Harish Rana Death: 13 साल का मौन... और खामोश हो गईं सांसें, हरीश राणा के निधन से पलेटा में शोक की लहर
हरीश राणा का मंगलवार को करीब 2:00 बजे दिल्ली के एम्स अस्पताल में निधन हो गया।
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पिछले 13 वर्षों से एक गहरी और दर्दनाक खामोशी के बीच जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हरीश राणा की सांसें मंगलवार को हमेशा के लिए थम गईं। दिल्ली के एम्स अस्पताल में दोपहर करीब 2 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। हरीश के निधन की खबर जैसे ही जयसिंहपुर उपमंडल की ग्राम पंचायत सरी के उनके पैतृक गांव प्लेटा पहुंची तो शोक की लहर दौड़ गई। भले ही हरीश का परिवार लंबे समय से प्रदेश से बाहर था, लेकिन गांव की मिट्टी से जुड़ाव और 13 साल के इस लंबे संघर्ष ने हर ग्रामीण की आंख नम कर दी है।
सरी पंचायत की पूर्व प्रधान रीमा कुमारी ने कहा कि भले ही हरीश परिवार गाजियाबाद रहता था, लेकिन उनके पूर्वजों की जड़ें प्लेटा गांव में ही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यह अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है। परिवार ने जिस धैर्य के साथ 13 साल तक हरीश की सेवा की, वह मिसाल है। आज गांव की गलियों में सन्नाटा है और हर कोई हरीश की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना कर रहा है। रीमा कहती हैं कि हरीश का जाना एक ऐसी खामोशी का अंत है, जिसने एक पिता की जवानी और एक बेटे की पूरी उम्र को अपने आगोश में ले लिया था।
हरीश राणा के परिवार की जड़ें जयसिंहपुर उपमंडल की पंचायत सरी मोलग के प्लेटा गांव से जुड़ी रही हैं। स्थानीय लोगों ने हरीश राणा के परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि यह अत्यंत पीड़ादायक स्थिति है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि भले ही परिवार लंबे समय से प्रदेश से बाहर रह रहा हो, लेकिन अपने पैतृक स्थान से जुड़ाव हमेशा बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भले ही हरीश राणा का परिवार वर्षों पहले रोजगार के सिलसिले में प्रदेश से बाहर बस गया हो, लेकिन प्लेटा गांव से कभी नाता नहीं तोड़ा।
अशोक राणा ने कोविड से पूर्व गांव में नया मकान बनाया था और कोरोना काल में जब काम धंधे बंद थे तो यहीं परिवार के साथ समय बिताया था। हरीश राणा के मामा मिलाप सिंह के अनुसार हरीश बचपन से अपने ननिहाल से बहुत गहराई से जुड़ा हुआ था और पढ़ाई के दौरान भी लंबे समय तक उनके साथ रहा। 20 अगस्त 2013, रक्षाबंधन के दिन ममेरे भाई ने जब उसे राखी बंधवाने चलने को कहा, तो हरीश ने हंसते हुए जवाब दिया.. आप चलो, मैं थोड़ी देर बाद आऊंगा… लेकिन किसे पता था कि यह उसकी आखिरी सामान्य बातचीत होगी। इसके बाद वह चौथी मंजिल से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। इसके बाद हरीश कोमा में चला गया और फिर कभी होश में नहीं आ सका।