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हिमाचल कैबिनेट के फैसले: पिछले दो चुनावों में आरक्षित पंचायतें इस बार होंगी ओपन, 2010 को माना जाएगा आधार वर्ष
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Sun, 08 Mar 2026 09:36 AM IST
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सार
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री0 सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में शनिवार को संपन्न कैबिनेट मीटिंग में कई अहम फैसले लिए गए। जानें विस्तार से...
हिमाचल मंत्रिमंडल की बैठक।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश में जो पंचायतें पिछले दो चुनावों में आरक्षित रही हैं, वो इस बार ओपन होंगी। इसके लिए हिमाचल प्रदेश पंचायती राज निर्वाचन नियमावली 1994 के नियम 28, 87, 88 और 89 में संशोधन होगा। संशोधन के तहत वर्ष 2010 को आधार वर्ष मानते हुए जो पंचायतें लगातार दो कार्यकाल तक आरक्षित रहीं हैं, उन्हें आगामी पंचायत चुनावों में आरक्षित नहीं किया जाएगा। इस प्रस्ताव पर आम लोगों से आपत्तियां और सुझाव भी लिए जाएंगे।
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शनिवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह फैसला लिया गया है। मंत्रिमंडल ने चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ हेली टैक्सी सेवा को सप्ताह में छह दिन करने को मंजूरी दी है। अब प्रतिदिन दो यानी सप्ताह में 12 उड़ानें होंगी। अभी तक सप्ताह में तीन उड़ानें ही होती थीं। सप्ताह में 12 उड़ानों के संचालन को सुचारु रखने के लिए सरकार इसे वित्त पोषित करेगी।
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बैठक में सामाजिक सुरक्षा पेंशन नियम 2010 में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई, जिसके तहत निराश्रित शब्द को अधिक स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है और लाभ प्राप्त करने के लिए प्रमाणन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है। संशोधित प्रावधानों के अनुसार परितयक्ता यानी वे महिलाएं जिन्हें उनके पतियों ने छोड़ दिया है या जो उनके साथ नहीं रह रही हैं और जिनकी आय का कोई स्वतंत्र स्रोत नहीं है, उन्हें निराश्रित महिला माना जाएगा। उन्हें सामाजिक सुरक्षा पेंशन मिलेगी।
डॉक्टरों की तर्ज पर एलोपैथी में स्टाफ नर्स को हायर स्टडी में 40 प्रतिशत वेतन दिया जाता था। उन्हें अब पूरा वेतन मिलेगा। आयुष के डॉक्टरों को भी हायर स्टडी में पूरा वेतन मिलेगा। बैठक में सिंगल विलेज स्कीम और मल्टी विलेज स्कीम के तहत गांवों में स्थापित अधोसंरचना के संचालन एवं रखरखाव नीति के तहत ग्राम पंचायतों को सौंपने की स्वीकृति दी गई।
मंत्रिमंडल ने हिमुडा के पक्ष में 80 वर्ष की लीज देने की स्वीकृति दी, जिसके लिए हिमाचल प्रदेश लीज नियमावली 2013 के नियम 7 में संशोधन किया जाएगा। अभी तक हिमुडा को 40 वर्ष तक ही भूमि लीज की अवधि तय थी।
कैबिनेट ने स्वर्ण जयंती ऊर्जा नीति के तहत स्थानीय क्षेत्र विकास निधि का 40 प्रतिशत चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट को वित्तीय मदद देने का निर्णय लिया। मंत्रिमंडल ने जल जीवन मिशन के तहत जल शक्ति विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन राज्य सरकार के संसाधनों से जारी करने का निर्णय लिया। कैबिनेट ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार की ओर से अभी तक इस मिशन के तहत धनराशि जारी नहीं की गई है।
विभिन्न विभागों में भरे जाएंगे 111 पद
मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों में 111 से ज्यादा पद भरने को मंजूरी दी गई। इनमें इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में कनिष्ठ सहायक प्रवक्ता के 60 पद, सहकारिता विभाग में सहायक पंजीयक सहकारी समिति के दो, निरीक्षक सहकारी समिति के 30, खेल छात्रावासों में कोच के 16 और सूचना एवं जन संपर्क विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के तीन पद भरे जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2016 में चयनित पटवारी पद के शेष सात अभ्यर्थियों को लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई। सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत अंशकालिक जलवाहकों को नियमित करने का भी फैसला लिया गया।
मंत्रिमंडल की बैठक में विभिन्न विभागों में 111 से ज्यादा पद भरने को मंजूरी दी गई। इनमें इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेजों में कनिष्ठ सहायक प्रवक्ता के 60 पद, सहकारिता विभाग में सहायक पंजीयक सहकारी समिति के दो, निरीक्षक सहकारी समिति के 30, खेल छात्रावासों में कोच के 16 और सूचना एवं जन संपर्क विभाग में जूनियर ऑफिस असिस्टेंट (आईटी) के तीन पद भरे जाएंगे। इसके अलावा वर्ष 2016 में चयनित पटवारी पद के शेष सात अभ्यर्थियों को लाहौल-स्पीति और कुल्लू जिलों में रिक्त पदों पर नियुक्ति को मंजूरी दी गई। सिरमौर जिले में शिक्षा विभाग में कार्यरत अंशकालिक जलवाहकों को नियमित करने का भी फैसला लिया गया।
15 जलविद्युत प्रोजेक्ट रद्द 12 का दोबारा होगा आवंटन
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से ठप पड़ी 15 लघु जलविद्युत प्रोजेक्टों को हिमाचल प्रदेश सरकार ने रद्द करने का फैसला किया है। शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इनमें से 12 परियोजनाओं को दोबारा विज्ञापित करने को मंजूरी दी गई, जबकि तीन परियोजनाओं को दोबारा आवंटित नहीं करने का फैसला लिया है।
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से ठप पड़ी 15 लघु जलविद्युत प्रोजेक्टों को हिमाचल प्रदेश सरकार ने रद्द करने का फैसला किया है। शनिवार को मंत्रिमंडल की बैठक में इनमें से 12 परियोजनाओं को दोबारा विज्ञापित करने को मंजूरी दी गई, जबकि तीन परियोजनाओं को दोबारा आवंटित नहीं करने का फैसला लिया है।
नगर निकायों के अध्यक्षों उपाध्यक्षों का भी प्रत्यक्ष चुनाव करवाने की तैयारी
हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के चुनाव की व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी है। शहरी विकास विभाग का प्रस्ताव सिरे चढ़ा तो नगर निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष भी सीधे जनता चुनेगी। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों की चुनाव प्रक्रिया में इस बदलाव के लिए विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है। शनिवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को भी लाया गया। प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी, लेकिन अंतिम समय में इसे चर्चा के लिए अगली बैठक तक टाल दिया गया।
नगर निकायों में अभी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव जनता की ओर से चुने गए पार्षद करते हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो जनता सीधे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए भी मतदान करेगी। प्रदेश में कुल 73 शहरी स्थानीय निकाय हैं और इनके चुनाव 31 मई से पहले करवाने हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रत्यक्ष चुनाव करवाने से अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का जनाधार मजबूत होगा और इससे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।
हिमाचल प्रदेश में नगर निकायों के चुनाव की व्यवस्था में बदलाव करने की तैयारी है। शहरी विकास विभाग का प्रस्ताव सिरे चढ़ा तो नगर निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष भी सीधे जनता चुनेगी। नगर निगम, नगर परिषद और नगर पंचायतों की चुनाव प्रक्रिया में इस बदलाव के लिए विभाग ने प्रस्ताव तैयार कर सरकार को भेज दिया है। शनिवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस प्रस्ताव को भी लाया गया। प्रस्ताव पर चर्चा होनी थी, लेकिन अंतिम समय में इसे चर्चा के लिए अगली बैठक तक टाल दिया गया।
नगर निकायों में अभी अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव जनता की ओर से चुने गए पार्षद करते हैं। प्रस्ताव को मंजूरी मिली तो जनता सीधे अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए भी मतदान करेगी। प्रदेश में कुल 73 शहरी स्थानीय निकाय हैं और इनके चुनाव 31 मई से पहले करवाने हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रत्यक्ष चुनाव करवाने से अध्यक्ष और उपाध्यक्षों का जनाधार मजबूत होगा और इससे अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।
शहरी निकायों के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का सीधे चुनाव करवाने पर प्रदेश सरकार विचार कर रही है। ऐसा होने पर शहरी निकायों में रहने वाले लोग पार्षद के अलावा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष को सीधे वोट करेंगे। - विक्रमादित्य सिंह शहरी विकास मंत्री
हिमाचल में 15 जलविद्युत प्रोजेक्ट रद्द, 12 का दोबारा होगा आवंटन
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से ठप पड़ी 15 लघु जलविद्युत परियोजनाओं को राज्य सरकार ने रद्द करने का फैसला किया है। शनिवार को बैठक में इनमें से 12 परियोजनाओं को दोबारा विज्ञापित करने को मंजूरी दी गई जबकि तीन को दोबारा आवंटित नहीं करने का फैसला लिया है।
कई परियोजनाएं ऐसी हैं जिनमें निर्धारित समय तक काम शुरू नहीं हुआ, जबकि कुछ मामलों में कंपनियों ने इम्प्लीमेंटेशन एग्रीमेंट (आईए) पर हस्ताक्षर तक नहीं किए। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इन परियोजनाओं का आवंटन 2001 से 2017 के बीच किया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ सका।
अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाओं में कंपनियां निर्धारित जीरो डेट हासिल नहीं कर पाईं, जो परियोजना शुरू करने की प्रक्रिया का अहम चरण होता है। वहीं कुछ परियोजनाओं में कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, जिसके चलते परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहीं। इन परियोजनाओं के लिए कंपनियों द्वारा जमा कराई गई राशि को अब सरकार द्वारा जब्त किया जाएगा।
इन परियोजनाओं को नई नीति के तहत फिर से विज्ञापित कर निजी कंपनियों से नए सिरे से बोलियां आमंत्रित की जाएंगी, ताकि लंबे समय से लंबित जलविद्युत क्षमता का उपयोग किया जा सके। 14 मेगावाट की उहल खड्ड के अलावा उहल (14), कुरहेड-दो (7.5), श्रीखंड (8), भरारी (6 ), छट्टे का नाला (9), पंडार (8 ), नरगानी (8), सुंद्राली (11), जोबरी (18), बुजलिंग (20) और नेसांग (20) प्रोजेक्ट को रद्द करते हुए नए सिरे से आवंटित करने का फैसला किया है। माकोरी (20.8), पार्वती (12) और सरसादी (9.6) को पूरी तरह से रद्द किया है।
हिमाचल प्रदेश में लंबे समय से ठप पड़ी 15 लघु जलविद्युत परियोजनाओं को राज्य सरकार ने रद्द करने का फैसला किया है। शनिवार को बैठक में इनमें से 12 परियोजनाओं को दोबारा विज्ञापित करने को मंजूरी दी गई जबकि तीन को दोबारा आवंटित नहीं करने का फैसला लिया है।
कई परियोजनाएं ऐसी हैं जिनमें निर्धारित समय तक काम शुरू नहीं हुआ, जबकि कुछ मामलों में कंपनियों ने इम्प्लीमेंटेशन एग्रीमेंट (आईए) पर हस्ताक्षर तक नहीं किए। ऐसे मामलों में संबंधित कंपनियों को पहले कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे। इन परियोजनाओं का आवंटन 2001 से 2017 के बीच किया गया था, लेकिन वर्षों बीत जाने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ सका।
अधिकारियों ने बताया कि कई परियोजनाओं में कंपनियां निर्धारित जीरो डेट हासिल नहीं कर पाईं, जो परियोजना शुरू करने की प्रक्रिया का अहम चरण होता है। वहीं कुछ परियोजनाओं में कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर ही नहीं किए, जिसके चलते परियोजनाएं वर्षों तक अटकी रहीं। इन परियोजनाओं के लिए कंपनियों द्वारा जमा कराई गई राशि को अब सरकार द्वारा जब्त किया जाएगा।
इन परियोजनाओं को नई नीति के तहत फिर से विज्ञापित कर निजी कंपनियों से नए सिरे से बोलियां आमंत्रित की जाएंगी, ताकि लंबे समय से लंबित जलविद्युत क्षमता का उपयोग किया जा सके। 14 मेगावाट की उहल खड्ड के अलावा उहल (14), कुरहेड-दो (7.5), श्रीखंड (8), भरारी (6 ), छट्टे का नाला (9), पंडार (8 ), नरगानी (8), सुंद्राली (11), जोबरी (18), बुजलिंग (20) और नेसांग (20) प्रोजेक्ट को रद्द करते हुए नए सिरे से आवंटित करने का फैसला किया है। माकोरी (20.8), पार्वती (12) और सरसादी (9.6) को पूरी तरह से रद्द किया है।
10 मेगावाट का पंडोह प्रोजेक्ट बीबीएमबी को
राज्य मंत्रिमंडल ने पंडोह में 10 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना को बीबीएमबी को इस शर्त पर आवंटित करने का निर्णय लिया है कि वह उपयोग में न लाई गई भूमि राज्य सरकार को वापस करेगा। इस परियोजना से राज्य सरकार को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली के साथ ही पांच प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी के रूप में प्राप्त होगी।
तीनों दिन उड़ानें पैक होने से बढ़ाई हवाई सेवाएं : चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर हेलीकॉप्टर सेवा अब सोमवार से शनिवार तक रोज उपलब्ध होगी। अब तक दिन में एक उड़ान संचालित हो रही थी लेकिन अब दिन में दो बार उड़ानें होंगी। बैठक में चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर सप्ताह में तीन उड़ानों से बढ़ा कर बारह करने का निर्णय लिया गया है। इस सेवा के लिए प्रदेश सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग करेगी। संजौली हेलीपोर्ट से 21 जनवरी को चंडीगढ़-संजौली रूट पर सेवाएं शुरू की थीं, तब से तीनों दिन उड़ानें पैक चल रही हैं, इसके चलते ही सरकार ने उड़ानें बढ़ाई हैं। रूट पर प्रति व्यक्ति किराया 3,500 रुपये तय है।
राज्य मंत्रिमंडल ने पंडोह में 10 मेगावाट क्षमता की जल विद्युत परियोजना को बीबीएमबी को इस शर्त पर आवंटित करने का निर्णय लिया है कि वह उपयोग में न लाई गई भूमि राज्य सरकार को वापस करेगा। इस परियोजना से राज्य सरकार को 13 प्रतिशत मुफ्त बिजली के साथ ही पांच प्रतिशत बिजली हिस्सेदारी के रूप में प्राप्त होगी।
तीनों दिन उड़ानें पैक होने से बढ़ाई हवाई सेवाएं : चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर हेलीकॉप्टर सेवा अब सोमवार से शनिवार तक रोज उपलब्ध होगी। अब तक दिन में एक उड़ान संचालित हो रही थी लेकिन अब दिन में दो बार उड़ानें होंगी। बैठक में चंडीगढ़-शिमला-चंडीगढ़ रूट पर सप्ताह में तीन उड़ानों से बढ़ा कर बारह करने का निर्णय लिया गया है। इस सेवा के लिए प्रदेश सरकार वायबिलिटी गैप फंडिंग करेगी। संजौली हेलीपोर्ट से 21 जनवरी को चंडीगढ़-संजौली रूट पर सेवाएं शुरू की थीं, तब से तीनों दिन उड़ानें पैक चल रही हैं, इसके चलते ही सरकार ने उड़ानें बढ़ाई हैं। रूट पर प्रति व्यक्ति किराया 3,500 रुपये तय है।
क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के गठन को दी मंजूरी
मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिले के ढगवार में क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी, जिसमें कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के दुग्ध उत्पादक शामिल होंगे। साथ ही संयंत्र के प्रबंधन और संचालन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।
भंडारण टैंक से आगे पानी के वितरण का जिम्मा पंचायतों को
हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग के भंडारण टैंकों से आगे पानी के वितरण का जिम्मा अब पंचायतें संभालेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों की सिंगल विलेज स्कीम (एक गांव या पंचायत के लिए बनाई पेयजल योजना) और मल्टी विलेज स्कीम (एक ही जल स्रोत से कई गांवों को पेयजल आपूर्ति की योजना) पंचायतों को सौंपी जाएगी। पंचायतें इन योजनाओं के संचालन, रखरखाव और जल आपूर्ति की निगरानी करेगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रबंधन होने से योजनाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छोटी-मोटी तकनीकी या आपूर्ति संबंधी समस्याओं का समाधान भी जल्दी हो सकेगा। हालांकि तकनीकी सहायता, बड़े मरम्मत कार्य और निगरानी की जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग के पास ही रहेगी।
मंत्रिमंडल ने कांगड़ा जिले के ढगवार में क्षेत्रीय सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ लिमिटेड के गठन को मंजूरी दी, जिसमें कांगड़ा, हमीरपुर, चंबा और ऊना जिलों के दुग्ध उत्पादक शामिल होंगे। साथ ही संयंत्र के प्रबंधन और संचालन के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को प्रशासक नियुक्त किया जाएगा।
भंडारण टैंक से आगे पानी के वितरण का जिम्मा पंचायतों को
हिमाचल प्रदेश में जल शक्ति विभाग के भंडारण टैंकों से आगे पानी के वितरण का जिम्मा अब पंचायतें संभालेंगी। ग्रामीण क्षेत्रों की सिंगल विलेज स्कीम (एक गांव या पंचायत के लिए बनाई पेयजल योजना) और मल्टी विलेज स्कीम (एक ही जल स्रोत से कई गांवों को पेयजल आपूर्ति की योजना) पंचायतों को सौंपी जाएगी। पंचायतें इन योजनाओं के संचालन, रखरखाव और जल आपूर्ति की निगरानी करेगी। सरकार का मानना है कि स्थानीय स्तर पर प्रबंधन होने से योजनाओं की कार्यक्षमता बढ़ेगी और छोटी-मोटी तकनीकी या आपूर्ति संबंधी समस्याओं का समाधान भी जल्दी हो सकेगा। हालांकि तकनीकी सहायता, बड़े मरम्मत कार्य और निगरानी की जिम्मेदारी जल शक्ति विभाग के पास ही रहेगी।