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Dharamshala: तिब्बती विद्रोह दिवस की स्मृति में निकाला शांति मार्च, दलाई लामा से मिला प्रतिनिधिमंडल

अमर उजाला ब्यूरो, धर्मशाला। Published by: Krishan Singh Updated Tue, 10 Mar 2026 05:51 PM IST
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सार

 कांगड़ा जिले में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों ने मंगलवार को तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह की 67वीं वर्षगांठ मनाई। 

Dharamshala: Peace march held in Dharamshala to commemorate Tibetan Uprising Day
दलाई लामा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। - फोटो : संवाद
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में रहने वाले तिब्बती समुदाय के लोगों ने मंगलवार को तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह की 67वीं वर्षगांठ मनाई। इस दौरान सैकड़ों तिब्बतियों ने मैक्लोडगंज से कचहरी चौक धर्मशाला तक शांति मार्च निकाला और तिब्बत की आजादी के नारे लगाए। इससे पूर्व मैक्लोडगंज में कार्यक्रम में निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रधानमंत्री (सिक्योंग) पेंपा सेरिंग, संसद के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, मंत्रिपरिषद के सदस्यों समेत देश-विदेश से आए विभिन्न प्रतिनिधियों ने तिब्बती आंदोलन का समर्थन करते हुए तिब्बत की आजादी का संकल्प दोहराया। मंत्री परिषद ने कहा कि चीन सरकार लंबे समय से तिब्बत के पर्यावरण और उसके लोगों की विशिष्ट पहचान को समाप्त करने में जुटी है। दलाई लामा के पुनर्जन्म के संबंध में चीन अपने दुर्भावनापूर्ण एजेंडा को आगे बढ़ा रहा है। प्रार्थना करते हैं कि तिब्बत के चौदहवें दलाई लामा युगों तक जीवित रहें और चार महान प्रतिबद्धताओं सहित उनकी सभी पवित्र आकांक्षाओं की सहज पूर्ति हो।

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दलाई लामा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की
तिब्बती राष्ट्रीय विद्रोह दिवस की 67वीं वर्षगांठ के अवसर पर धर्मशाला स्थित अपने आवास पर 14वें दलाई लामा ने अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। प्रमुख सदस्यों में जर्मनी की संसद के सदस्य माइकल ब्रांड, तिब्बत के लिए अंतरराष्ट्रीय अभियान (जर्मनी) के कार्यकारी निदेशक काई मूलर, यूरोपीय संसद के पूर्व अध्यक्ष हांस-गर्ट पोटरिंग, जर्मनी के ब्रेमेन राज्य की संसद की सदस्य वीबके विंटर, कोनराड एडेनावर प्रतिष्ठान के भारत कार्यालय के निदेशक एड्रियन हाक समेत अन्य मौजूद रहे।

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अमेरिकी सांसदों ने पत्र लिख तिब्बत पर मजबूत नीति की उठाई मांग
अमेरिकी संसद के कई सदस्यों ने तिब्बत से संबंधित अमेरिकी नीति को मजबूत करने और उसे प्रभावी रूप से लागू करने के लिए सुझाव दिए हैं। यह पत्र अमेरिकी संसद के कई सदस्यों की ओर से हस्ताक्षरित है। धर्मशाला स्थित निर्वासित तिब्बत सरकार के प्रतिनिधियों ने इस पत्र को विभिन्न वेबसाइट के माध्यम से साझा किया है। पत्र में सांसदों ने कहा कि अमेरिका को तिब्बत से संबंधित मौजूदा कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करते हुए तिब्बती लोगों के अधिकारों की रक्षा और चीन-तिब्बत विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के प्रयासों को आगे बढ़ाना चाहिए। चीन-तिब्बत विवाद के समाधान का सबसे व्यावहारिक मार्ग यही संवाद है। सांसदों ने कहा कि तिब्बती नीति और समर्थन अधिनियम के अनुसार अगले दलाई लामा के चयन का निर्णय पूरी तरह धार्मिक विषय है और यह केवल दलाई लामा, तिब्बती बौद्ध समुदाय और तिब्बती जनता का अधिकार है। ब्यूरो

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