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Shimla News: क्रिप्टो करंसी और सोसायटी में दोगुना मुनाफा कमाने के झांसे में करोड़ों रुपये लुटा गए लोग
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खास खबर
शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर भी लोगों को बनाया जा रहा ठगी का शिकार, करोड़ों ऐंठकर आरोपी हो जाते हैं फरार
पुलिस, सीआईडी और ईडी कर रही मामलों की जांच
2500 करोड़ रुपये से अधिक है क्रिप्टो करंसी घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दोगुना मुनाफे के लालच में आकर जिले के हजारों लोग अब तक क्रिप्टो करंसी, ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी और शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर फर्जीवाड़े का शिकार हो चुके हैं। ठगों के ऐसे लालच में फंसकर लोग अपनी उम्रभर की कमाई गंवा रहे हैं। इसके बाद आरोपी फरार हो जाते हैं और पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच करती रह जाती हैं।
जांच की तह खुलने के बाद पता चलता है कि संबंधित ऑनलाइन और अन्य फर्मों ने न ही नियमों के तहत पंजीकरण करवाया था और न ही उनकी इतनी संपत्तियां हैं, जिनसे लोगों के निवेश किए पैसे की भरपाई की जा सके। हाल ही में सामने आए मामले में क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर लोगों से 50 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आशंका है कि जब पुलिस इस केस की जांच को आगे बढ़ाएगी तो और लोग भी सामने आएंगे जिनसे इस तरह से धोखाधड़ी की गई है। इसी तरह से प्रदेश में 2500 करोड़ रुपये तक का बड़ा क्रिप्टो करंसी घोटाला सामने आ चुका है।
जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले में 80,000 से 1 लाख से ज्यादा निवेशक प्रभावित हुए हैं। यह मामला वर्ष 20018 से 2023 के बीच का बताया जा रहा है। इस घोटाले में फर्जी क्रिप्टो करंसी बनाई गई। मल्टी लेवल मार्केटिंग मॉडल बनाकर निवेशकों को नए लोगों को लाने पर कमीशन का लालच दिया गया। खास बात यह थी कि सभी क्रिप्टो करंसी और अन्य घोटालों में हाई रिटर्न का लालच दिया था।
फाउंडेशन बनाकर चैरिटेबल संगठन के नाम पर लोगों को फंसाया गया। इसमें भूमि अधिग्रहण से मुआवजा पाने वालों, सरकारी कर्मचारियों और यहां तक कि पुलिस कर्मियों को भी टारगेट किया गया। एजेंट को विदेश की यात्राएं और लग्जरी उपहार देकर फंसाया गया। पुलिस ने अपनी कार्रवाई में एसआईटी का गठन कर इसमें 80 से ज्यादा गिरफ्तारियां कीं। इसमें करीब 13 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही 37 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसके अलावा प्रदेश में फेक ट्रेडिंग एप और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये स्टॉक मार्केट स्कैम भी बढ़ रहे हैं। इसमें भी लोगों को शेयर मार्केट में निवेश करके अच्छा खासा मुनाफा कमाने का झांसा दिया जाता है। इसके नाम पर फर्जी एप तैयार करके लोगों से पैसा ऐंठा जाता है। इसमें पहले लोगों को छोटे रिटर्न देकर भरोसा जाता जाता है और फिर बड़ा निवेश करवाया जाता है। इसके बाद लोगों की करोड़ों की राशि देकर आरोपी फरार हो जाते हैं।
ह्यूमन वेलफेयर सोसायटी में
ढाई सौ करोड़ की धोखाधड़ी
प्रदेश में इससे पहले ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव लिमिटेड सोसायटी में निवेश के नाम पर प्रदेश के लोगों से करीब ढाई सौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है। हाल ही में सीआईडी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू की है। इस मामले में जिला शिमला समेत कई जिलों के हजारों लोगों के साथ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की बात सामने आ चुकी है। इस झांसे में आकर लोगों ने अपनी पेंशन, एफडी समेत जिंदगीभर की पूंजी डूबा दी। जिला शिमला में ही सोसायटी में निवेश के नाम पर 50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। शिमला, सोलन, ऊना, सिरमौर, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर समेत आठ जिलों में सुविधा केंद्रों के जरिये लोगों के साथ इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। मामला उस समय सामने आया जब सोसायटी की वेबसाइट बंद हो गई। निवेशकों में सरकारी अफसर, कर्मचारी, कारोबारी, पेंशनर और गृहिणी सहित विभिन्न तबके के लोग शामिल हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
केवल सेबी/आरबीआई से रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।
क्रिप्टो में गारंटीड रिटर्न या एमएलएम वाला कोई भी प्लान पोंजी स्कीम हो सकता है।
अगर गलत निवेश में फंसे हैं तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
किसी भी निवेश करने वाली कंपनी की अच्छी तरह जांच कर लें और प्रशासन से पता कर लें।
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शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर भी लोगों को बनाया जा रहा ठगी का शिकार, करोड़ों ऐंठकर आरोपी हो जाते हैं फरार
पुलिस, सीआईडी और ईडी कर रही मामलों की जांच
2500 करोड़ रुपये से अधिक है क्रिप्टो करंसी घोटाला
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। दोगुना मुनाफे के लालच में आकर जिले के हजारों लोग अब तक क्रिप्टो करंसी, ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव सोसायटी और शेयर मार्केट में निवेश के नाम पर फर्जीवाड़े का शिकार हो चुके हैं। ठगों के ऐसे लालच में फंसकर लोग अपनी उम्रभर की कमाई गंवा रहे हैं। इसके बाद आरोपी फरार हो जाते हैं और पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच करती रह जाती हैं।
जांच की तह खुलने के बाद पता चलता है कि संबंधित ऑनलाइन और अन्य फर्मों ने न ही नियमों के तहत पंजीकरण करवाया था और न ही उनकी इतनी संपत्तियां हैं, जिनसे लोगों के निवेश किए पैसे की भरपाई की जा सके। हाल ही में सामने आए मामले में क्रिप्टो करंसी में निवेश के नाम पर लोगों से 50 लाख से अधिक की धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आशंका है कि जब पुलिस इस केस की जांच को आगे बढ़ाएगी तो और लोग भी सामने आएंगे जिनसे इस तरह से धोखाधड़ी की गई है। इसी तरह से प्रदेश में 2500 करोड़ रुपये तक का बड़ा क्रिप्टो करंसी घोटाला सामने आ चुका है।
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जांच में चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि इस घोटाले में 80,000 से 1 लाख से ज्यादा निवेशक प्रभावित हुए हैं। यह मामला वर्ष 20018 से 2023 के बीच का बताया जा रहा है। इस घोटाले में फर्जी क्रिप्टो करंसी बनाई गई। मल्टी लेवल मार्केटिंग मॉडल बनाकर निवेशकों को नए लोगों को लाने पर कमीशन का लालच दिया गया। खास बात यह थी कि सभी क्रिप्टो करंसी और अन्य घोटालों में हाई रिटर्न का लालच दिया था।
फाउंडेशन बनाकर चैरिटेबल संगठन के नाम पर लोगों को फंसाया गया। इसमें भूमि अधिग्रहण से मुआवजा पाने वालों, सरकारी कर्मचारियों और यहां तक कि पुलिस कर्मियों को भी टारगेट किया गया। एजेंट को विदेश की यात्राएं और लग्जरी उपहार देकर फंसाया गया। पुलिस ने अपनी कार्रवाई में एसआईटी का गठन कर इसमें 80 से ज्यादा गिरफ्तारियां कीं। इसमें करीब 13 मामले दर्ज किए गए। इसके साथ ही 37 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई। इसके अलावा प्रदेश में फेक ट्रेडिंग एप और व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये स्टॉक मार्केट स्कैम भी बढ़ रहे हैं। इसमें भी लोगों को शेयर मार्केट में निवेश करके अच्छा खासा मुनाफा कमाने का झांसा दिया जाता है। इसके नाम पर फर्जी एप तैयार करके लोगों से पैसा ऐंठा जाता है। इसमें पहले लोगों को छोटे रिटर्न देकर भरोसा जाता जाता है और फिर बड़ा निवेश करवाया जाता है। इसके बाद लोगों की करोड़ों की राशि देकर आरोपी फरार हो जाते हैं।
ह्यूमन वेलफेयर सोसायटी में
ढाई सौ करोड़ की धोखाधड़ी
प्रदेश में इससे पहले ह्यूमन वेलफेयर क्रेडिट एंड थ्रिफ्ट को-ऑपरेटिव लिमिटेड सोसायटी में निवेश के नाम पर प्रदेश के लोगों से करीब ढाई सौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आ चुका है। हाल ही में सीआईडी ने इस मामले में एफआईआर दर्ज कर छानबीन शुरू की है। इस मामले में जिला शिमला समेत कई जिलों के हजारों लोगों के साथ निवेश के नाम पर धोखाधड़ी की बात सामने आ चुकी है। इस झांसे में आकर लोगों ने अपनी पेंशन, एफडी समेत जिंदगीभर की पूंजी डूबा दी। जिला शिमला में ही सोसायटी में निवेश के नाम पर 50 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की बात सामने आई है। शिमला, सोलन, ऊना, सिरमौर, बिलासपुर, मंडी, कांगड़ा और हमीरपुर समेत आठ जिलों में सुविधा केंद्रों के जरिये लोगों के साथ इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया गया। मामला उस समय सामने आया जब सोसायटी की वेबसाइट बंद हो गई। निवेशकों में सरकारी अफसर, कर्मचारी, कारोबारी, पेंशनर और गृहिणी सहित विभिन्न तबके के लोग शामिल हैं।
विशेषज्ञों की सलाह
केवल सेबी/आरबीआई से रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।
क्रिप्टो में गारंटीड रिटर्न या एमएलएम वाला कोई भी प्लान पोंजी स्कीम हो सकता है।
अगर गलत निवेश में फंसे हैं तो तुरंत नजदीकी पुलिस थाने या साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर शिकायत करें।
किसी भी निवेश करने वाली कंपनी की अच्छी तरह जांच कर लें और प्रशासन से पता कर लें।