Himachal: अनिरुद्ध सिंह बोले- विकसित भारत रोजगार मिशन मनरेगा के विपरीत, बढ़ेगा वित्तीय बोझ
मंत्री ने प्रेसवार्ता में कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक मांग के अनुरूप रोजगार मिलता था। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारियां निभाती थीं।
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पंचायतीराज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने केंद्र सरकार के प्रस्तावित विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 का विरोध किया है। उन्होंने इसे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) की मूल भावना के विपरीत बताया। मंत्री ने कहा कि यह अधिनियम राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय और प्रशासनिक बोझ डालेगा। इससे उनकी वित्तीय स्वायत्तता भी प्रभावित होगी। मंत्री ने प्रेसवार्ता में कहा कि मनरेगा एक मांग आधारित योजना थी, इसमें ग्रामीण क्षेत्रों में वास्तविक मांग के अनुरूप रोजगार मिलता था। इसमें केंद्र और राज्य सरकारें अपनी जिम्मेदारियां निभाती थीं। हालांकि, प्रस्तावित अधिनियम में केंद्र सरकार अपनी वित्तीय जिम्मेदारी को वार्षिक मानक बजट आवंटन तक सीमित करना चाहती है।
इससे अतिरिक्त वित्तीय बोझ सीधे राज्यों पर आएगा। कानून बनाने से पहले राज्यों से वित्तीय दायित्व, मजदूरी दर और रोजगार की मांग जैसे विषयों पर कोई व्यापक परामर्श नहीं किया गया। वर्तमान में गैर-जनजातीय क्षेत्रों के लिए 247 रुपये प्रतिदिन की मजदूरी निर्धारित है। प्रस्तावित अधिनियम में मजदूरी दरों में वृद्धि की कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है, जिससे श्रमिकों के हित प्रभावित होंगे। अनिरुद्ध सिंह ने प्रदेश जैसे पर्वतीय राज्यों की विशेष परिस्थितियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं की संवेदनशीलता, निर्माण कार्यों की अधिक लागत और बिखरी ग्रामीण आबादी को नए आवंटन फार्मूले में पर्याप्त महत्व नहीं मिला है। यदि वास्तविक मांग केंद्र के निर्धारित आवंटन से अधिक होती है, तो पूरा अतिरिक्त व्यय राज्य सरकार को वहन करना पड़ेगा।
ग्राम पंचायतों पर नई जिम्मेदारियां
मंत्री ने बताया कि नए अधिनियम में ग्राम पंचायतों पर कई नई जिम्मेदारियां डाली गई हैं। इनमें विकास योजनाओं का विस्तृत निर्माण, जीआईएस आधारित योजना प्रणाली और पीएम गति शक्ति का एकीकरण शामिल है।
मनरेगा में मिलने वाली मजदूरी भी 320 से घटाकर 247 रुपये की
मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने बताया कि पहले मनरेगा का पूरा खर्च केंद्र उठाता था। अब इसे हिमाचल जैसे विशेष राज्यों के लिए 90:10 कर दिया गया है। इससे राज्य पर हर साल 164.63 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा। मनरेगा के तहत मिलने वाली मजदूरी भी 320 रुपये से घटाकर 247 रुपये कर दी गई है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र पर मनरेगा स्टाफ का फरवरी से 20 करोड़ रुपये बकाया है।
सांसदों से अपील और पार्टी के आंतरिक मामले
उन्होंने भाजपा सांसदों को केंद्र सरकार के सामने हिमाचल के हितों से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाना चाहिए। मनरेगा में बदलाव से प्रदेश पर पड़ने वाले आर्थिक प्रभाव को लेकर उन्हें अपनी बात रखनी चाहिए। कांग्रेस के पूर्व नेता नीरज भारती की नाराजगी पर अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखनी चाहिए। सार्वजनिक बयान पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचाते हैं।