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Electricity Banking: हिमाचल से पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग पर बिजली बंद, बोर्ड ने पुरानी व्यवस्था पर लगाई ब्रेक

अनिमेष काैशल, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 22 May 2026 10:03 AM IST
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सार

 पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग पर बिजली देना बंद कर दिया है। राज्य सरकार से 1800 मिलियन यूनिट बिजली सप्लाई न मिलने पर बोर्ड ने पुरानी व्यवस्था पर ब्रेक लगा दी है। 

Electricity Supply to Neighboring States Halted on 'Banking' Basis; Board Puts the Brakes on the Old System
बिजली सप्लाई। - फोटो : amar ujala
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश ने पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग पर बिजली देना बंद कर दिया है। राज्य सरकार से 1800 मिलियन यूनिट बिजली सप्लाई न मिलने पर बोर्ड ने पुरानी व्यवस्था पर ब्रेक लगा दी है। सरकार ने अब अपने हिस्से की बिजली को खुले बाजार में बेचने का फैसला लिया है। पहले बोर्ड को सस्ते दामों पर सरकार अपना शेयर देती थी और बोर्ड इस बिजली सप्लाई को गर्मियों में बैंकिंग पर अन्य राज्यों को देकर सर्दियों में वापस लेता था। अब बंद हुई इस व्यवस्था के चलते सर्दियों के मौसम में इस साल से बोर्ड को भी महंगी दरों पर बाजार से बिजली खरीद करनी होगी।

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पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग आधार पर दी जाती रही है अतिरिक्त बिजली

हिमाचल की ओर से बीते कई वर्षों से गर्मियों में अतिरिक्त बिजली पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और अन्य पड़ोसी राज्यों को बैंकिंग आधार पर दी जाती रही है। प्रदेश में इस दौरान बिजली की अधिक मांग नहीं होती, जबकि उत्पादन अधिक होता है। बैंकिंग सिस्टम के तहत हिमाचल गर्मियों में अतिरिक्त बिजली अन्य राज्यों को देकर उनसे सर्दियों में जब प्रदेश में उत्पादन कम हो जाता है और मांग बढ़ती है, तब वापस लेता था।

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बोर्ड को सरकार से सस्ती बिजली नहीं मिलेगी

राज्य सरकार के बिजली शेयर को बोर्ड 3.50 रुपये प्रति यूनिट की दर से खरीदता था। अब सरकार ने बिजली परियोजनाओं से मिलने वाली निशुल्क बिजली को खुले बाजार में बेचकर राजस्व कमाने का फैसला लिया है। इस नई व्यवस्था के तहत बोर्ड को अब सरकार से सस्ती बिजली नहीं मिलेगी। ऐसे में बोर्ड ने बैंकिंग को बंद करने का फैसला लिया है।

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गर्मी बढ़ते ही उत्पादन में आया उछाल

प्रदेश में तापमान बढ़ने और बर्फ पिघलने से जल विद्युत परियोजनाओं में पानी की उपलब्धता बढ़ गई है। इसके चलते बिजली उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। इन दिनों प्रदेश में रोजाना करीब 400 लाख यूनिट बिजली उत्पादन हो रहा है।

यह है बैंकिंग व्यवस्था

बिजली बैंकिंग ऐसी व्यवस्था होती है, जिसमें एक राज्य अतिरिक्त उत्पादन के समय दूसरे राज्य को बिजली देता है। बाद में जरूरत पड़ने पर उतनी ही मात्रा या तय शर्तों के अनुसार बिजली वापस लेता है। हिमाचल जैसे जल विद्युत आधारित राज्यों के लिए यह व्यवस्था लंबे समय तक फायदेमंद मानी जाती रही है।

सर्दियों में बढ़ सकती है चुनौती

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि हिमाचल का जल विद्युत उत्पादन मौसम पर निर्भर रहता है। नवंबर से फरवरी के दौरान जलस्तर कम होने से उत्पादन में भारी गिरावट आती है। ऐसे में बैंकिंग व्यवस्था समाप्त होने से बिजली बोर्ड को सर्दियों में ऊंची कीमत पर बिजली खरीदनी पड़ सकती है।

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