AIIMS Bilaspur: सांस की नली अचानक अवरुद्ध होने की स्थिति में एम्स में तुरंत मिलेगा बेहतर उपचार
एम्स बिलासपुर जल्द ही अपनी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में अत्याधुनिक एक्सपिरेटरी वेंटिलेटरी असिस्ट डिवाइस को शामिल करने जा रहा है।
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एम्स बिलासपुर जल्द ही अपनी आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में अत्याधुनिक एक्सपिरेटरी वेंटिलेटरी असिस्ट डिवाइस को शामिल करने जा रहा है। यह उन्नत तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों के लिए जीवन रक्षक साबित होगी, जिनकी सांस की नली अचानक अवरुद्ध हो जाती है और सामान्य वेंटिलेशन संभव नहीं रहता। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, कई बार सड़क दुर्घटनाओं, गले की गंभीर चोट, एलर्जी रिएक्शन, जलने की घटनाओं या अचानक चोकिंग के कारण मरीज की श्वास नली बंद हो जाती है। ऐसी स्थिति में कुछ ही मिनटों में ऑक्सीजन की कमी से जान का खतरा बढ़ जाता है। अब एम्स में उपलब्ध होने वाली ईवीए तकनीक इन जटिल परिस्थितियों से निपटने में डॉक्टरों की बड़ी मदद करेगी। एक्सपिरेटरी वेंटिलेटरी असिस्ट डिवाइस एक पोर्टेबल, हैंड-हेल्ड उपकरण है, जिसे विशेष आपात परिस्थितियों के लिए डिजाइन किया गया है।
जब मुंह या नाक के जरिए वेंटिलेटर ट्यूब डालना संभव नहीं होता, तब यह डिवाइस गले के बाहर से एक छोटी ट्यूब (क्रिकोथायरॉयडोटोमी या ट्रांस्ट्रैचियल एक्सेस) के माध्यम से सीधे फेफड़ों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में सक्षम होती है। इस तकनीक की खासियत यह है कि यह केवल ऑक्सीजन ही नहीं पहुंचाती, बल्कि फेफड़ों से कार्बन डाइऑक्साइड को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने में भी मदद करती है। डॉक्टर बताते हैं कि सड़क दुर्घटना या गंभीर ट्रामा के बाद शुरुआती 60 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, जिन्हें गोल्डन ऑवर कहा जाता है। इस समय पर यदि मरीज को सही उपचार मिल जाए तो बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। ईवीए मशीन पोर्टेबल होने के कारण ट्रॉमा सेंटर, आपातकालीन कक्ष या ऑपरेशन थिएटर में तुरंत उपयोग की जा सकती है। इससे उपचार में देरी नहीं होगी और मरीज की जान बचाने की संभावना बढ़ेगी। गले, चेहरे और श्वसन तंत्र से जुड़ी जटिल सर्जरी के दौरान कभी-कभी सामान्य एनेस्थीसिया देना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसे मामलों में ईवीए डिवाइस बैकअप के रूप में कार्य करेगी और डॉक्टरों को अधिक सुरक्षित विकल्प उपलब्ध कराएगी।
फेफड़े अनावश्यक दबाव से बचेंगे
विशेषज्ञों के अनुसार, कैनॉट इंट्यूबेट, कैनॉट ऑक्सीजनेट जैसी गंभीर और जानलेवा स्थिति में यह तकनीक निर्णायक भूमिका निभा सकती है। सामान्य वेंटिलेशन के दौरान कभी-कभी अधिक दबाव के कारण फेफड़ों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। ईवीए तकनीक नियंत्रित वेंटिलेशन प्रदान करती है, जिससे ऑक्सीजन का प्रवाह संतुलित रहता है और फेफड़ों को अनावश्यक दबाव से बचाया जा सकता है। नई सुविधा उपलब्ध होने से गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत उपचार मिलेगा,रेफरल की आवश्यकता कम होगी,उपचार में देरी नहीं होगी,परिजनों को मानसिक और आर्थिक राहत मिलेगी। एम्स बिलासपुर प्रदेश का प्रमुख तृतीयक स्वास्थ्य संस्थान है और यहां अत्याधुनिक उपकरणों की उपलब्धता से पूरे क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।