फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Rajasthan ›   Tonk News ›   Rajasthan nine Year-Old Daughter Given Father Turban in Tonk Breaking Centuries-Old Tradition

एक और बेटी बनी मिसाल: पिता के निधन के बाद नौ साल की रोहिणी को बांधी गई पगड़ी, सदियों पुरानी परंपरा टूटी

Mon, 10 Aug 2026 07:02 PM IST
हिमांशु सिंह बघेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, टोंक Published by: हिमांशु सिंह बघेल Updated Mon, 10 Aug 2026 07:02 PM IST
सार

टोंक के घाड़ कस्बे में मनोज कुमार रेगर के निधन के बाद उनके कोई पुत्र नहीं होने पर उनकी दो साल की बेटी रोहिणी को पिता की पगड़ी बांधी गई। मां निर्मला देवी और गांव के पंचों के इस फैसले ने सदियों पुरानी रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ते हुए बेटा-बेटी की समानता का संदेश दिया।

विज्ञापन
Rajasthan nine Year-Old Daughter Given Father Turban in Tonk Breaking Centuries-Old Tradition
रूढ़िवादी सोच को मात देता राजस्थान - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

टोंक जिले के घाड़ कस्बे में ग्रामीण मनोज कुमार रेगर के निधन के बाद उनकी पगड़ी उनकी नौ साल की नन्हीं बेटी रोहिणी को बांधी गई। मनोज का कोई पुत्र नहीं था। उनके निधन के बाद मां निर्मला देवी और घाड़ गांव के पंचों ने मिलकर यह महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णय लिया। उन्होंने मनोज की बड़ी बेटी रोहिणी को पिता की पगड़ी बांधी। इस अनूठी पहल के साथ ही परिजनों और ग्रामीणों ने सदियों से चली आ रही रूढ़िवादी परंपरा को तोड़ दिया।
विज्ञापन


तोड़ी दी सदियों पुरानी परंपरा
घाड़ गांव के पंचों ने 'पंच परमेश्वर' की भूमिका निभाते हुए समाज में बेटे और बेटी में पूर्ण समानता का संदेश दिया है। आमतौर पर पिता के निधन के बाद पगड़ी बांधने की सामाजिक रस्म केवल पुत्र द्वारा ही पूरी की जाती रही है। हालांकि, इस दुखद समय में गांव के पंचों और परिजनों ने मिलकर नई मिसाल कायम की है। यह फैसला सदियों पुरानी उस रूढ़िवादी सामाजिक परंपरा पर सीधा प्रहार है।
विज्ञापन


राजस्थान जैसे परंपराओं और रूढ़ियों को मानने वाले राज्य से ऐसी खबर सुखद एहसास देती है। हाल के दिनों में यह तीसरा मामला है, जब बेटी को परिवार का मुखिया माने जाने की प्रतीक पगड़ी पहनाई गई। खास बात यह भी है कि समाज के सभी वर्ग रूढ़ियां तोड़ते हुए आगे बढ़ रहे हैं। विगत मामला राजपूत परिवार का था, तो यह मामला अनुसूचित जाति वर्ग से जुड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  पाग दस्तूर में बदली सोच: जहां कभी गोद लिया जाता था वारिस, वहां अब बेटियों को मिली विरासत की बागडोर; तस्वीरें


नागौर में 10 वर्षीय बेटी का पाग दस्तूर हुआ था
नागौर जिले की रियां बड़ी पंचायत समिति के सुरियास गांव में भी ऐसी ही मिसाल देखने को मिली। यहां दिवंगत कानसिंह राठौड़ की 10 वर्षीय पुत्री भाविका कंवर को 'पाग दस्तूर' कर परिवार की आधिकारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया। कानसिंह राठौड़ का 15 जुलाई को बीमारी के कारण निधन हो गया था। उनकी एकमात्र संतान भाविका कंवर है। बारहवें की रस्म के दौरान परंपरा के अनुसार किसी निकट संबंधी को गोद लेने पर चर्चा हो रही थी। उस दौरान परिवार की महिलाओं ने स्पष्ट कहा कि बेटा और बेटी में कोई अंतर नहीं होता, इसलिए पाग दस्तूर भाविका का ही होगा।

पाली से भी सामने आया था ऐसा मामला
मारवाड़ की सदियों पुरानी राजपूती परंपराओं और पुरुष-प्रधान व्यवस्था को समय के अनुरूप नया स्वरूप देते हुए पाली जिले के ऐतिहासिक खैरवागढ़ ठिकाने ने महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की थी। पूर्व जागीरदार और दो बार सरपंच रहे ठाकुर हरिश्चंद्र सिंह जोधा के निधन के बाद उनकी 12 वर्षीय पुत्री तेजस्वी कुमारी जोधा को खैरवागढ़ की राजगद्दी का उत्तराधिकारी घोषित किया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed