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Rajasthan News: सवाई माधोपुर में बेटी बृजेश ने दी पिता को मुखाग्नि, परंपराओं को चुनौती देती संवेदनशील मिसाल

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सवाई माधोपुर Published by: सवाई ब्यूरो Updated Fri, 17 Apr 2026 08:20 AM IST
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सार

Sawai Madhopur News: सवाई माधोपुर में बेटी बृजेश कंवर ने पिता को मुखाग्नि देकर परंपराओं को चुनौती दी। पिता के विश्वास, बेटी के साहस और परिवार के समर्थन ने मिलकर समानता और बदलती सामाजिक सोच का प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया।

In Sawai Madhopur, Daughter Brajesh Lights Father's Funeral Pyre A Touching Precedent Challenging Traditions
बेटी बृजेश कंवर ने दी पिता को मुखाग्नि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

राजस्थान के सवाई माधोपुर से सामने आई यह घटना सिर्फ एक अंतिम संस्कार तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज में बदलती सोच का संकेत भी देती है। जिला मुख्यालय के बाल मंदिर कॉलोनी में ठाकुर मोहन सिंह राजावत की अंतिम यात्रा के दौरान एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने वहां मौजूद लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उनकी बेटी बृजेश कंवर अर्थी को कंधा देने के लिए आगे बढ़ीं। समाज भले ही उसे “बेटी” के रूप में देखता रहा हो, लेकिन उनके पिता ने हमेशा उसे “बेटा” माना।

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पिता का विश्वास और अंतिम इच्छा
मोहन सिंह राजावत लंबे समय से ब्रेन कैंसर से जूझ रहे थे। अपने अंतिम दिनों में वे अक्सर यह कहते थे कि उनकी बेटी किसी बेटे से कम नहीं है और उनकी अंतिम विदाई भी वही करेगी। यह केवल एक भावनात्मक इच्छा नहीं थी, बल्कि अपनी बेटी की क्षमता और साहस पर उनका गहरा विश्वास था। इस विश्वास को बृजेश कंवर ने पूरी निष्ठा और दृढ़ता के साथ पूरा किया।
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बेटी का साहस और भावनात्मक क्षण
अंतिम यात्रा के दौरान बृजेश कंवर ने पहले अपने पिता को पुष्पांजलि अर्पित की और फिर स्वयं कंधा देकर अर्थी को श्मशान तक पहुंचाया। उस समय उनके चेहरे पर दुख और दृढ़ता दोनों स्पष्ट दिखाई दे रहे थे। हर कदम पर एक बेटी अपने पिता से बिछड़ रही थी, लेकिन उसी के साथ वह एक नई सामाजिक सोच को भी जन्म दे रही थी।



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परंपराओं से आगे बढ़ दी मुखाग्नि
श्मशान घाट पर जब मुखाग्नि देने का समय आया, तो वातावरण पूरी तरह शांत हो गया। यह क्षण केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं था, बल्कि पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देने वाला था। कांपते हाथों के बावजूद मजबूत संकल्प के साथ बृजेश कंवर ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। इस दृश्य ने वहां उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया, और उनकी आंखों में गर्व साफ दिखाई दिया।
 
परिवार का समर्थन और बदलती सोच
इस निर्णय में परिवार का सहयोग एक महत्वपूर्ण पहलू रहा। बृजेश कंवर ने अपने ससुर और पति से अनुमति ली, जिन्होंने न केवल उनकी इच्छा का सम्मान किया बल्कि पूरा समर्थन भी दिया। यह दर्शाता है कि पारिवारिक सहमति और सहयोग के साथ सामाजिक बदलाव को सहज बनाया जा सकता है।

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