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हिमाचल: वीबी-जी-राम-जी योजना हिमाचल के हित में नहीं, CM सुक्खू ने केंद्र के समक्ष मुद्दा उठाने की कही बात

Wed, 08 Jul 2026 03:16 PM IST
Ankesh Dogra न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Ankesh Dogra Updated Wed, 08 Jul 2026 03:16 PM IST
सार

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि मनरेगा के स्थान पर प्रस्तावित वीबी-जी-राम-जी योजना हिमाचल प्रदेश के लिए लाभकारी नहीं है, क्योंकि इससे राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला केंद्र सरकार के समक्ष उठाया जाएगा। बैठक में पंचायत घरों के लिए 30 करोड़ रुपये, स्वयं सहायता समूहों को सहायता और विभागीय योजनाओं की समीक्षा भी की गई।

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cm sukhu says VB-G RAM G yojana not in himachal interest mgnrega review
बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएम सुक्खू। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के स्थान पर प्रस्तावित 'वीबी-जी-राम-जी योजना' हिमाचल प्रदेश के हित में नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को राज्य सरकार केंद्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाएगी, क्योंकि नई व्यवस्था से प्रदेश पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ेगा।

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बुधवार को ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मनरेगा के तहत परियोजनाओं का पूरा खर्च केंद्र सरकार वहन करती थी, जबकि नई योजना में कुल लागत का 10 प्रतिशत हिस्सा राज्य सरकार को देना होगा। सीमित आर्थिक संसाधनों वाले हिमाचल के लिए यह व्यवस्था व्यावहारिक नहीं है।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए विभाग में रिक्त पदों को प्राथमिकता के आधार पर भरा जा रहा है। आने वाले समय में नई भर्तियां भी की जाएंगी, ताकि योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
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उन्होंने बताया कि राज्य सरकार निर्माणाधीन पंचायत घरों को पूरा करने के लिए 30 करोड़ रुपये उपलब्ध कराएगी। इसके अलावा ऊना में बन रहे जिला पंचायत संसाधन केंद्र के निर्माण कार्य के लिए भी अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए कहा कि सरकार उनकी आय बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही है। अब तक 310 स्वयं सहायता समूहों को 65.56 लाख रुपये की ऋण सहायता प्रदान की जा चुकी है। उनके उत्पादों की बेहतर मार्केटिंग के लिए शिमला में 'हिमाचल हाट' बनाया जा रहा है। इसके अलावा पंडोह और कुल्लू में नए शोरूम स्थापित किए जा रहे हैं, जबकि धर्मशाला में ऐसा केंद्र पहले से संचालित है। उन्होंने कहा कि स्वयं सहायता समूहों को स्वरोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराने के लिए फूड वैन भी उपलब्ध कराई गई हैं और भविष्य में इनकी संख्या बढ़ाई जाएगी।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि विभाग की सभी प्रमुख योजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए और उन्हें मुख्यमंत्री डैशबोर्ड से जोड़ा जाए, ताकि उनकी ऑनलाइन निगरानी प्रभावी ढंग से हो सके। बैठक में ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह, विभाग के सचिव सी. पालरासु, मुख्यमंत्री के सचिव आशीष सिंहमार, विभागीय निदेशक राघव शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
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