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Shimla News: घुंघरुओं की झंकार के बीच कथक की लय-ताल सीख रहे कलाकार
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गेयटी में कार्यशाला के दूसरे दिन विद्यागौरी अडकर और मुजफ्फर मुल्ला ने सिखाईं कथक की बारीकियां
प्रशिक्षण सत्र में करीब 20 प्रतिभागियों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के रिहर्सल हॉल में ता थइया ता...पर थिरकते पांव और घुंघरों की गूंज हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। दरअसल कथक आवर्तन कार्यशाला में प्रतिभागियों को कथक की लय और ताल की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। कार्यशाला का संचालन शनिवार को अंतरराष्ट्रीय कथक गुरु विद्यागौरी अडकर और मुजफ्फर मुल्ला ने किया।
सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक चले प्रशिक्षण सत्र में करीब 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया। गुरुओं ने प्रतिभागियों को उनकी दक्षता के आधार पर शुरुआती, मध्यवर्ती और उन्नत वर्गों में विभाजित कर प्रशिक्षण दिया ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल सके। प्रशिक्षण के दौरान तत्कार, आमद, तोड़े, परन, लयकारी, अभिनय और मंच प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण पक्षों पर विस्तार से अभ्यास कराया गया।
विद्यार्थियों ने पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ अभ्यास किया। प्रतिभागियों ने लयकारी, पद-संचालन, हस्त-मुद्राओं और भाव-अभिनय का गहन अभ्यास किया। इस दौरान गुरुजनों ने प्रत्येक विद्यार्थी की प्रस्तुति का व्यक्तिगत मूल्यांकन करते हुए तकनीकी त्रुटियों में सुधार, लयबद्धता को मजबूत करने और मंच पर प्रभावी प्रस्तुति के लिए आवश्यक सुझाव दिए। प्रतिभागियों में इंदु, तमन्ना, सोनिया, मोनिका, पलक, सोनिका, पिहू, विक्रम, रेखा, दीक्षा, एकता, आदित्य, सिमरन, ईशा, गीतांजलि, वंदना, स्वाति और सर्वेश शामिल हैं। वहीं साहिल, निखिल देवलसिया, साक्षी शर्मा, ऋषिता सिंह कंवर और सोनिया ने सहयोगी कलाकारों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रविवार को कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में पंडित कश्मीरी लाल शिरकत करेंगे। इनकी उपस्थिति में प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा और कार्यशाला के अनुभव भी साझा किए जाएंगे।
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गुरुओं से सीखी कला, अब दे रहे प्रस्तुतियां
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक कलाकार विद्यागौरी अडकर दिल्ली दूरदर्शन की ए-ग्रेड कलाकार और आईसीसीआर की एम्पैनल्ड आर्टिस्ट हैं। उन्होंने गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी और गुरु जाफर मुल्ला से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। भारत सहित कई देशों में उन्होंने कथक की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी हैं। इनकी शिक्षण शैली और मंचीय अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। वहीं मुजफ्फर मुल्ला दूरदर्शन के ग्रेडेड कलाकार, कोरियोग्राफर और कला तीर्थ कथक अकादमी के संस्थापक हैं। उन्होंने गुरु जाफर मुल्ला और पंडित राजेंद्र गंगानी से कथक की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रतिनिधित्व किया है।
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प्रशिक्षण सत्र में करीब 20 प्रतिभागियों ने लिया भाग
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। गेयटी थियेटर के रिहर्सल हॉल में ता थइया ता...पर थिरकते पांव और घुंघरों की गूंज हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। दरअसल कथक आवर्तन कार्यशाला में प्रतिभागियों को कथक की लय और ताल की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। कार्यशाला का संचालन शनिवार को अंतरराष्ट्रीय कथक गुरु विद्यागौरी अडकर और मुजफ्फर मुल्ला ने किया।
सुबह 10 से दोपहर एक बजे तक चले प्रशिक्षण सत्र में करीब 20 प्रतिभागियों ने भाग लिया। गुरुओं ने प्रतिभागियों को उनकी दक्षता के आधार पर शुरुआती, मध्यवर्ती और उन्नत वर्गों में विभाजित कर प्रशिक्षण दिया ताकि प्रत्येक विद्यार्थी को व्यक्तिगत मार्गदर्शन मिल सके। प्रशिक्षण के दौरान तत्कार, आमद, तोड़े, परन, लयकारी, अभिनय और मंच प्रस्तुति जैसे महत्वपूर्ण पक्षों पर विस्तार से अभ्यास कराया गया।
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विद्यार्थियों ने पूरे समर्पण और अनुशासन के साथ अभ्यास किया। प्रतिभागियों ने लयकारी, पद-संचालन, हस्त-मुद्राओं और भाव-अभिनय का गहन अभ्यास किया। इस दौरान गुरुजनों ने प्रत्येक विद्यार्थी की प्रस्तुति का व्यक्तिगत मूल्यांकन करते हुए तकनीकी त्रुटियों में सुधार, लयबद्धता को मजबूत करने और मंच पर प्रभावी प्रस्तुति के लिए आवश्यक सुझाव दिए। प्रतिभागियों में इंदु, तमन्ना, सोनिया, मोनिका, पलक, सोनिका, पिहू, विक्रम, रेखा, दीक्षा, एकता, आदित्य, सिमरन, ईशा, गीतांजलि, वंदना, स्वाति और सर्वेश शामिल हैं। वहीं साहिल, निखिल देवलसिया, साक्षी शर्मा, ऋषिता सिंह कंवर और सोनिया ने सहयोगी कलाकारों के रूप में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रविवार को कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथि के रूप में पंडित कश्मीरी लाल शिरकत करेंगे। इनकी उपस्थिति में प्रतिभागियों को सम्मानित किया जाएगा और कार्यशाला के अनुभव भी साझा किए जाएंगे।
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गुरुओं से सीखी कला, अब दे रहे प्रस्तुतियां
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कथक कलाकार विद्यागौरी अडकर दिल्ली दूरदर्शन की ए-ग्रेड कलाकार और आईसीसीआर की एम्पैनल्ड आर्टिस्ट हैं। उन्होंने गुरु पंडित राजेंद्र गंगानी और गुरु जाफर मुल्ला से प्रशिक्षण प्राप्त किया है। भारत सहित कई देशों में उन्होंने कथक की प्रभावशाली प्रस्तुतियां दी हैं। इनकी शिक्षण शैली और मंचीय अनुभव विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं। वहीं मुजफ्फर मुल्ला दूरदर्शन के ग्रेडेड कलाकार, कोरियोग्राफर और कला तीर्थ कथक अकादमी के संस्थापक हैं। उन्होंने गुरु जाफर मुल्ला और पंडित राजेंद्र गंगानी से कथक की शिक्षा प्राप्त की है। उन्होंने देश-विदेश के अनेक प्रतिष्ठित मंचों पर भारतीय शास्त्रीय नृत्य का प्रतिनिधित्व किया है।