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हिमाचल प्रदेश: कृषि वैज्ञानिक प्रो. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री, बिलासपुर से रखते हैं संबंध; जानें इनके बारे में
संवाद न्यूज एजेंसी, भराड़ी (बिलासपुर)।
Published by: अंकेश डोगरा
Updated Mon, 26 Jan 2026 10:10 AM IST
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सार
Himachal Scientist Padma Shri: हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले से ताल्लुक रखने वाले प्रख्यात कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रेम लाल गौतम को पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। पढ़ें पूरी खबर...
प्रो. प्रेमलाल गौतम
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
बिलासपुर के बरठीं क्षेत्र के कंडयाना गांव के कृषि वैज्ञानिक प्रो. प्रेमलाल गौतम को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। कृषि विज्ञान के क्षेत्र में उनके दशकों लंबे नवाचारी और उल्लेखनीय योगदान के लिए केंद्र सरकार ने यह सम्मान देने की घोषणा की है। 78 वर्षीय प्रो. गौतम ने फसलों की नई किस्मों के विकास, कृषि अनुसंधान, शिक्षा और संस्थागत निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके शोध कार्यों से देशभर के किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। प्रो. गौतम ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय, सोलन कृषि विश्वविद्यालय, आईसीएआर तथा राष्ट्रीय स्तर के कई महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए कृषि अनुसंधान कार्यों को नई दिशा दी। वर्तमान में वह बिहार के समस्तीपुर स्थित सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पूसा के चांसलर हैं
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कृषि विज्ञान के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले बिलासपुर के कंडयाना गांव निवासी प्रो. प्रेमलाल गौतम को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें कृषि अनुसंधान, उन्नत बीज विकास, जैव विविधता संरक्षण और कृषि संस्थानों को सशक्त बनाने जैसे ऐतिहासिक कार्यों के लिए दिया जा रहा है।
कृषि विज्ञान के क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने और किसानों की आय बढ़ाने में अहम भूमिका निभाने वाले बिलासपुर के कंडयाना गांव निवासी प्रो. प्रेमलाल गौतम को देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। यह सम्मान उन्हें कृषि अनुसंधान, उन्नत बीज विकास, जैव विविधता संरक्षण और कृषि संस्थानों को सशक्त बनाने जैसे ऐतिहासिक कार्यों के लिए दिया जा रहा है।
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पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय में सेवाकाल के दौरान प्रो. गौतम ने ऐसी कई फसल किस्मों के विकास में योगदान दिया, जिनकी पैदावार अधिक, रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों में अनुकूलता अधिक थी। इन किस्मों को अपनाकर देश के लाखों किसानों को सीधा आर्थिक लाभ मिला। प्रो. गौतम ने कृषि को केवल शोध पत्रों तक सीमित न रखते हुए आधुनिक कृषि तकनीकों को सीधे किसानों के खेतों तक पहुंचाया। उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रमों, फील्ड डेमो और विस्तार योजनाओं के माध्यम से वैज्ञानिक खेती को व्यवहार में उतारा। गढ़वाल क्षेत्र के शनिचौरी अनुसंधान स्टेशन के संचालन के दौरान उन्होंने पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों की जरूरतों के अनुरूप फसल चक्र और तकनीकें विकसित कीं, जिससे पहाड़ी किसानों की आजीविका सुदृढ़ हुई।
आईसीएआर के नेशनल ब्यूरो ऑफ प्लांट जेनेटिक रिसोर्सेज के निदेशक के रूप में उन्होंने दुर्लभ और विलुप्त फसल प्रजातियों के संरक्षण का नेतृत्व किया। उनके प्रयासों से देश की जैव विविधता और भविष्य की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिली।
कृषि संस्थानों को दी नई दिशा
कृषि विश्वविद्यालय सोलन में डीन, पंतनगर विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर और आईसीएआर में नेशनल डायरेक्टर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार तंत्र में व्यापक सुधार किए और राष्ट्रीय स्तर की कई योजनाओं को गति दी।
नई पीढ़ी के कृषि वैज्ञानिक तैयार किए
अपने लंबे अकादमिक जीवन में उन्होंने सैकड़ों कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया, जो आज देश की कृषि नीति और अनुसंधान व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पूसा (समस्तीपुर, बिहार) के चांसलर के रूप में सेवाएं दे रहे प्रो. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री मिलने से उनके पैतृक क्षेत्र कंडयाना, समेत हिमाचल प्रदेश में गर्व और खुशी की लहर है।
कृषि विश्वविद्यालय सोलन में डीन, पंतनगर विश्वविद्यालय में वाइस चांसलर और आईसीएआर में नेशनल डायरेक्टर रहते हुए उन्होंने शिक्षा, अनुसंधान और विस्तार तंत्र में व्यापक सुधार किए और राष्ट्रीय स्तर की कई योजनाओं को गति दी।
नई पीढ़ी के कृषि वैज्ञानिक तैयार किए
अपने लंबे अकादमिक जीवन में उन्होंने सैकड़ों कृषि वैज्ञानिकों और शोधार्थियों का मार्गदर्शन किया, जो आज देश की कृषि नीति और अनुसंधान व्यवस्था में अहम भूमिका निभा रहे हैं। वर्तमान में सेंट्रल एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पूसा (समस्तीपुर, बिहार) के चांसलर के रूप में सेवाएं दे रहे प्रो. प्रेमलाल गौतम को पद्मश्री मिलने से उनके पैतृक क्षेत्र कंडयाना, समेत हिमाचल प्रदेश में गर्व और खुशी की लहर है।