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एचपीयू और नौणी विवि में फीस कम करें : एबीवीपी
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सभी कॉलेज प्राचार्यों को सौंपे ज्ञापन
छात्र संघ चुनाव बहाल करने का भी किया आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में 25 से 30 और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में 50 से 60 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि को एबीवीपी ने वापस लेने की मांग की है। इसके साथ छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग भी उठाई।
छात्रों ने राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की प्राचार्य अनुरीत सक्सेना, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा के प्राचार्य गोपाल शर्मा और राजकीय महाविद्यालय संजौली की प्राचार्य भारती बांगरा को एबीवीपी ने ज्ञापन सौंपे। छात्रों ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ाई जा रही फीस का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उच्च शिक्षा पहले ही महंगी होती जा रही है। ऐसे में 25 से 60 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि हजारों विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनेगी। छात्रों ने सरकार से इस निर्णय को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
ज्ञापन के माध्यम से सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन तक छात्रों की मांगें पहुंचाने का आग्रह किया गया। छात्रों ने कहा कि प्रदेश में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं जिससे विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि छात्र हितों की प्रभावी आवाज सुनिश्चित करने के लिए छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल किए जाएं। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई और छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
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छात्र संघ चुनाव बहाल करने का भी किया आग्रह
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय शिमला में 25 से 30 और डॉ. यशवंत सिंह परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी में 50 से 60 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि को एबीवीपी ने वापस लेने की मांग की है। इसके साथ छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग भी उठाई।
छात्रों ने राजकीय कन्या महाविद्यालय शिमला की प्राचार्य अनुरीत सक्सेना, राजीव गांधी राजकीय महाविद्यालय कोटशेरा के प्राचार्य गोपाल शर्मा और राजकीय महाविद्यालय संजौली की प्राचार्य भारती बांगरा को एबीवीपी ने ज्ञापन सौंपे। छात्रों ने कहा कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों में लगातार बढ़ाई जा रही फीस का सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। उनका कहना था कि आर्थिक रूप से कमजोर और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए उच्च शिक्षा पहले ही महंगी होती जा रही है। ऐसे में 25 से 60 प्रतिशत तक की फीस वृद्धि हजारों विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त आर्थिक बोझ बनेगी। छात्रों ने सरकार से इस निर्णय को तुरंत प्रभाव से वापस लेने की मांग की।
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ज्ञापन के माध्यम से सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन तक छात्रों की मांगें पहुंचाने का आग्रह किया गया। छात्रों ने कहा कि प्रदेश में छात्र संघ चुनाव लंबे समय से बंद हैं जिससे विद्यार्थियों को लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व का अवसर नहीं मिल रहा। उन्होंने मांग की कि छात्र हितों की प्रभावी आवाज सुनिश्चित करने के लिए छात्र संघ चुनाव तत्काल बहाल किए जाएं। छात्रों ने चेतावनी दी कि यदि फीस वृद्धि वापस नहीं ली गई और छात्र संघ चुनाव बहाल नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
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