Himachal: केंद्र सरकार ने यूरोपियन यूनियन के सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी घटाई, राठौर बोले- यह बागवानों से अन्याय
सेब बागवानों को मोदी सरकार ने एक और झटका दिया है। केंद्र ने यूरोपियन यूनियन के सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 20 प्रतिशत की है।
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हिमाचल के सेब बागवानों को मोदी सरकार ने एक और झटका दिया है। केंद्र ने यूरोपियन यूनियन के सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 50 से घटाकर 20 प्रतिशत की है। इससे बागवानों की चिंता बढ़ गई है। इससे पहले मोदी सरकार न्यूजीलैंड के सेब पर 25 प्रतिशत ड्यूटी कर चुकी है। इन फैसलों से हिमाचल का 5,500 करोड़ रुपये का सेब आर्थिकी संकट में आ गई है। प्रधानमंत्री बनने से पहले 2014 में नरेंद्र मोदी ने सुजानपुर रैली में विदेशी सेब पर इंपोर्ट ड्यूटी 100 फीसदी करने का वादा किया था लेकिन हुआ इसके उलट है। वहीं अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता ठियोग के विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने यूरोपीयन देशों के साथ फलों विशेषतौर पर सेब आयात पर शुल्क घटाकर 20 प्रतिशत करने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के सेब बागवानों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने न्यूजीलैंड के साथ भी आयात शुल्क कम किया है और अब यूरोपीय देशों के साथ भी आयात शुल्क कम करना विशेष तौर पर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों जिसकी आर्थिकी फलों, सेब पर अधिकतर हो, उसे अपने राजनीतिक लाभ के लिए ध्वस्त करना बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है।
राठौर ने गुरुवार को जारी बयान में केंद्र सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अमेरिका के दबाव में देश की आर्थिकी को बर्बाद करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में पांच हजार करोड़ की सेब आर्थिकी पर पहले ही संकट के बादल छाए हैं और केंद्र सरकार की किसान व बागवान विरोधी नीतियों से अब इसके अस्तित्व पर ओर भी खतरा मंडरा रहा है। उन्होंने आशंका जताई है कि अमेरिका के साथ हाल ही में भारत के मुक्त व्यापार समझौते के तहत अन्य देशों के साथ भी ऐसे ही करार कर हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्यों के सेब उत्पादन और इसके बाजार को खत्म किया जा रहा है। राठौर ने केंद्र सरकार से विदेशों से आने वाले फलों पर आयात शुल्क शत प्रतिशत करने की मांग दोहराते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री को प्रदेश के सेब बागवानों से किए गए अपने वादों को पूरा करना चाहिए।
सेब अर्थव्यवस्था हिमाचल की जीवनरेखा, आयात नीति में बागवानों के हितों की अनदेखी नहीं होने दी जाएगी: संदीपनी
भाजपा प्रवक्ता संदीपनी भारद्वाज ने प्रदेश के सेब उत्पादकों की चिंताओं पर कहा कि हिमाचल की सेब आधारित अर्थव्यवस्था राज्य की जीवनरेखा है और बागवानों के हितों की रक्षा भाजपा तथा केंद्र सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मोदी सरकार हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादकों के साथ पूरी मजबूती से खड़ी है और किसी भी परिस्थिति में उनके हितों से समझौता नहीं होने दिया जाएगा। संदीपनी भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में यूरोपीय संघ के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर बागवानों के मन में जो प्रश्न और चिंताएं हैं, उन्हें सरकार गंभीरता से समझती है। सेब उत्पादन केवल एक फसल नहीं, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी, रोजगार और लाखों परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है। ऐसे में यह जरूरी है कि हिमाचली सेब को बाजार में उचित मूल्य और संरक्षण मिले।
उन्होंने कहा कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का क्रियान्वयन 2027 में लागू होगा और सरकार के पास पर्याप्त समय है कि बागवानों के हितों की रक्षा के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। न्यूनतम आयात मूल्य, गुणवत्ता मानक, बाजार नियंत्रण और सुरक्षा प्रावधानों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि विदेशी सेब के आयात से हिमाचल के उत्पादकों को नुकसान न हो। उन्होंने कहा कि भाजपा का स्पष्ट मत है कि हिमाचल के सेब उत्पादकों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। सरकार बागवानों के साथ संवाद स्थापित कर उनकी आशंकाओं का समाधान करेगी और सेब उद्योग को सुरक्षित रखने के लिए सभी आवश्यक नीतिगत उपाय अपनाएगी। केंद्र सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि हिमाचल के सेब को उचित समर्थन मूल्य, बेहतर बाजार और संरक्षण मिलता रहे। उन्होंने कहा कि हिमाचल के सेब उत्पादकों के हित सर्वोपरि हैं और मोदी सरकार उनके अधिकारों, सुरक्षा और समृद्धि के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगी।