{"_id":"6a1d62ffce58c4789d0379e2","slug":"jee-advanced-2026-sikar-s-jatin-chahar-secures-air-3-without-smartphone-or-social-media-2026-06-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"न मोबाइल, न सोशल मीडिया अकाउंट: फौजी के बेटे ने JEE Advanced में हासिल किया तीसरा स्थान; जानें सफलता की कहानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
न मोबाइल, न सोशल मीडिया अकाउंट: फौजी के बेटे ने JEE Advanced में हासिल किया तीसरा स्थान; जानें सफलता की कहानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीकर
Published by: सीकर ब्यूरो
Updated Mon, 01 Jun 2026 04:16 PM IST
विज्ञापन
सार
सीकर के छात्र जतिन चाहर ने JEE Advanced 2026 में ऑल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की है। BSF हेड कांस्टेबल के बेटे जतिन ने कभी मोबाइल फोन इस्तेमाल नहीं किया और सोशल मीडिया से पूरी दूरी बनाए रखी। उनकी सफलता का आधार अनुशासन, मेहनत और निरंतर अध्ययन रहा।
JEE Advanced में फौजी के बेटे का कमाल
- फोटो : Amar Ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विज्ञापन
विस्तार
कड़ी मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति समर्पण का शानदार उदाहरण पेश करते हुए सीकर के छात्र जतिन चाहर ने जेईई एडवांस्ड 2026 में ऑल इंडिया तीसरी रैंक हासिल की है। खास बात यह है कि जतिन ने आज तक मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं किया और किसी भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उनका कोई अकाउंट नहीं है।
बीएसएफ के हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं पिता
मूल रूप से झुंझुनूं जिले के गोठ गांव निवासी जतिन सीकर में अपनी मां मोनिका के साथ रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता दिनेश कुमार सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।
12 प्रतिदिन घंटे पढ़ाई करता है छात्र
देर रात घोषित हुए जेईई एडवांस्ड के परिणाम में देशभर में तीसरी रैंक प्राप्त करने के बाद जतिन की सफलता चर्चा का विषय बन गई है। जतिन का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, जिससे उनका ध्यान केवल पढ़ाई पर केंद्रित रहा। उन्होंने बताया कि कोचिंग के अलावा प्रतिदिन 6 से 7 घंटे अतिरिक्त अध्ययन करते थे। इस तरह उनकी कुल पढ़ाई करीब 12 घंटे प्रतिदिन होती थी। जतिन का मानना है कि किसी भी विषय में यदि कोई समस्या आती थी तो वह तुरंत अपने शिक्षकों से उसका समाधान कर लेते थे। डाउट्स क्लियर होने के बाद ही अगले टॉपिक पर आगे बढ़ते थे।
विज्ञापन
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
जतिन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया और पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराया। मां मोनिका ने बताया कि वह नियमित रूप से बेटे से पढ़ाई को लेकर चर्चा करती थीं और किसी भी परेशानी को समझने की कोशिश करती थीं। वहीं पिता दिनेश कुमार ने कहा कि नौकरी की व्यस्तताओं के कारण वह बेटे को ज्यादा समय नहीं दे पाते थे, लेकिन जब भी घर आते थे, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते थे।
ये भी पढ़ें- Ajmer: कांग्रेस चिंतन शिविर के समापन में पहुंचे राहुल गांधी, जिलाध्यक्षों के परिवार से मिले, खड़गे का दौरा टला
जतिन की इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो डिजिटल दुनिया के आकर्षण के बीच अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
बीएसएफ के हेड कांस्टेबल पद पर कार्यरत हैं पिता
मूल रूप से झुंझुनूं जिले के गोठ गांव निवासी जतिन सीकर में अपनी मां मोनिका के साथ रहकर इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रहे थे। उनके पिता दिनेश कुमार सीमा सुरक्षा बल (BSF) में हेड कांस्टेबल के पद पर कार्यरत हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
12 प्रतिदिन घंटे पढ़ाई करता है छात्र
देर रात घोषित हुए जेईई एडवांस्ड के परिणाम में देशभर में तीसरी रैंक प्राप्त करने के बाद जतिन की सफलता चर्चा का विषय बन गई है। जतिन का कहना है कि उन्होंने पढ़ाई के दौरान मोबाइल और सोशल मीडिया से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, जिससे उनका ध्यान केवल पढ़ाई पर केंद्रित रहा। उन्होंने बताया कि कोचिंग के अलावा प्रतिदिन 6 से 7 घंटे अतिरिक्त अध्ययन करते थे। इस तरह उनकी कुल पढ़ाई करीब 12 घंटे प्रतिदिन होती थी। जतिन का मानना है कि किसी भी विषय में यदि कोई समस्या आती थी तो वह तुरंत अपने शिक्षकों से उसका समाधान कर लेते थे। डाउट्स क्लियर होने के बाद ही अगले टॉपिक पर आगे बढ़ते थे।
Trending Videos
माता-पिता को दिया सफलता का श्रेय
जतिन ने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और शिक्षकों को दिया। उन्होंने कहा कि उनकी मां ने हर परिस्थिति में उनका मनोबल बढ़ाया और पढ़ाई के लिए सकारात्मक माहौल उपलब्ध कराया। मां मोनिका ने बताया कि वह नियमित रूप से बेटे से पढ़ाई को लेकर चर्चा करती थीं और किसी भी परेशानी को समझने की कोशिश करती थीं। वहीं पिता दिनेश कुमार ने कहा कि नौकरी की व्यस्तताओं के कारण वह बेटे को ज्यादा समय नहीं दे पाते थे, लेकिन जब भी घर आते थे, पढ़ाई और भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा करते थे।
ये भी पढ़ें- Ajmer: कांग्रेस चिंतन शिविर के समापन में पहुंचे राहुल गांधी, जिलाध्यक्षों के परिवार से मिले, खड़गे का दौरा टला
जतिन की इस उपलब्धि ने न केवल परिवार बल्कि पूरे जिले का नाम रोशन किया है। उनकी सफलता उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो डिजिटल दुनिया के आकर्षण के बीच अपने लक्ष्य पर फोकस बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।