Shimla: पहली बार विधानसभा पहुंचे विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, सदन में बैठकर हुए भावविभोर
सरकारी स्कूलों के विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का एक दल शुक्रवार को एक्सपोजर विजिट के लिए चंडीगढ़, अमृतसर और बाघा बॉर्डर के लिए रवाना हुआ।
विस्तार
हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अध्ययनरत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए शुक्रवार का दिन अविस्मरणीय बन गया। ये बच्चे पहली बार लोकतंत्र के मंदिर कहे जाने वाले प्रदेश विधानसभा पहुंचे, जहां उन्होंने सदन की विधायी कार्यप्रणाली को नजदीक से देखा और समझा। बच्चों ने स्वयं विधायक बनकर सदन में बैठकर कार्यवाही का अनुभव किया। यह अनुभव उनके लिए अत्यंत प्रेरणादायक और अनूठा रहा। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने प्रदेश विधानसभा परिसर से इन बच्चों को एक्सपोजर विजिट पर रवाना किया। इस दौरान लाहौल-स्पीति की विधायक अनुराधा राणा, समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा, उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत शर्मा, स्कूली शिक्षा निदेशक आशीष कोहली, विधानसभा के अधिकारी, समग्र शिक्षा के अधिकारी व कोऑर्डिनेटर, शिक्षक तथा स्पेशल एजुकेटर उपस्थित रहे।
बच्चे हमारे देश का भविष्य: शिक्षा मंत्री
इस मौके पर शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने बच्चों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ये बच्चे हमारे देश का भविष्य हैं। इन बच्चों की सोच को व्यापक बनाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना सरकार का दायित्व है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में ये बच्चे समाज और राष्ट्र के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और सरकार उन्हें हर संभव सुविधा और अवसर उपलब्ध कराने के लिए संकल्पबद्ध है। उन्होंने बताया कि सरकार द्वारा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए स्कूलों में स्पेशल एजुकेटर तैनात किए गए हैं और आगे भी इनकी भर्तियां की जाएंगी, ताकि इन बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल सके। साथ ही, बच्चों को पढ़ाने के लिए नई तकनीकों को अपनाने की दिशा में भी निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।
लोकतांत्रिक मूल्यों से परिचित कराने की पहल
शिक्षा मंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश विधानसभा अपनी गरिमामयी परंपराओं और उच्च लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखती है। इसी सदन में मंत्री और विधायक प्रदेश के विकास तथा जनहित से जुड़े विषयों पर व्यापक मंथन करते हैं। ऐसे में बच्चों को विधानसभा की कार्यप्रणाली से अवगत कराना एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिला है। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी स्कूली बच्चों को इसी प्रकार विधानसभा की कार्यवाहियों और प्रक्रियाओं से परिचित कराया जाता रहेगा।
नई तकनीक और प्रशिक्षण पर विशेष फोकस: राजेश शर्मा
समग्र शिक्षा निदेशक राजेश शर्मा ने एक्सपोजर विजिट की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि इस भ्रमण कार्यक्रम के अंतर्गत बच्चे चंडीगढ़, अमृतसर और वाघा बॉर्डर जैसे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रीय महत्व के स्थलों का भ्रमण करेंगे। वाघा बॉर्डर पर होने वाली रिट्रीट सेरेमनी को देखने का अवसर भी बच्चों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि समग्र शिक्षा राज्य सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के सशक्तीकरण के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। तकनीक आधारित शिक्षा, विशेष प्रशिक्षण और स्पेशल एजुकेटर्स की नियुक्ति के माध्यम से इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। राजेश शर्मा ने कहा कि प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है ताकि बच्चे आधुनिक तकनीक का लाभ उठा सकें। तकनीकी संस्थानों की सहायता से विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए नई तकनीकों को अपनाया जा रहा है तथा स्पेशल एजुकेटर्स को नई तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, जिससे शिक्षा में आने वाले अंतर को कम किया जा सके। राजेश शर्मा ने कहा कि समग्र शिक्षा के तहत विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को थैरेपी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए जोनल स्तर पर अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त मोबाइल रिसोर्स सेंटर (विशेष वाहन) शुरू किए जाएंगे।
बच्चों ने पूछे सवाल, जाना विधानसभा का इतिहास
इस अवसर पर विधानसभा के उप सचिव जितेंद्र सिंह कंवर ने बच्चों को हिमाचल प्रदेश विधानसभा के समृद्ध इतिहास, कार्यप्रणाली, सदन की कार्यवाही, विधानसभा अध्यक्ष की महत्वपूर्ण भूमिका तथा विधानसभा सदस्यों के अधिकारों और दायित्वों की जानकारी दी। बच्चों ने उत्साहपूर्वक प्रश्न पूछे और लोकतांत्रिक व्यवस्था को गहराई से समझा। इस कार्यक्रम के साथ ही 156 सदस्यों का दल आज शिमला से एक्सपोजर विजिट पर रवाना हो गया। इस दल में 96 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे, स्पेशल एजुकेटर्स, समावेशी शिक्षा अधिकारी तथा अन्य सहयोगी शामिल हैं। यात्रा के प्रत्येक पड़ाव पर समावेशी शिक्षा की स्टेट कोऑर्डिनेटर प्रतिभा बाली तथा स्पेशल एजुकेटर्स बच्चों का मार्गदर्शन करेंगे। आज बच्चे चंडीगढ़ पहुंचेंगे, जहां वे छतबीड़ ज़ू का भ्रमण करेंगे। चंडीगढ़ में उनके रात्रि विश्राम की व्यवस्था की गई है। 17 जनवरी को बच्चे चंडीगढ़ से अमृतसर के लिए रवाना होंगे और वहां से वाघा बॉर्डर जाएंगे, जहां वे भारत–पाकिस्तान सीमा पर होने वाली शाम की रिट्रीट सेरेमनी देखेंगे। 18 जनवरी को बच्चे अमृतसर में स्वर्ण मंदिर के दर्शन करेंगे। इसके बाद बच्चे 18 जनवरी को ही अपने अनुभवों के साथ शिमला लौटेंगे।