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Shimla News: सचिवालय के पास सूख गए हरे पेड़, व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
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तीन पेड़ पूरी तरह सूखे, आठ सूखना शुरू
पेड़ों के आसपास कंकरीट बिछाने के लगे हैं आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में सचिवालय परिसर से सटे क्षेत्र में कई हरे पेड़ सूख गए हैं। इसके अलावा कई पेड़ सूखने की कगार पर हैं।
लोगों का कहना है कि इन पेड़ों के चारों ओर कंकरीट की दीवारें लगाई गईं हैं। इसके चलते इनकी जड़ों में पानी नहीं जा रहा, इससे पेड़ सूख रहे हैं। इनमें देवदार के कई बड़े पेड़ भी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर प्रदेशभर में अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण की बात करती है तो दूसरी ओर सचिवालय परिसर की बगल में ही कई हरे पेड़ सूख रहे हैं। इस क्षेत्र में 50 के करीब देवदार और अन्य पेड़ हैं जिनमें से तीन पूरी तरह सूख चुके हैं। इनकी जड़ें, टहनियां और पत्ते सूख चुके हैं। आठ पेड़ ऐसे हैं जो सूखना शुरू हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस क्षेत्र में कंकरीट बिछी होने और सीमेंट के डंगे लगाने से पेड़ों तक पानी की निकासी रुकी हुई है।
लोगों का कहना है कि यहां सूखे पेड़ों के गिरने का खतरा भी लगातार बना हुआ। वहीं कई पेड़ सूखना शुरू हो गए हैं जिन्हें बचाया जाना जरूरी है। इस स्थान पर ज्यादातर पेड़ ऐसे हैं जिनके आसपास कंकरीट बिछा दी है या सीमेंट के डंगे चिन दिए हैं। इनमें से कुछ पेड़ ऐसे भी हैं जो सूखे हैं और उनमें लोहे के तार बांधे गए हैं। इसकी वजह से पेड़ों की जड़ों को पानी नहीं मिल रहा है और पेड़ सूख रहे हैं। लोग आशंका जता रहे हैं कि यहां सभी पेड़ सूख सकते हैं। लोगों का कहना है कि यहां देवदार और बान के पेड़ हैं जिन्हें बचाया जाना चाहिए और वन विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
यह हैं नियम, लागू कौन करेगा
नियमानुसार किसी भी हरे पेड़ के आसपास कंकरीट नहीं बिछा सकते। पेड़ से एक मीटर दूर ही कंकरीट बिछा सकते हैं। नगर निगम नियमों के अनुसार भवन निर्माण भी हरे पेड़ों से करीब एक मीटर की दूरी होना अनिवार्य है। इसके बाद ही भवन निर्माण की मंजूरी मिलती है। हालांकि यह नियम धरातल पर लागू नहीं हो रहे। वन विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।
कोट
अभी इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो मौके पर जाकर चेक किया जाएगा। पेड़ों की जड़ों के आसपास यदि कंकरीट बिछाया है और इस कारण पेड़ सूखे हैं तो इसे हटाया जाएगा।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला
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पेड़ों के आसपास कंकरीट बिछाने के लगे हैं आरोप
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। राजधानी में सचिवालय परिसर से सटे क्षेत्र में कई हरे पेड़ सूख गए हैं। इसके अलावा कई पेड़ सूखने की कगार पर हैं।
लोगों का कहना है कि इन पेड़ों के चारों ओर कंकरीट की दीवारें लगाई गईं हैं। इसके चलते इनकी जड़ों में पानी नहीं जा रहा, इससे पेड़ सूख रहे हैं। इनमें देवदार के कई बड़े पेड़ भी शामिल हैं। लोगों का कहना है कि सरकार एक ओर प्रदेशभर में अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण की बात करती है तो दूसरी ओर सचिवालय परिसर की बगल में ही कई हरे पेड़ सूख रहे हैं। इस क्षेत्र में 50 के करीब देवदार और अन्य पेड़ हैं जिनमें से तीन पूरी तरह सूख चुके हैं। इनकी जड़ें, टहनियां और पत्ते सूख चुके हैं। आठ पेड़ ऐसे हैं जो सूखना शुरू हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि इस क्षेत्र में कंकरीट बिछी होने और सीमेंट के डंगे लगाने से पेड़ों तक पानी की निकासी रुकी हुई है।
लोगों का कहना है कि यहां सूखे पेड़ों के गिरने का खतरा भी लगातार बना हुआ। वहीं कई पेड़ सूखना शुरू हो गए हैं जिन्हें बचाया जाना जरूरी है। इस स्थान पर ज्यादातर पेड़ ऐसे हैं जिनके आसपास कंकरीट बिछा दी है या सीमेंट के डंगे चिन दिए हैं। इनमें से कुछ पेड़ ऐसे भी हैं जो सूखे हैं और उनमें लोहे के तार बांधे गए हैं। इसकी वजह से पेड़ों की जड़ों को पानी नहीं मिल रहा है और पेड़ सूख रहे हैं। लोग आशंका जता रहे हैं कि यहां सभी पेड़ सूख सकते हैं। लोगों का कहना है कि यहां देवदार और बान के पेड़ हैं जिन्हें बचाया जाना चाहिए और वन विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए।
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यह हैं नियम, लागू कौन करेगा
नियमानुसार किसी भी हरे पेड़ के आसपास कंकरीट नहीं बिछा सकते। पेड़ से एक मीटर दूर ही कंकरीट बिछा सकते हैं। नगर निगम नियमों के अनुसार भवन निर्माण भी हरे पेड़ों से करीब एक मीटर की दूरी होना अनिवार्य है। इसके बाद ही भवन निर्माण की मंजूरी मिलती है। हालांकि यह नियम धरातल पर लागू नहीं हो रहे। वन विभाग कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहा है।
कोट
अभी इसकी जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो मौके पर जाकर चेक किया जाएगा। पेड़ों की जड़ों के आसपास यदि कंकरीट बिछाया है और इस कारण पेड़ सूखे हैं तो इसे हटाया जाएगा।
-सुरेंद्र चौहान, महापौर नगर निगम शिमला