जलवायु परिवर्तन का असर: बुरांश के अस्तित्व पर खतरा, 2090 तक बदल सकती है हिमाचल की वन संपदा
हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन का असर अब राज्य पुष्प बुरांश पर भी दिखाई देने लगा है। वैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार बढ़ते तापमान और बदलते वर्षा पैटर्न के कारण बुरांश के पेड़ निचले क्षेत्रों से ऊंचाई वाले इलाकों की ओर खिसक रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो वर्ष 2070 और 2090 तक बुरांश के जंगलों का क्षेत्र तेजी से घट सकता है।
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हिमाचल प्रदेश में जलवायु परिवर्तन के कारण बुरांश के पेड़ गंभीर संकट में हैं। बढ़ते तापमान के कारण यह पेड़ निचले इलाकों से अधिक ऊंचाई वाले ठंडे क्षेत्रों की ओर पलायन कर सकता है। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मौजूदा रुझान जारी रहा तो आने वाले दशकों में बुरांश के जंगल सिकुड़ जाएंगे।
गुलाबी बुरांश हिमाचल का राज्य पुष्प भी है। यह खुलासा हिमाचल प्रदेश के 95 प्रमुख स्थानों से जुटाए गए आंकड़ों और मैक्सएंट कंप्यूटर मॉडलिंग के आधार पर हुआ है। शोधकर्ताओं ने वर्ष 2070 और 2090 के भविष्य के जलवायु परिदृश्यों का विश्लेषण कर यह रिपोर्ट तैयार की है। अध्ययन बताता है कि बुरांश के अस्तित्व के लिए तापमान का उतार-चढ़ाव सबसे बड़ा जिम्मेदार कारक है।
शोधकर्ताओं ने हिमाचल प्रदेश के तीन प्रमुख क्षेत्रों को जलवायु अनुकूल सुरक्षित ठिकाने के रूप में चिह्नित किया है। इनमें चंबा का कालाटॉप-खजियार, सोलन का चैल और सिरमौर या शिमला का चूड़धार वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं। यह अध्ययन डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय सोलन की याचना कौशल, दौलत राम भारद्वाज और वैशाली शर्मा, आईसीएआर-भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान दतिया के प्रशांत शर्मा, सेंट्रल तसर रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट, रांची के कमलेश वर्मा, वीर चंद्र सिंह गढ़वाली उत्तराखंड बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय रानीचौरी के पंकज ठाकुर और चेत्तिनाड अकादमी ऑफ रिसर्च एंड एजुकेशन एवं चेत्तिनाड हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट तमिलनाडु के विवेक कुमार धीमान ने संयुक्त रूप से किया है।