढ़ती संख्या के कारण टेरिटरी को लेकर संघर्ष बढ़ना स्वाभाविक प्रक्रिया है। रणथंभौर की क्षमता 45 से 55 बाघों की मानी जाती है, जबकि वर्तमान में यहां 77 से अधिक बाघ, बाघिन और शावक मौजूद हैं। ऐसे में कमजोर बाघों का अपना इलाका छोड़ना वन्यजीव व्यवहार का हिस्सा माना जा रहा है। फिलहाल वन विभाग दोनों लापता बाघिनों की तलाश में जुटा हुआ है और अधिकारियों को उम्मीद है कि जल्द ही उनका पता लगा लिया जाएगा।