चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट विवाद: मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने आरोपों को किया खारिज, जानें क्या कुछ बोले
चेस्टर हिल जमीन खरीद पर मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने भ्रष्टाचार के आरोप खारिज किए हैं। उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर उन पर आरोप लगाया जा रहा है, वह उनकी मुख्य सचिव के रूप में नियुक्ति से पहले ही खरीदी जा चुकी थी। पढ़ें पूरी खबर...
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हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट को लेकर माकपा की ओर से उन पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और उन्हें झूठा और निराधार बताया। गुप्ता ने कहा कि चेस्टर हिल्स प्रोजेक्ट से जुड़ी किसी भी अनियमितता में उनका कोई लेना-देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस जमीन को लेकर उन पर आरोप लगाया जा रहा है, वह उनकी मुख्य सचिव के रूप में नियुक्ति से पहले ही खरीदी जा चुकी थी। इस दौरान उन्होंने छोटा शिमला थाने में शिकायत देने वाले पूर्व एडवोकेट जनरल विनय शर्मा पर भी काफी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना ने मेरे खिलाफ षड्यंत्र रचा। उन्होंने तीन एकड़ जमीन की खरीद को लेकर पूरी जानकारी दी।
संजय गुप्ता ने कहा कि उन्होंने यह जमीन जुलाई 2025 में सरकार की अनुमति के बाद खरीदी गई थी। उन्होंने बताया कि जमीन का कलेक्टर रेट 1.10 करोड़ रुपये था, जबकि उन्होंने इसे 1.35 करोड़ रुपये में खरीदा। जिस समय जमीन खरीदी तो उन्होंने परमिशन ली और उस दौरान वह मुख्य सचिव भी नहीं थे।
मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने कहा कि विनय शर्मा एडवोकेट हैं उन्होंने पुलिस थाना छोटा शिमला में कोई कंप्लेंट फाइल की है। उसकी कॉपी मैंने आप लोगों को भेजी है। उसमें उसने जो एलिगेशन लगाए हैं कि मैंने एक तीन एकड़ लैंड जो है वो किसी से ब्राइब के तौर पे ली है। यह मोटे तौर पर उसका एलिगेशन है तो इसके विषय में मैं पहले आपको यह बताना चाहता हूं कि जो एक तीन एकड़ लैंड जो मैंने ली है, यह यह लैंड की परमिशन जो उसने कहा है कि सरकार से नहीं ली गई तो मैं आपको बता दूं कि इसकी परमिशन सरकार से जुलाई 2025 में ली गई है। जबकि मैं मुख्य सचिव भी नहीं था और पिछले मुख्य सचिव ने दी है।
मुख्य सचिव ने कहा कि बिजली बोर्ड के चेयरमैन रहते हुए उन्होंने 5 हजार करोड़ रुपए का मुनाफा कमाकर दिया था। उनके कार्यकाल में कई बड़े फैसले पारदर्शिता के साथ लिए गए थे। इसलिए, उनकी कार्यशैली को बदनाम करने के लिए यह साजिश रची जा रही है। उन्होंने बताया कि एक ग्रोवर और पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान के खिलाफ दो एफआईआर पहले ही विजिलेंस में हैं। साथ ही ईडी ने भी इस मामले को टेकअप किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि 130 करोड़ की लागत वाली कुनिहार-नालागढ़ लाइन में नियमों की अवहेलना हुई थी जिनकी जांच चल रही है।