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हिमाचल: फर्जी कृषक बनकर खरीदी 100 कनाल से ज्यादा जमीन, गगल एयरपोर्ट के पास करोड़ों के भूमि घोटाले में केस दर्ज
Tue, 21 Jul 2026 09:42 AM IST
Ankesh Dogra
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Tue, 21 Jul 2026 09:42 AM IST
सार
कांगड़ा के गगल एयरपोर्ट के आसपास करोड़ों रुपये की कथित अवैध जमीन खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। विजिलेंस जांच में आरोप है कि फर्जी कृषक प्रमाणपत्र बनवाकर 100 कनाल से अधिक कृषि भूमि खरीदी गई और बाद में उसे बेचकर करोड़ों का लाभ कमाया गया। मामले में तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
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गगल एयरपोर्ट
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
कांगड़ा जिले के गगल एयरपोर्ट के आसपास कथित रूप से धारा 118 का उल्लंघन करते हुए करोड़ों की जमीन की अवैध खरीद-फरोख्त का खुलासा हुआ है। विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने तत्कालीन राजस्व अधिकारियों के साथ मिल फर्जी कृषि प्रमाणपत्र बनवाकर अपने और परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर 100 कनाल से अधिक जमीन खरीदी और उसे बेच करोड़ों का मुनाफा कमाया।
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राज्य सरकार ने गगल हवाई अड्डे के आसपास बेनामी और अवैध जमीन सौदों की जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की थी, जिसकी जांच में अवैध भूमि की खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है। जांच में मिले साक्ष्यों और स्टेटस रिपोर्ट के आधार पर विजिलेंस ने बीएनएस की विभिन्न धाराओं में केस दर्ज कर कार्रवाई शुरू कर दी है।
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जांच में पाया गया कि वर्ष 1998 में कांगड़ा में रहने वाले एक गैर कृषक व्यक्ति ने धारा 118(2)(डीडी) के तहत कुछ भूमि खरीदी थी। भूमि अभिलेखों में उसे गैर कृषक दर्शाने संबंधित टिप्पणी दर्ज करना अनिवार्य था। तत्कालीन राजस्व अधिकारियों ने जमाबंदी और म्यूटेशन रिकॉर्ड में कृषक का दर्जा दिखाने वाली अनिवार्य एंट्री जानबूझकर छोड़ दी। इसका फायदा उठाते हुए आरोपी ने समय-समय पर बिना धारा 118 की अनुमति के खुद 61.84 कनाल कृषि भूमि खरीद ली, जबकि पत्नी ने 44.43 कनाल भूमि खरीदी। आरोप है कि दोनों ने फर्जी कृषक प्रमाणपत्र बनवाकर इनका जमीन खरीद में इस्तेमाल किया।
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अवैध कमाई के स्रोतों का भी पता कर रही विजिलेंस
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध भूमि सौदों से प्राप्त जमीन को बेचकर करोड़ों का फायदा भी कमाया। विभिन्न तरीकों से अन्य लोगों के नाम भूमि ट्रांसफर की गई। विजिलेंस अब पूरे मामले की जांच कर अवैध कमाई के स्रोतों का भी पता कर रही है। मामले में तीनों आरोपियों के अलावा राजस्व विभाग के तत्कालीन पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सब रजिस्ट्रार समेत अन्य कई सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।
जांच में सामने आया है कि आरोपियों ने अवैध भूमि सौदों से प्राप्त जमीन को बेचकर करोड़ों का फायदा भी कमाया। विभिन्न तरीकों से अन्य लोगों के नाम भूमि ट्रांसफर की गई। विजिलेंस अब पूरे मामले की जांच कर अवैध कमाई के स्रोतों का भी पता कर रही है। मामले में तीनों आरोपियों के अलावा राजस्व विभाग के तत्कालीन पटवारी, कानूनगो, तहसीलदार, नायब तहसीलदार और सब रजिस्ट्रार समेत अन्य कई सरकारी अधिकारियों की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है।