Shimla: सीएजी संजय मूर्ति बोले- पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक आधारित ऑडिट पर दें जोर
सीएजी के संजय मूर्ति ने कहा कि सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग और सुशासन को मजबूत बनाने में लेखा परीक्षा संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और बदलते समय के साथ ऑडिट प्रक्रियाओं को और अधिक तकनीक आधारित एवं परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता है।
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भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) के संजय मूर्ति ने हिमाचल प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) कार्यालय के कार्यों की विस्तृत समीक्षा करते हुए विभाग को पारदर्शिता, जवाबदेही और लोक सेवा में उत्कृष्टता के उच्च मानकों को बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक धन के प्रभावी उपयोग और सुशासन को मजबूत बनाने में लेखा परीक्षा संस्थाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और बदलते समय के साथ ऑडिट प्रक्रियाओं को और अधिक तकनीक आधारित एवं परिणामोन्मुख बनाने की आवश्यकता है। शिमला स्थित प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) कार्यालय में समीक्षा बैठक के दौरान सीएजी ने वार्षिक लेखा परीक्षा योजना के क्रियान्वयन, डेटा-आधारित लेखा परीक्षाओं की प्रगति और तैयार की जा रही विभिन्न लेखा परीक्षा प्रतिवेदनों की स्थिति का मूल्यांकन किया।
प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा) हिमाचल पुरुषोत्तम तिवारी ने विभाग की कार्यप्रणाली, उपलब्धियों और वर्तमान में संचालित प्रमुख पहलों का प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने बताया कि विभाग लेखा परीक्षा प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और सटीक बनाने के लिए डेटा एनालिटिक्स और प्रौद्योगिकी-सक्षम ऑडिट प्रणाली का व्यापक उपयोग कर रहा है। अधिकारियों ने बताया कि तकनीकी उपकरणों के उपयोग से अनियमितताओं की पहचान, जोखिम मूल्यांकन और वित्तीय निगरानी की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सीएजी के. संजय मूर्ति ने अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्य निष्ठा तथा पेशेवर प्रतिबद्धता की सराहना करते हुए कहा कि लेखा परीक्षा केवल वित्तीय अनियमितताओं की पहचान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक सुधार, नीति निर्माण और जवाबदेह शासन व्यवस्था को मजबूत करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है।
50 पौधे भी रोपे
भारत सरकार हर साल जुलाई के पहले सप्ताह में वन महोत्सव मनाने पर जोर देती है। इसी उद्देश्य के चलते महालेखाकार हिमाचल प्रदेश शिमला के दोनों कार्यालयों के कर्मचारियों ने पौधरोपण किया। कुल 50 पौधे लगाए गए।