Rajasthan: राजस्थान के इस जंगल वर्षों में एक बार दिखता है ऐसा नजारा, जहां सब था केसरिया, वहां दिखे पीले पलाश
Rajasthan: सवाई माधोपुर जिले के बौंली क्षेत्र के गोल वन क्षेत्र में दुर्लभ पीले पलाश के दो पेड़ मिलने से वन विभाग और प्रकृति प्रेमियों में उत्साह है। आमतौर पर केसरिया रंग में खिलने वाला पलाश यहां पीले रंग में खिला दिखाई दिया, जो बेहद दुर्लभ प्रजाति मानी जाती है।
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सवाई माधोपुर जिले के सामाजिक वानिकी के बौंली क्षेत्र के गोल वन क्षेत्र में सैकड़ों केसरिया पलाश के पेड़ों के बीच पलाश के दो पेड़ों पर खिले पीले फूलों ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है। पलाश को 'फ्लेम ऑफ द फॉरेस्ट' के नाम से जाना जाता है, लेकिन पीले रंग का पलाश बेहद दुर्लभ माना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम ब्यूटिया मोनोस्पर्मा ल्यूटिया है, जो सामान्य पलाश से अलग प्रजाति है। वन विभाग के अनुसार, गोल वन क्षेत्र में करीब दो साल पहले पहली बार पीले पलाश का फूल देखा गया था और इस साल फिर से इसका खिलना बेहद खास माना जा रहा है।
संरक्षित श्रेणी में आती है यह दुर्लभ प्रजाति
वन विभाग ने शुरू की संरक्षण की पहल
औषधीय गुणों से भरपूर है पलाश
पलाश के फूल जहां अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं, वहीं इनमें औषधीय गुण भी पाए जाते हैं। प्राचीन समय में होली के प्राकृतिक रंग भी इन्हीं फूलों से बनाए जाते थे। फिलहाल बौंली वन क्षेत्र में मिला यह पीला पलाश न सिर्फ वन विभाग के लिए, बल्कि प्रकृति प्रेमियों के लिए भी खास आकर्षण बना हुआ है और आने वाले समय में इसके संरक्षण की दिशा में बड़े प्रयास किए जाएंगे।
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भविष्य में बढ़ेगा आकर्षण और सुंदरता
आमतौर पर सवाई माधोपुर जिले में रणथंभौर सहित अन्य जगहों पर केसरिया पलाश के पेड़ पाए जाते हैं, जो अपने केसरिया फूलों से लोगों का मन मोह लेते हैं। लेकिन बौंली वन क्षेत्र में मिले पीले पलाश के दो पेड़ों पर खिले पीले फूल वाकई बेहद सुंदर और आकर्षक नजर आ रहे हैं, जो लोगों को खूब भा रहे हैं। यदि वन विभाग इन पीले पलाश के पेड़ों को संरक्षित करता है और इनके बीजों से नर्सरी में नए पौधे तैयार कर उनका रोपण करता है, तो जिले में केसरिया के साथ ही पीले पलाश की महक एवं सुंदरता भी लोगों के लिए खास आकर्षण बन सकती है।
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