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हिमाचल: रोहड़ू के कुलगांव में हर्ष फायरिंग बनी जानलेवा, महिला की मौत से पसरा मातम; स्थानीय लोगों ने की ये मांग
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।
Published by: Ankesh Dogra
Updated Mon, 27 Apr 2026 11:14 AM IST
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सार
जिला शिमला के रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में हवाई फायरिंग में एक महिला की मौत हो गई। पुलिस ने मौके पर से आरोपी को गिरफ्तार किया है। पढ़ें पूरी खबर...
सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में देर रात एक धार्मिक अनुष्ठान के दौरान हुई हवाई फायरिंग ने खुशी के माहौल को मातम में बदल दिया। देवता के आयोजन में सैकड़ों लोग पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर नाच-गा रहे थे, तभी अचानक हुई फायरिंग के दौरान एक महिला को गोली लग गई, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
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आरोपी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
मृतका की पहचान रितिका (उर्फ गुड़िया), पत्नी सतीश, निवासी गांव बकोरा डाकघर आंध्रा, तहसील चिड़गांव, जिला शिमला के रूप में हुई है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस ने मौके पर से आरोपी को गिरफ्तार किया है । आरोपी रितिक रोहडू बाजार का रहने वाला है। बंदूक उसके किसी रिश्तेदार की बताई जा रही है।
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पुलिस कर रही मामले की जांच
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, देवता के अनुष्ठान के दौरान कुछ लोगों द्वारा हर्ष फायरिंग की जा रही थी। इसी बीच अचानक चली एक गोली भीड़ में जा लगी और रितिका को गंभीर रूप से घायल कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल ले जाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उनकी मृत्यु हो चुकी थी। घटना के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है और यह पता लगाया जा रहा है कि फायरिंग किसने की और हथियार वैध था या नहीं।
'धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में हथियारों पर लगे प्रतिबंध'
इस दर्दनाक हादसे ने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों में हथियारों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की हर्ष फायरिंग से बचें, क्योंकि यह न केवल अवैध है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
इस दर्दनाक हादसे ने धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे आयोजनों में हथियारों के इस्तेमाल पर सख्त प्रतिबंध लगाया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके। प्रशासन की ओर से लोगों से अपील की गई है कि किसी भी तरह की हर्ष फायरिंग से बचें, क्योंकि यह न केवल अवैध है, बल्कि जानलेवा भी साबित हो सकती है।
रोहड़ू अस्पताल में हंगामा, मृत महिला के परिजनों का प्रदर्शन
कुलगांव में हुई फायरिंग की घटना के बाद मृत महिला का शव जब रोहड़ू अस्पताल पहुंचा तो वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और स्थानीय विधायक व एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की।
जानकारी के अनुसार, गोली लगने से घायल महिला को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया था, इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला भेजा जाना था। सुबह करीब 10 बजे पुलिस प्रशासन द्वारा शव को शिमला भेजने के लिए वाहन मंगवाया गया, लेकिन मौके पर पहुंचे परिजनों का गुस्सा उस समय भड़क गया जब उन्होंने देखा कि जिस वाहन में शव ले जाने की व्यवस्था की गई थी, उसमें पहले से रेत भरी हुई थी। इसे लेकर परिजनों ने कड़ा विरोध जताया और इसे मृतका के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस समय कुलगांव में फायरिंग की घटना हुई और हथियार लहराए गए, उस दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही। उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर ऐसी घटना को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा। काफी देर तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने शव को एंबुलेंस के माध्यम से शिमला भेजने की व्यवस्था की, तब जाकर मामला शांत हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
कुलगांव में हुई फायरिंग की घटना के बाद मृत महिला का शव जब रोहड़ू अस्पताल पहुंचा तो वहां माहौल तनावपूर्ण हो गया। महिला की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और स्थानीय विधायक व एसडीएम के खिलाफ नारेबाजी की।
जानकारी के अनुसार, गोली लगने से घायल महिला को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल लाया गया था, इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज शिमला भेजा जाना था। सुबह करीब 10 बजे पुलिस प्रशासन द्वारा शव को शिमला भेजने के लिए वाहन मंगवाया गया, लेकिन मौके पर पहुंचे परिजनों का गुस्सा उस समय भड़क गया जब उन्होंने देखा कि जिस वाहन में शव ले जाने की व्यवस्था की गई थी, उसमें पहले से रेत भरी हुई थी। इसे लेकर परिजनों ने कड़ा विरोध जताया और इसे मृतका के प्रति असंवेदनशीलता करार दिया।
परिजनों ने आरोप लगाया कि जिस समय कुलगांव में फायरिंग की घटना हुई और हथियार लहराए गए, उस दौरान पुलिस और प्रशासन की भूमिका संदिग्ध रही। उन्होंने सवाल उठाए कि आखिर ऐसी घटना को रोकने के लिए समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई। स्थिति को संभालने के लिए पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर हस्तक्षेप करना पड़ा। काफी देर तक चले विरोध-प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने शव को एंबुलेंस के माध्यम से शिमला भेजने की व्यवस्था की, तब जाकर मामला शांत हुआ।
इस घटना ने एक बार फिर कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है, ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
रोहड़ू फायरिंग कांड ने कानून-व्यवस्था की पोल खोली- राकेश जमवाल
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में धार्मिक आयोजन के दौरान हुई फायरिंग की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया। उन्होंने मृतका रितिका (उर्फ गुड़िया) के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। राकेश जमवाल ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।
राकेश जमवाल ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में कानून का भय खत्म हो चुका है और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन और पुलिस सतर्क होती, तो इस तरह की दुखद घटना को रोका जा सकता था। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हथियार लहराना और फायरिंग होना प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण है। राकेश जमवाल ने रोहड़ू अस्पताल में शव को ले जाने की व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस प्रकार रेत से भरे वाहन में शव भेजने की कोशिश की गई, वह प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि परिजनों का आक्रोश पूरी तरह जायज है और सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए।
भाजपा प्रदेश मुख्य प्रवक्ता राकेश जमवाल ने रोहड़ू उपमंडल के कुलगांव में धार्मिक आयोजन के दौरान हुई फायरिंग की घटना पर गहरा दुःख व्यक्त करते हुए इसे अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बताया। उन्होंने मृतका रितिका (उर्फ गुड़िया) के परिवार के प्रति संवेदना प्रकट करते हुए कहा कि यह घटना केवल एक हादसा नहीं, बल्कि प्रदेश में बिगड़ती कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक विफलता का परिणाम है। राकेश जमवाल ने कहा कि धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में हर्ष फायरिंग जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन कांग्रेस सरकार इसे रोकने में पूरी तरह नाकाम रही है।
राकेश जमवाल ने कहा कि यह घटना बताती है कि प्रदेश में कानून का भय खत्म हो चुका है और प्रशासन पूरी तरह निष्क्रिय बना हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि समय रहते प्रशासन और पुलिस सतर्क होती, तो इस तरह की दुखद घटना को रोका जा सकता था। सैकड़ों लोगों की मौजूदगी में हथियार लहराना और फायरिंग होना प्रशासन की नाकामी का सबसे बड़ा उदाहरण है। राकेश जमवाल ने रोहड़ू अस्पताल में शव को ले जाने की व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जिस प्रकार रेत से भरे वाहन में शव भेजने की कोशिश की गई, वह प्रशासन की असंवेदनशीलता को दर्शाता है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि मानवता को शर्मसार करने वाली घटना है। उन्होंने कहा कि परिजनों का आक्रोश पूरी तरह जायज है और सरकार को इस मामले में जवाब देना चाहिए।

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