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Rajasthan: ईसरदा बांध को लेकर 39 गांवों के किसानों का टोंक कलेक्ट्रेट पर घेराव, सरकार को 45 दिन का अल्टीमेटम

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक Published by: हिमांशु प्रियदर्शी Updated Wed, 08 Oct 2025 04:52 PM IST
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सार

Tonk News: ईसरदा बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आने वाले 39 गांवों के किसानों ने उचित मुआवजे और जलस्तर घटाने की मांग को लेकर टोंक कलेक्ट्रेट का घेराव किया। किसानों ने सरकार को 45 दिन का अल्टीमेटम दिया, अन्यथा आंदोलन की चेतावनी दी।
 

Rajasthan News: Farmers Siege Tonk Collectorate Over Isarda Dam, Give Government 45-Day Ultimatum
नाराज किसानों ने किया कलेक्ट्रेट का घेराव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

टोंक जिले में ईसरदा बांध परियोजना के दूसरे चरण की शुरुआत से पहले ही डूब क्षेत्र के किसानों का गुस्सा फूट पड़ा है। उचित मुआवजे और बढ़ते जलस्तर के विरोध में बुधवार को सैकड़ों किसानों ने शहर में विशाल प्रदर्शन और कलेक्ट्रेट घेराव किया। किसानों ने सरकार को 45 दिन का अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगे पूरी नहीं हुईं, तो वे तीव्र आंदोलन की राह अपनाएंगे।

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39 गांवों के किसान उतरे सड़कों पर
ईसरदा बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले 39 गांवों के किसान बुधवार को रुई पेंच मैदान में एकत्रित हुए, जहां बड़ी किसान सभा आयोजित की गई। सभा में किसानों ने ईसरदा बांध के दूसरे चरण में भूमि अधिग्रहण से पहले अपनी प्रमुख मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ रणनीति तय की। सभा के बाद किसानों ने पैदल रैली निकालकर जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जोरदार नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।
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मुआवजे को लेकर किसानों की प्रमुख मांगें
किसानों ने ज्ञापन में 21 सूत्रीय मांगें रखीं। मुख्य रूप से किसानों की यह मांग है कि डूब क्षेत्र की जमीन को सिंचित मानकर मुआवजा दिया जाए, क्योंकि कई किसानों की भूमि पर पहले से सिंचाई की सुविधाएं और फसल उत्पादन हो रहा है।
 
किसानों का आरोप है कि पहले चरण के कई किसानों को आज तक उचित मुआवजा नहीं मिला, इसलिए दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू करने से पहले यह समस्या हल की जानी चाहिए। दूसरे चरण में 39 गांवों की करीब 3800 हेक्टेयर से अधिक भूमि अधिग्रहित की जानी है, जिसके लिए किसान असिंचित के बजाय सिंचित भूमि के आधार पर बढ़ी हुई DLC दरों से अधिक मुआवज़ा चाहते हैं।

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जलस्तर 258 RL मीटर तक सीमित रखने की मांग
किसानों की दूसरी बड़ी चिंता बांध के जलस्तर में प्रस्तावित वृद्धि को लेकर है। परियोजना के तहत बांध का जलस्तर 262 RL मीटर तक बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिससे करीब 10.77 TMC पानी का भंडारण संभव होगा।
किसानों का कहना है कि इससे अधिक भूमि डूब क्षेत्र में आ जाएगी, जिससे कई गांव और कृषि क्षेत्र प्रभावित होंगे। इसलिए वे जलस्तर को 258 RL मीटर तक सीमित रखने की मांग कर रहे हैं, ताकि कृषि योग्य भूमि की हानि को रोका जा सके।
 
प्रशासन के बाद किसानों की अब सरकार के रुख पर निगाह
किसानों के प्रदर्शन और ज्ञापन के बाद ईसरदा बांध परियोजना से जुड़े अधिकारियों ने भी अपना पक्ष रखा। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना पूर्व निर्धारित मानकों के तहत आगे बढ़ाई जा रही है और किसानों की सभी आपत्तियों पर विचार किया जाएगा। हालांकि किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि 45 दिनों के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी गईं, तो वे सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

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