NEET UG 2026: पहले कोटा हुआ बदनाम, अब सीकर की साख पर सवाल? जांच में सब उजागर होगा; CBI की टीम जयपुर पहुंची
NEET UG 2026 पेपर लीक मामले की जांच अब CBI करेगी। दिल्ली से CBI टीम जयपुर पहुंच गई है। टीम एसओजी से जांच रिपोर्ट व हिरासत में लिए गए संदिग्धों की जानकारी लेगी। मामले में सीकर के लोगों की संलिप्तता अपने आप में बड़ा सवाल खड़ा करती है।
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NEET UG 2026 परीक्षा रद्द होने के बाद अब जांच पूरी तरह केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) करेगी। एसओजी ने समय रहते वो कदम नहीं उठाए जिसकी उससे उम्मीद की जा रही थी। एफआईआर दर्ज करने में एसओजी ने बहुत देरी कर दी। जानकारी के मुताबिक दिल्ली से CBI की टीम शाम को जयपुर पहुंची। टीम राजस्थान एसओजी से अब तक की जांच रिपोर्ट, डिजिटल सबूत और हिरासत में लिए गए संदिग्धों की जानकारी लेगी। नीट 2026 के “गेस पेपर” विवाद में राजस्थान के कोचिंग हब सीकर का नाम सामने आया है। अब यहां के संस्थान भी सवालों के घेरे में हैं। हालांकि संस्थानों ने खुद को इस पूरे मामले से अलग कर लिया है।
पहले कोटा अब सवालों के घेरे में सीकर
राजस्थान में प्रतियोगिता परीक्षाओं में सबसे पहले कोटा देश का सबसे बड़ा सेंटर बनकर उभरा। इस शहर को नजर लगी और इसकी छवि धूमिल हुई। हालांकि इस बार की परीक्षाओं में कोटा के संस्थानों का प्रदर्शन देश में सबसे अच्छा रहा है। इससे उम्मीद जगी है कि कोटा की छवि को जो धक्का लगा था उसकी भरपाई हो चुकी है। अब पेपर लीक के मामले में सीकर का नाम आने से नई बहस छिड़ गई है। जांच एजेंसियों के अनुसार परीक्षा से पहले वायरल हुए कथित “गेस पेपर” के तार राजस्थान के सीकर से जुड़े हैं। एसओजी की जांच में पीपराली रोड स्थित एक कंसल्टेंसी सेंटर का नाम सामने आया है। एजेंसियों को संदेह है कि यहीं से प्रश्नों की पीडीएफ और फोटोकॉपी अलग-अलग छात्रों और राज्यों तक पहुंचाई गई। सूत्रों के मुताबिक वायरल गेस पेपर में शामिल बड़ी संख्या में सवाल वास्तविक NEET परीक्षा से मेल खाते थे। बायोलॉजी और केमिस्ट्री के करीब 125 सवालों के मैच होने का दावा जांच को और गंभीर बना रहा है।
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संस्थान संचालकों ने कहा- बदनाम न करें
सीकर के संस्थान संचालकों का कहना है कि किसी “गेस पेपर” के वायरल होने के आधार पर पूरे सेक्टर को कटघरे में खड़ा करना उचित नहीं है। ऑल कोचिंग इंस्टीट्यूट महासंघ के अशीष कुमार नाडार ने कहा कि यदि किसी संस्थान की संलिप्तता साबित होती है तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द किया जाना चाहिए, लेकिन केवल गेस पेपर घूमने से सभी संस्थानों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि सीकर में संस्थानों की सफलता का कारण मजबूत फैकल्टी और शैक्षणिक माहौल है। हर छह महीने में लाखों छात्र राजस्थान के संस्थानों में पढ़ने आते हैं और इससे पूरे शिक्षा क्षेत्र की विश्वसनीयता जुड़ी हुई है।
सीकर के छात्रों ने खुद शिकायत की
एक संस्थान के निदेशक राजेश कुलहरी ने भी आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि पेपर लीक मामले में संस्थानों की भूमिका साबित नहीं हुई है। वहीं दूसरी तरफ सीकर के छात्रों ने ही सबसे पहले पुलिस को कथित गेस पेपर की शिकायत दी थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के गेस पेपर बिहार, देहरादून और अन्य राज्यों में भी बांटे गए थे, लेकिन सीकर के छात्रों ने खुद आगे आकर इसकी जानकारी पुलिस को दी। ऐसे में पूरे शहर और शिक्षा से जुड़े सेक्टर को बदनाम करना उचित नहीं है।
CBI संभालेगी आगे की जांच
जानकारी के मुताबिक CBI टीम एसओजी अधिकारियों से बैठक करेगी। एजेंसी अब तक हिरासत में लिए गए लोगों से पूछताछ कर सकती है। पूरे नेटवर्क की मनी ट्रेल, डिजिटल चैट और कॉल रिकॉर्ड की जांच करेगी। एसओजी के एडीजी विशाल बंसल ने संकेत दिए हैं कि अब मामले की जांच CBI करेगी, इसलिए राजस्थान पुलिस की ओर से फिलहाल अलग एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।
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