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Rajasthan: कन्हैयालाल मर्डर केस में फिर गहराया विवाद, डीएसपी के तबादले पर क्यों भड़क रहा पीड़ित परिवार?
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उदयपुर
Published by: उदयपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Jun 2026 08:10 PM IST
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सार
उदयपुर में कन्हैयालाल हत्याकांड से जुड़े पुराने विवाद फिर सामने आ गए हैं। डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की उदयपुर गिर्वा में नियुक्ति का परिजनों और प्रतिनिधियों ने विरोध किया था। बढ़ते विरोध के बाद विभाग ने उनकी जॉइनिंग पर फिलहाल रोक लगा दी है।
कन्हैयालाल हत्याकांड फिर चर्चाओं में आया
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
उदयपुर चर्चित कन्हैयालाल हत्याकांड एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मामला पुलिस अधिकारियों के तबादले से जुड़ा है। बांसवाड़ा साइबर क्राइम शाखा में पदस्थ डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की उदयपुर जिले में नियुक्ति का विरोध शुरू हो गया है। विरोध के बाद फिलहाल उनकी जॉइनिंग पर रोक लगा दी गई है।
बुधवार को स्वर्गीय कन्हैयालाल के पुत्र यश तेली समाज के प्रतिनिधियों के साथ उदयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से मिले और डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन अधिकारियों की भूमिका को लेकर पहले सवाल उठ चुके हैं, उन्हें जिले में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए।
तबादला सूची जारी होते ही शुरू हुआ विरोध
हाल ही में पुलिस मुख्यालय ने प्रदेशभर के 141 डीएसपी अधिकारियों के तबादले किए थे। तबादला सूची के अनुसार उदयपुर गिर्वा के डीएसपी गोपाल चंदेल का स्थानांतरण बांसवाड़ा साइबर क्राइम शाखा में किया गया, जबकि वहां कार्यरत डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित को उदयपुर गिर्वा में पदस्थापित किया गया था। हालांकि, सूची सार्वजनिक होने के साथ ही राजपुरोहित की नियुक्ति का विरोध शुरू हो गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए विभाग ने फिलहाल उनकी जॉइनिंग पर अस्थायी रोक लगा दी है।
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'पिता ने मांगी थी सुरक्षा, लेकिन नहीं हुई सुनवाई'
कन्हैयालाल के पुत्र यश तेली ने आरोप लगाया कि हत्याकांड के समय गोविंद सिंह राजपुरोहित धानमंडी थाने में थाना प्रभारी (सीआई) के पद पर कार्यरत थे। उनके अनुसार, सोशल मीडिया विवाद के बाद कन्हैयालाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
यश तेली का कहना है कि उनके पिता ने थाने पहुंचकर सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन मामले में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो इस दुखद घटना को टाला जा सकता था।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी की गई थी। इसी पृष्ठभूमि में डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
ये भी पढ़ें- जयपुर नूरानी मस्जिद विवाद: 'अपराध होगा तो बुलडोजर चलेगा', मुस्लिम फोरम के बयान पर भाजपा विधायक का तीखा पलटवार
विभाग ने फिलहाल रोकी जॉइनिंग
विरोध और आपत्तियों को देखते हुए पुलिस विभाग ने फिलहाल डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की उदयपुर में जॉइनिंग पर रोक लगा दी है। अब मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
कब हुई थी कन्हैयालाल की हत्या
28 जून 2022 को उदयपुर के धानमंडी क्षेत्र में स्थित दुकान पर काम कर रहे दर्जी कन्हैयालाल साहू की दो आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपियों द्वारा एक वीडियो जारी किए जाने से मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। घटना की गंभीरता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी।
बुधवार को स्वर्गीय कन्हैयालाल के पुत्र यश तेली समाज के प्रतिनिधियों के साथ उदयपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) से मिले और डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की नियुक्ति पर आपत्ति दर्ज कराई। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिन अधिकारियों की भूमिका को लेकर पहले सवाल उठ चुके हैं, उन्हें जिले में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जानी चाहिए।
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तबादला सूची जारी होते ही शुरू हुआ विरोध
हाल ही में पुलिस मुख्यालय ने प्रदेशभर के 141 डीएसपी अधिकारियों के तबादले किए थे। तबादला सूची के अनुसार उदयपुर गिर्वा के डीएसपी गोपाल चंदेल का स्थानांतरण बांसवाड़ा साइबर क्राइम शाखा में किया गया, जबकि वहां कार्यरत डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित को उदयपुर गिर्वा में पदस्थापित किया गया था। हालांकि, सूची सार्वजनिक होने के साथ ही राजपुरोहित की नियुक्ति का विरोध शुरू हो गया। बढ़ते विरोध को देखते हुए विभाग ने फिलहाल उनकी जॉइनिंग पर अस्थायी रोक लगा दी है।
'पिता ने मांगी थी सुरक्षा, लेकिन नहीं हुई सुनवाई'
कन्हैयालाल के पुत्र यश तेली ने आरोप लगाया कि हत्याकांड के समय गोविंद सिंह राजपुरोहित धानमंडी थाने में थाना प्रभारी (सीआई) के पद पर कार्यरत थे। उनके अनुसार, सोशल मीडिया विवाद के बाद कन्हैयालाल ने अपनी सुरक्षा को लेकर पुलिस से संपर्क किया था, लेकिन उनकी शिकायत को गंभीरता से नहीं लिया गया।
यश तेली का कहना है कि उनके पिता ने थाने पहुंचकर सुरक्षा की मांग की थी, लेकिन मामले में प्रभावी कार्रवाई करने के बजाय दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने का प्रयास किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते उचित सुरक्षा व्यवस्था की जाती तो इस दुखद घटना को टाला जा सकता था।
पहले भी उठ चुके हैं सवाल
कन्हैयालाल हत्याकांड की जांच के दौरान कुछ पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। मामले में लापरवाही के आरोपों के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई भी की गई थी। इसी पृष्ठभूमि में डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित का नाम एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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विभाग ने फिलहाल रोकी जॉइनिंग
विरोध और आपत्तियों को देखते हुए पुलिस विभाग ने फिलहाल डीएसपी गोविंद सिंह राजपुरोहित की उदयपुर में जॉइनिंग पर रोक लगा दी है। अब मामले में आगे क्या निर्णय लिया जाएगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
कब हुई थी कन्हैयालाल की हत्या
28 जून 2022 को उदयपुर के धानमंडी क्षेत्र में स्थित दुकान पर काम कर रहे दर्जी कन्हैयालाल साहू की दो आरोपियों ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी। घटना के बाद आरोपियों द्वारा एक वीडियो जारी किए जाने से मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया था। घटना की गंभीरता और व्यापक प्रभाव को देखते हुए केंद्र सरकार ने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी थी।