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Rajasthan: अट्टा-सट्टा प्रथा पर राजस्थान हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, बोला- बेटियां ‘एक्सचेंज ऑफर’ नहीं हैं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जोधपुर Published by: जोधपुर ब्यूरो Updated Tue, 19 May 2026 01:18 PM IST
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सार

Rajasthan: राजस्थान हाईकोर्ट ने अट्टा-सट्टा प्रथा और बाल विवाह जैसी कुप्रथाओं पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि बेटियों को लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। कोर्ट ने फैमिली कोर्ट का फैसला रद्द कर महिला को तलाक देते हुए कहा कि सामाजिक दबाव में महिलाएं लंबे समय तक अत्याचार सहने को मजबूर रहती हैं।

Daughters not commodities for sale Rajasthan High Court stand on atta-satta pronounces verdict in woman favour
राजस्थान हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान हाईकोर्ट ने अट्टा-सट्टा प्रथा और बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथाओं पर सख्त टिप्पणी करते हुए महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि बेटियों को पारिवारिक समझौते या लेन-देन का माध्यम नहीं बनाया जा सकता और ऐसी प्रथाएं संविधान, महिला गरिमा तथा बाल अधिकारों के खिलाफ हैं। जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की खंडपीठ में पत्नी की ओर से फैमिली कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की गई थी। फैमिली कोर्ट ने पहले उसकी तलाक याचिका खारिज कर दी थी और माना था कि पत्नी ने पारिवारिक विवाद के कारण स्वेच्छा से ससुराल छोड़ा था।



दहेज प्रताड़ना और क्रूरता के लगाए आरोप
पत्नी ने आरोप लगाया था कि शादी के बाद उसे लगातार दहेज के लिए प्रताड़ित किया गया। मोटरसाइकिल और सोने के आभूषणों की मांग की जाती थी तथा उसके साथ मानसिक और शारीरिक क्रूरता की गई। महिला थाना बीकानेर में दर्ज एफआईआर के बाद पति और उसके पिता के खिलाफ आईपीसी की विभिन्न धाराओं में चार्जशीट भी पेश की गई थी।
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फैमिली कोर्ट के फैसले पर उठाए सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट ने अट्टा-सट्टा प्रथा से जुड़े विवाद और वैवाहिक क्रूरता के आरोपों को एक साथ जोड़कर गलत निष्कर्ष निकाला। कोर्ट ने माना कि महिला लंबे समय तक ससुराल में रही, इसका मतलब यह नहीं कि उसके साथ अत्याचार नहीं हुआ। कई महिलाएं सामाजिक दबाव, आर्थिक निर्भरता और बच्चों के कारण प्रताड़ना सहने को मजबूर रहती हैं।
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अट्टा-सट्टा प्रथा पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
खंडपीठ ने अपने फैसले में अट्टा-सट्टा प्रथा को मानव जीवन का आदान-प्रदान बताते हुए कहा कि यह व्यवस्था लड़कियों की स्वतंत्रता और सहमति को समाप्त करती है। कोर्ट ने टिप्पणी की कि एक बेटी दूसरे बेटे की शादी की गारंटी नहीं हो सकती।

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महिला को मिला तलाक, फैमिली कोर्ट का आदेश रद्द
राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने फैमिली कोर्ट बीकानेर का आदेश रद्द करते हुए पति-पत्नी का विवाह विच्छेद मंजूर कर लिया। कोर्ट के इस फैसले को सामाजिक कुप्रथाओं के खिलाफ एक अहम संदेश माना जा रहा है।

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