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हिमाचल विधानसभा: जयराम ठाकुर बोले- विधवा, अनाथ के नाम पर सेस के सहारे सरकार चलाना चाहते हैं सीएम

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला। Published by: Krishan Singh Updated Mon, 23 Mar 2026 07:37 PM IST
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सार

प्रदेश 10 साल पीछे चला गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने यह आरोप बजट भाषण पर चर्चा के दौरान लगाएं। कहा कि केंद्र और सभी राज्यों के बजट आगे ग्रोथ करते हैं, लेकिन हिमाचल का बजट इतिहास में पहली बार पीछे हटा है।

Himachal Assembly: Jairam Thakur Says CM Wants to Run the Govt on the Back of a Cess Levied in the Name of Wid
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री सरकार चलाने के लिए विधवा और अनाथ सेस लगा रहे हैं। प्रदेश में वित्तीय आपात लग चुका है, सरकार वेंटिलेटर पर है। प्रदेश 10 साल पीछे चला गया है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने यह आरोप बजट भाषण पर चर्चा के दौरान लगाएं। कहा कि केंद्र और सभी राज्यों के बजट आगे ग्रोथ करते हैं, लेकिन हिमाचल का बजट इतिहास में पहली बार पीछे हटा है। जिस तरह से अधिकारियों के वेतन का कुछ हिस्सा छह माह के लिए डेफर किए गए हैं, इससे स्थिति स्पष्ट है कि कांग्रेस सरकार अपना कार्यकाल पूरा करके चली जाएगी लेकिन आने वाली सरकार के लिए गंभीर आर्थिक संकट खड़ा हो जाएगा। अधिकारियों और कर्मचारियों की करोड़ों की देनदारियां देनी होंगी। आंध्र प्रदेश में भी कोरोना काल के दौरान अधिकारियों के वेतन पर कट लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि किसी कर्मचारी का वेतन नहीं काट सकते है।

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पिछले बजट वर्ष में 2024-25 की अपेक्षा मेजर सेक्टर में 2354 करोड़ रुपये यानी 21 प्रतिशत की कमी आई। अगले वित्त वर्ष में यह कटौती चालू वित्त वर्ष के मुकाबले 3188 करोड़ यानी 41.77 फीसदी की कमी आई। पूंजीगत पिछले तीन वर्षों में लगातार गिरते हुए 3089 करोड़ यानी कि आधा हो गया। पिछले चार बजट में राजस्व घाटा औसतन 10620 करोड़ रहा। ठाकुर ने कहा कि प्रदेश में नौकरियां लगातार कम हो रही हैं। जब हम सत्ता में आए तो 1 लाख 77 हजार 338 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। 2022 में एक लाख 90 हजार 137 लोगों के पास सरकारी नौकरियां थी। यानी 12749 सरकारी नौकरियां बढ़ीं। आंकड़ों के अनुसार 2025 में 1 लाख 75 हजार 579 नौकरियां हैं। तीन साल में कुल 15 हजार नौकरियां कम हो गई हैं। सुक्खू सरकार लगातार केंद्र सरकार को कोसती रहती है लेकिन पिछले तीन वर्षों में राजस्व प्राप्तियां में केंद्र की हिस्सेदारी क्रमशः 56 फीसदी, 54 और 53.6 फीसदी है। केंद्र सरकार द्वारा केंद्रीय करों में हिस्सा, केंद्रीय अनुदान और केंद्र प्रायोजित योजनाओं को मिलाकर पिछले छह वर्षों में वित्तीय वर्ष 2021-22 से 2026 तक क्रमशः 24990 करोड़, 22723 करोड़, 24315 करोड़, 23413 करोड़, 23050 करोड़, 21124 करोड़ रुपये मिले।

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बजट झूठ का पुलिंदा
जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार का यह बजट सिर्फ झूठ का पुलिंदा है। मुख्यमंत्री खेत बाड़बंदी योजना के लिए प्रस्तावित बजट केवल 10 करोड़ है, जबकि हमने 40 करोड़ का प्रावधान किया था। मुख्यमंत्री हिमकेयर योजना के भी बजट को कम कर दिया है। बीपीएल परिवारों को लाभ देने के बजाय केवल एक लाख परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने की घोषणा की है। बावजूद 2026-27 में बिजली सब्सिडी का बजट घटाकर 1562 करोड़ से घटाकर 858 करोड़ कर दिया है जबकि 125 यूनिट फ्री योजना का लाभ लोगों को मिल नहीं रहा है। इसी तरह प्रमुख कार्यों का बजट 2026-27 में 2,624 करोड़ है। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत केवल वित्तीय आपातकाल की स्थिति में ही वेतन में कटौती की जा सकती है।

वेतन के लिए केवल 5 करोड़ रुपये अधिक
बजट में वेतन के लिए 14,721 करोड़ रूपये का प्रावधान है, जो वर्तमान वर्ष से मात्र 5 करोड़ अधिक है। इससे स्पष्ट है कि महंगाई भत्ता देने की कोई मंशा नहीं है। पैरा 26 में मुख्यमंत्री ने कहा कि 2026-27 में बिजली रॉयल्टी 2,500 करोड़ होगी, लेकिन बजट में बिजली से प्राप्ति केवल 2,191 करोड़ दिखाई गई है, जो पिछले वर्ष से भी 8 करोड़ कम है। इसी तरह राज्य आबकारी से आय 2026-27 में 3,174 करोड़ अनुमानित है जो 2025-26 के 3,256 करोड़ से कम है। विकास केवल नादौन और देहरा क्षेत्रों तक सीमित है।

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